बिहार में सरकार कहती है कि गांव-गांव सड़क बन चुकी है. कुछ तस्वीरें ऐसी भी सामने आ रही हैं जो सरकारी दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं. मनेर के पालीगंज में ग्रामीणों ने बैठक कर 'रोड नहीं तो वोट नहीं' का ऐलान किया है. पालीगंज के निरखपुर गौसगंज होते हुए किंजर के पास अरवल-जहानाबाद मुख्य सड़क तक ब्रिटिशकालीन सड़क थी. यह एक निजी जमीन पर थी इसलिए अब तक इस पर सड़क नहीं बनी है.
सड़क बनाने की मांग को लेकर तीन गांव निरखपुर, सिद्धिपुर और महेशपुर गांव के मतदाताओं ने वोट का बहिष्कार करने का मन बनाया है. राजधानी पटना से सटे पालीगंज अनुमंडल के सिद्धिपुर, निरखपुर, निरखपुर बिगहा व महेशपुर गांव के मतदाताओं ने रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा लगाते हुए वोट बहिष्कार कर दिया है.
ग्रामीणों की मानें तो ब्रिटिश जमाने की सड़क जर्जर हो चुकी है. अब सरकार इसका निर्माण नहीं करा रही है. तीनों गांव के ग्रामीणों ने 15 दिनों पूर्व बैठक कर वोट बहिष्कार करने की चेतावनी दी थी, जिसपर कोई कार्यवाही नहीं होते देख मतदाताओं ने विरोध स्वरूप पैदल मार्च भी निकाला था. बावजूद इसके न तो कोई जनप्रतिनिधि ही इनसे मिलने आया और ना ही कोई अधिकारी.
सड़क बनती है तो 15 गांवों के करीब 30 हजार ग्रामीण इससे लाभान्वित होंगे. ग्रामीणों की मानें तो यह सड़क आजादी के पूर्व से है. जिसकी अपनी जमीन होने के बावजूद भी आजतक इस सड़क का निर्माण नहीं कराया गया. सड़क निर्माण कराने की मांग को लेकर पिछले दो हफ्ते से हजारों ग्रामीणों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है. (इनपुट-मनोज कुमार सिंह)
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