नवादा झारखंड से सटा बिहार का ऐतिहासिक जिला है, जिसका इतिहास मगध साम्राज्य से जुड़ा है. इसका मुख्यालय नवादा शहर में है. पुराने समय में यह जंगलों से घिरा हुआ इलाका था. आज भी नवादा के कई प्रखंड वन से घिरे हैं, जैसे रजौली, कौआकोल, गोविन्दपुर आदि. नवादा के उत्तर में नालंदा, दक्षिण में झारखंड का कोडरमा जिला, पूर्व में शेखपुरा एवं जमुई और पश्चिम में गया जिला आते हैं. यहां की बोली मगही और हिंदी और उर्दू मुख्य भाषाएं हैं.
नवादा का प्रसंग महभारत में पाडंवों के अज्ञातवास में भी आया है. नवादा शब्द 'नव' और 'आबाद' दो शब्दों से मिलकर बना है. यानी खुरी नदी के उत्तर में जो मानव बस्तियां बसीं, वे नई-नई आबाद हुई थीं. इसे जाहिर करने के लिए ही यह शब्द प्रयोग में आया था. पहले यह गया जिले के अधीन एक अनुमंडल था. 26 जनवरी 1973 को यह स्वतत्र जिले के रूप में सामने आया. खुरी नदी और राष्ट्रीय राजमार्ग 31 को इस जिले की जीवन रेखा माना जाता है. जिले की मुख्य नदियां सकरी, खुरी, पंचान, ककोलत से भूसरी, तिलैया और धनरजय हैं. इन नदियों के बेड उथले, चौड़े और रेतीले हैं. ये मौसमी नदियां हैं और ज्यादातर बरसात में ही बहती हैं.
मगध का हिस्सा रहा है नवादा
मगध क्षेत्र का हिस्सा होने की वजह से नवादा का ऐतिहासिक महत्व काफी बढ़ जाता है. इस जगह पर वृहद्रथ, मौर्य, गुप्त और कण्व शासकों ने लंबे समय तक शासन किया है. नवादा का अपसाढ़ गांव मगध क्षेत्र के सबसे प्राचीन गांवों में है. यहां ईसा पूर्व पहली सदी की वराह प्रतिमा है. यहां से हासिल हुए ताम्र पत्रों से यह जानकारी मिलती है कि अश्वमेध यज्ञ के बाद राजा पुष्यमित्र शुंग ने नरसिंह शरमन नाम के ब्राह्मण यह गांव उपहार स्वरूप दिया था.
इतिहास के पन्नों में दर्ज है नवादा
सन 1850 के आसपास अंग्रेज जब नए उपनिवेश बना रहे थे, उन्होंने यहीं से गिरमिटिया मजदूरों की एक बड़ी खेप गुएना और फिजी में भेजी थी. इन जगहों पर यहां से गए लोगों ने मिनी इंडिया बसाए हैं. 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में नवादा को स्थानीय लोगों ने अंग्रेजी शासन से मुक्त करा लिया था. आजादी के बाद भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने शेखोदेवरा गांव में सर्वोदय आश्रम की स्थापना की थी. इस आश्रम में जय प्रकाश नारायण ने भी अहम समय गुजारा था. नवादा के पद्म भूषण प्रसाद और पंडित सियाराम तिवारी ध्रुपद एवं ठुमरी शैली के श्रेष्ठ गायकों में शुमार रहे हैं. गौरवशाली इतिहास के विविध रंगों में रंगा नवादा जिला बीचते कुछ सालों में केंद्र के साथ ही राज्य सरकार की उपेक्षा झेलता रहा है.
नवादा में हैं कई धर्मों के प्रमुख स्थल
नवादा प्रकृति की गोद में बसा हुआ जिला है. यहां कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं. ककोलत, प्रजातंत्र द्वार, बाबा की मजार और हनुमान मंदिर, सीतामढ़ी, नारद संग्रहालय, सेखोदेवरा और गुनियाजी तीर्थ यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हैं. बोधगया और पारसनाथ के पास होने की वजह से यह इलाका बौद्ध भिक्षुओं और जैन मुनियों का तपोस्थल रहा है. वारसलीगंज से 10 किमी दूर दरियापुर पार्वती में कपोतक बौद्ध-विहार के अवशेष मिले हैं. अपसर गांव में राजा आदित्यसेन ने महत्वपूर्ण इमारतें और अवलोकितेश्वर की मूर्ति स्थापित करवाई थी. सीतामढी, बराट, नारदीगंज जैसे जगह आदिकाल से हिंदू आस्था के केंद्र रहे हैं.
नवादा में खेती और छिटपुट उद्योग हैं कमाई का जरिया
नवादा की आर्थिकी मुख्य तौर पर खेती पर ही निर्भर है. जिले में करीब 78% लोग खेती पर निर्भर हैं. नवादा में ICAR ने कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की है.यहां पर धान, गेहूं, दालें और सब्जियां उगाई जाती हैं. उद्योगों में यहां बीड़ी फैक्ट्री, कुछ चावल मिलें और सिल्क हैंडलूम हैं. पहले यहां गन्ने की खेती भी काफी मात्रा में हुआ करती थी. जिले की एकमात्र चीनी मिल वारिसलीगंज इलाके में हुआ करती थी, जो फिलहाल बंद पड़ी थी. नवादा से 10 किमी दूर कादिरगंज में छोटी सिल्क इंडस्ट्री हैं, जहां से कुछ लोगों को रोजगार मिलता है. रजौली हिसुआ और कादिरगंज नवादा से लगे झारखंड और इस इलाके का मार्केट हब बन रहे हैं. यहां से पिछले कुछ समय में कई फिजिशियन, सर्जन, इंजीनियर निकले हैं जो देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यरत हैं. न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ने रजौली में 2800 मेगावाट का न्यूक्लियर पावर प्लांट की योजना बनाई है.
नवादा का सामाजिक तानाबाना
2011 की जनगणना के अनुसार नवादा जिले की आबादी करीब 22.20 लाख है. यहां पर सेक्स रेशियो में महिलाओं का अनुपात कम है. प्रति 1000 पुरुषों पर केवल 936 महिलाएं हैं. जिले में साक्षरता की दर 61.63% है. यहां पर करीब 92.21% लोग हिंदी बोलते हैं तो लगभग 7.57% लोगों की बोलचाल की भाषा उर्दू है. स्थानीय आबादी में हिंदू 88.65% और मुस्लिम 11.3% हैं. कुछ संख्या जैन धर्मावलंबियों की भी है. खरवार, संथाल और लोहरा जिले की प्रमुख जनजातियां हैं.
नवादा की राजनीतिक सूरत
नवादा जिले में नवादा लोकसभा सीट है. इस सीट पर पहले कांग्रेस जीतती रही तो बीच के समय में यहां से सीपीएम और आरजेडी को भी जीत मिलती रही है. कांग्रेस यहां से छह लोकसभा चुनाव जीती है तो भाजपा को चार बार जीत मिली है. आरजेडी और सीपीएम को दो बार जीत मिली है. फिलहाल यहां से एलजेपी के सांसद हैं. नवादा जिले में पांच विधानसभा सीटें- नवादा, हिसुआ, राजौली (अनुसूचित जाति), गोबिंदपुर और वारिसलीगंज आती हैं. इनमें से दो सीटें आरजेडी- दो भाजपा और एक कांग्रेस के पास है.
नवादा के प्रमुख दर्शनीय स्थल
ककोलत जलप्रपात
नवादा जिला मुख्यालय से 33 किमी की दूरी पर ककोलत है. प्रकृति की गोद में बसा ककोलत जलप्रपात प्राकृतिक खूबसूरती के अलावा पुरातत्विक और धार्मिक दृष्टि से काफी अहम माना जाता है. माना जाता है कि इस जगह पर पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान एक राजा को सर्पयोनि से मुक्त कराया था. हल साल चैत संक्रांति पर यहां एक सप्ताह तक मेले का आयोजन होता है.
प्रजातंत्र द्वार
नवादा जिला मुख्यालय के प्रजातंत्र चौक पर स्थित प्रजातंत्र द्वार को देश की आजादी का प्रतीक चिह्न माना जाता है. आजादी मिलने के बाद प्रजातंत्र द्वार का निर्माण कन्हाई लाल साहु ने करवाया था.
सूर्य नारायण धाम मंदिर
नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के हंड़िया गांव में काफी प्राचीन सूर्य नारायण धाम मंदिर है. मंदिर के आस-पास की खुदाई में प्रतीक चिन्ह और पत्थर के बने रथ मार्ग के अवशेष मिले थे.
बुखारी मजार और हनुमान मंदिर
पटना-रांची मुख्य मार्ग पर नवादा में हजरत सैयद शाह जलालुद्दीन बुखारी की मजार और रामभक्त हनुमान मंदिर एकसाथ हैं.इन्हें साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है. शुक्रवार के दिन बाबा की मजार हिंदू और मुस्लिम सम्प्रदाय के लोग चादर चढ़ाकर मन्नते मांगते हैं तो हर मंगलवार को हनुमान मंदिर में भारी भीड़ रहती है.
सीतामढ़ी की गुफा
नवादा जिला मुख्यालय से 30 किमी की दूरी पर सांस्कृतिक केंद्र माना जाने वाला सीतामढ़ी है. यहां 16 फीट लम्बी और 11 फीट चौड़ी एक प्राचीन गुफा है. एक गोलनुमा चट्टान को काटकर कंदरा बनाया गया है. इसके भीतर पत्थरों पर पॉलिश की गई है. यह गुफा मौर्यकालीन मानी जाती है.
नारद संग्रहालय
भारत के प्रमुख संग्रहालयों में से नारद संग्रहालय एक है. यह संग्रहालय सन 1973 में बना था. इसमें भारत के पुराने सिक्कों के विकास क्रम को दिखाया गया है.
गुनियाजी जैन मंदिर
गुनियाजी तीर्थ नवादा के गुनियाजी गांव में है. यह मंदिर जैन मुनि गंधार गौतम स्वामी को समर्पित है. माना जाता है कि गौतम स्वामी, महावीर जी के शिष्य थे. यह महावीर जैन के समय का मंदिर है.
चिश्ती की मजार
जिले के हिसुआ प्रखंड में मध्यकालीन मुस्लिम सूफी संत ख्वाजा अब्दुल्ला चिश्ती की मजार है. यह हिंदुओं और मुस्लिमों दोनों के लिए श्रद्धा का स्थल है.
नवादा के प्रमुख अधिकारी
मगध के कमिशनर आसंगबा चुबा हैं. उनसे divcom-magadh-bih@nic.in पर संपर्क किया जा सकता है. उनका टेलीफोन नंबर 0631-2229002 और 0631-2225821 और फैक्स नंबर 0631-2221641 है.नवादा जिले के डीएम यशपाल मीणा हैं. उनसे dm-nawadah.bih@nic.in ईमेल पर संपर्क किया जा सकता है. उनका टेलीफोन नंबर 06324-212253, 06324-212240 और मोबाइल फोन नंबर +919473191256 है. नवादा जिले के एसपी हरि प्रसाद एस. हैं. उनसे sp-nawada-bih@nic.in पर संपर्क किया जा सकता है. उनका टेलीफोन नंबर 06324-214389, 06324-212263और मोबाइल नंबर +919431822975 है.