2015 के विधानसभा चुनाव और 2017 के घटनाक्रम से एक ऐसा चुनावी घोषणा पत्र सामने आया जिसने सीएम नीतीश कुमार को अलग पहचान दी. यह था 7 निश्चय घोषणा पत्र. जनता में इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि देखते ही देखते यह अब सर्वदलीय घोषणा पत्र बन गया है. अब सीएम नीतीश भी कहते हैं हमने एलायंस बदला, लेकिन वादा नहीं.
दरअसल, विकास के मोर्चे पर नीतीश कुमार कड़ी दर कड़ी आगे बढ़ने की रणनीति पर चलते रहे हैं. सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधारभूत संरचना के विकास ने जब आकार और शुरुआती मुकाम हासिल करना शुरू किया तो उन्होंने 2015 के चुनाव में पहली बार सात निश्चय की घोषणा की. उनके ये सात निश्चय दरअसल अलग- अलग वर्गों और गांवों को मजबूती देने पर केन्द्रित थे.
कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...
बात दें कि 16वीं विधानसभा का चुनाव राजद-जदयू और कांग्रेस साथ मिलकर लड़ रहे थे. तब सीएम नीतीश कुमार ने 7 निश्चय का ऐलान चुनाव से पहले ही कर दिया था. राजद और कांग्रेस ने सात निश्चय को ही गठबंधन के सभी दलों का चुनावी वादा करार दिया था. 2017 में मुख्यमंत्री ने त्यागपत्र दे दिया और भाजपा से गंठबंधन कर नई सरकार बनाई. तब भी 7 निश्चय नहीं बदला. भाजपा ने भी इसे अपनाया और एक प्रकार से यह सर्वदलीय घोषणा पत्र बन गया है.
7 निश्चय घोषणा पत्र में ऐसा क्या था खास
यह एक ऐसा घोषणापत्र था जिसके मूल में न जाति, न जमात बल्कि समाज का हर तब्का था. यह घोषणा पत्र विकास की योजनाओं का कम्प्लीट पैकेज था.
- आर्थिक हल युवाओं पर बल
- हर घर नल का जल
- घर-घर तक पक्की गीली-नाली
- शौचालय निर्माण घर का सम्मान
- आरक्षित रोजगार, महिलाओं का अधिकार
- हर घर बिजली लगातार
- अवसर बढ़े, आगे पढ़ें
देश-दुनिया के किस हिस्से में कितना है कोरोना का कहर? यहां क्लिक कर देखें
सात निश्चय की सफलता के बाद अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐलान कर दिया है कि इस बार वे सात निश्चय पार्ट-2 लेकर जनता के बीच जाएंगे और सरकार बनते ही अगले पांच सालों में 7 नए प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा.
क्या है नीतीश का सात निश्चय पार्ट-2
- युवा शक्ति बिहार की प्रगति
- सशक्त महिला सक्षम महिला
- हर खेत में सिंचाई के लिए पानी
- स्वच्छ गांव समृद्ध गांव
- स्वच्छ शहर विकसित शहर
- सुलभ संपर्कता
- सबके लिए अतिरिक्त स्वास्थ्य सुविधा