बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 28 अक्टूबर को मतदान होना है. इसके लिए अधिसूचना एक अक्टूबर यानी आज जारी होगी. आज से इच्छुक उम्मीदवार अपना नामांकन ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन दोनों तरीके से करेंगे. लेकिन अभी तक सीट बंटवारे को लेकर न एनडीए में और न ही महागठबंधन में कोई सहमति बन पाई है. इससे चुनाव मैदान में उतरने के लिए कमर कस चुके उम्मीदवारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
सीट बंटवारे के मसले पर एनडीए और महागठबंधन में एक राय नहीं बन पा रही है जबकि पहले चरण की 71 सीटों के लिए नामांकन आज से शुरू हो रहा है. नामांकन शुरू होने के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके प्रत्याशियों में बेचैनी महसूस की जा रही है. हालांकि सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी दलों का महागठबंधन सीट बंटवारे का जल्द ऐलान किए जाने की बात कर रहे हैं. लेकिन बिहार में जो सियासी हालात दिख रहे हैं उसमें सीट शेयरिंग के मसले को सुलझा लिए जाने की फिलहाल कोई सूरत नजर नहीं आ रही है.
एनडीए में मंथन
एनडीए में जदयू और लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) बीजेपी की सहयोगी पार्टियां हैं. अब जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा भी इस परिवार का हिस्सा बन गई है. लिहाजा सीटों का गणित और उलझ गया है. एनडीए सीट बंटवारे पर सहमति बनाने के लिए मंथन में जुटा हुआ है. एलजेपी प्रमुख चिराग नीतीश कुमार को निशाना बना रहे हैं. वहीं नीतीश कुमार ने सीट शेयरिंग के फॉर्मूले को सुलझाने के लिए गेंद बीजेपी के पाले में डाल दी.
कहां फंसा पेंच
बताया जा रहा है कि जेडीयू बिहार में एनडीए में बड़े भाई की भूमिका में दिखना चाहती है. इसके तहत वह बीजेपी से अधिक सीटों पर दावेदारी कर रही है. लेकिन बीजेपी बराबर की भूमिका चाहती है. एक फॉर्मूला यह बताया जा रहा है कि राज्य की 243 में से बीजेपी और जेडीयू 100-100 सीटों पर चुनाव लड़ें. बाकी 43 सीटें सहयोगी चिराग पासवान और जीतनराम मांझी को दी जाएं.
महागठबंधन में खींचतान
महागठबंधन में भी खींचतान जारी है. आलम यह है कि आस लगाए बैठे दल छिटकने लगे हैं. महागठबंधन में बुधवार को एक और घटनाक्रम देखने को मिला. हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बाद अब सीपीआई एमएल ने भी महागठबंधन से दूरी बना ली है. पार्टी ने महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर बात नहीं बनने के चलते 30 विधानसभा क्षेत्रों की पहली सूची बुधवार को जारी कर दी.
तेजस्वी यादव की अगुवाई वाले महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर अभी तक सहमति की कोई सूचना नहीं है. इसी रार के चलते मांझी पहले ही महागठबंधन से अलग हो चुके हैं. उपेंद्र कुशवाहा बगावती तेवर अपना चुके हैं. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर चर्चा जारी है. लेकिन संकट उन उम्मीदवारों के लिए है, जो नामांकन दाखिल करने की तैयारी हैं, लेकिन स्थिति ऐसी बन गई है कि वो करें तो करें क्या?