बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदाताओं के जोश के आगे कोरोना का खौफ भी फीका पड़ गया. चुनाव आयोग के फाइनल आंकड़े के मुताबिक, पहले चरण में 55.69 फीसदी मतदान हुआ. ये आंकड़ा साल 2015 के चुनाव में हुई वोटिंग से ज्यादा है. इसी के साथ कोरोना काल में भी बंपर वोटिंग कर बिहार के वोटर्स ने 2015 का रिकॉर्ड तोड़ दिया.
2019 में यानी पिछले साल लोकसभा चुनाव में इन्हीं विधानसभा क्षेत्रों में 55 फीसदी से भी कम मतदाता वोट डालने आए थे. तब आंकड़ा 54.94 फीसदी था. जबकि इससे पहले 2015 के विधानसभा चुनाव में 53.54% मतदाता ही वोट डालने बूथ तक पहुंचे थे. यानी दोनों चुनावों से करीब एक से डेढ़ फीसदी ज्यादा मतदाता बूथ तक आकर या फिर डाक के जरिए अपने मताधिकार का प्रयोग करने आगे आए.
बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में बुधवार को पहले चरण की मतदान के तहत 16 जिलों की 71 सीटों पर वोटिंग हुई. 1066 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम मशीन में कैद हो चुकी है.
2010 में 50.67 फीसदी वोटिंग हुई
वहीं, 2010 के विधानसभा चुनाव में 50.67 फीसदी मतदान हुआ था. 2019 के लोकसभा चुनाव, 2010 और 2015 के चुनाव की तुलना में इस बार ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है.
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2015 के चुनाव में पहले चरण की 71 सीटों में से एनडीए को 14 सीटें मिली थीं, जिनमें से 13 बीजेपी और एक जीतनराम मांझी ने जीती थी. 2015 के चुनाव में जेडीयू और बीजेपी अलग-अलग लड़ी थीं. इस चुनाव में लालू यादव और नीतीश कुमार साथ थे. महागठबंधन को 53 सीटें मिली थीं, जिनमें 27 सीटें आरजेडी, 18 सीटें जेडीयू और 8 सीटें कांग्रेस को मिली थी.
2010 के चुनाव में नीतीश कुमार की जेडीयू और बीजेपी साथ मिलकर 243 सीटों में से 206 सीटें जीती थीं. ऐसे में 71 सीटों पर एनडीए को 61 सीटें मिली थीं.
पहले चरण में कौन कितनी सीटों पर लड़ा
बिहार चुनाव के पहले चरण की 71 सीटों में से महागठबंधन की ओर से आरजेडी 42 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस 21 और सीपीआई माले 8 सीटों पर मैदान में है. वहीं, एनडीए की ओर से जेडीयू 35 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरी है जबकि उसकी सहयोगी बीजेपी 29, जीतनराम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा 6 और वीआईपी एक सीट पर चुनाव लड़ रही है.