लंदन में पढ़ी पुष्पम प्रिया चौधरी बिहार में जात-पात की राजनीति खत्म करना चाहती हैं. शायद यही कारण है कि पुष्पम प्रिया इकलौती ऐसी कैंडिडेट हैं, जिनके जाति के कॉलम में पॉलिटीशियन और धर्म के कॉलम में बिहारी लिखा है. पुष्पम प्रिया द्वारा किया गया ये प्रयोग चर्चा का विषय बना हुआ है.
बिहार विधानसभा 2020 से पहले नवगठित प्लूरल्स पार्टी और उसकी नेता पुष्पम प्रिया चौधरी की नजर उन वोटर्स पर है, जो प्रत्याशी को पसंद न करने की वजह से नोटा दबाते हैं. माना जा रहा है कि यही कारण कि पुष्पम प्रिया द्वारा जारी की गई प्रत्याशियों की पहली लिस्ट में सबसे ज्यादा डॉक्टर को स्थान दिया गया है. पहली सूची के 26 प्रत्याशियों में सात डॉक्टर हैं. इसके अलावा इंजीनियर, स्कूल के प्रिंसिपल, सोशल एक्टिविस्ट, एसोसिएट प्रोफेसर के साथ मीडिया से जुड़े लोग शामिल हैं.
जात-पात की राजनीति खत्म करना चाहती हैं पुष्पम प्रिया चौधरी
जेडीयू एमएलसी विनोद चौधरी की बेटी पुष्पम प्रिया चौधरी बिस्फी विधानसभा से चुनावी मैदान में हैं. इस विधानसभा के लोगों से आजतक की टीम ने बात की. लोगों की प्रतिक्रिया रही कि इस बार नये चेहरे को मौका देंगे. यहां से एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुष्पम प्रिया के चुनाव मैदान में आने से जनता उत्साहित है. इस बार बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नजर आ रही है.
बिस्फी विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले युवा वोटर विकास झा ने बताया कि हर बार चुनाव उन्हीं पुराने मुद्दों पर होता है. इस बार कुछ नया नजर आ रहा है. जहां जाति और धर्म से ऊपर उठकर राजनीति की बात की जा रही है.
पूरे बिहार में 7.61 लाख मतदातओं ने नोटा का बटन दबाया था
पिछले दो चुनाव पर नजर डालें तो बिहार मे नोटा वोट की संख्या पूरे भारत की तुलना में ज्यादा मिलेगी. पिछले विधानसभा चुनाव में 38 सीटों पर नोटा तीसरे नंबर पर था, जिसमें मधुबनी एवं राजनगर विधानसभा भी शामिल है. पूरे बिहार में 7.61 लाख मतदातओं ने नोटा का बटन दबाया था. यह संख्या लोकसभा चुनाव मे बढ़कर 8.17 लाख हो गई. बिहार के इन मतदाताओं ने यह बता दिया की मुझे कोई कैंडिडेट पसंद नहीं है. अब सवाल ये है क्या पुष्पम प्रिया चौधरी की पहली नजर बिहार के नोटा वाले वोटरों पर है?
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