उनके फोटोग्राफर्स मंच पर उनके पीछे खड़े रहते हैं, वो सामने भीड़ को हर एंगल से कवर करते हैं और फिर वीडियो को तेजस्वी यादव के ट्विटर हैंडल पर उनके 2.6 मिलियन (26 लाख) फॉलोअर्स के लिए पोस्ट करते हैं.
अगर भीड़ लोकप्रियता का पैमाना है, तो राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के युवा नेता के कैम्पेन को इसका लाभ मिल रहा है.
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की रैलियों में भीड़ राज्य भर में खास हिस्सा बन गई है. हालांकि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इसे चुनावी सफलता का बैरोमीटर नहीं मानते.
यथा पिता तथा पुत्र?
लेकिन लालू यादव जूनियर की जनसभाओं में जो उत्साही टर्नआउट दिख रहा है वो उनके पिता की अतीत की रैलियों से काफी मिलता-जुलता है.
हालांकि श्रोताओं को अपने बोलने के चुटीले अंदाज से बांधने वाले पिता के हुनर और उनकी ठेठ सादगी से विपरीत तेजस्वी गंभीर शैली में रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा पर जोर देते हैं. उनका ये बोलने का अंदाज चुनावी भाषण, टीवी इंटरव्यूज या सोशल मीडिया पोस्ट्स, सभी जगह देखने को मिलता है.
30 साल के आरजेडी नेता का कैम्पेन मुख्य तौर पर करीब आधा दर्जन मुद्दों पर टिका है जैसे कि रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, युवा और विकास.
तेजस्वी ने आजतक को दिए इंटरव्यू में जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी मुख्य चिंताओं को संबोधित कर रही है, न कि किसी बात को बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रही है. लालू यादव जूनियर ने कहा, “लोग खुश हैं कि हम असल मुद्दों के बारे में बात कर रहे हैं- बेरोजगारी, प्रवासी, गरीबी, भूख और कारखाने.”
वो नफीस और बेदाग सफेद कुर्ता-पाजामा में दिखाई देते हैं, जिस पर ऊपर की ओर बायीं दिशा में आरजेडी का चुनाव चिन्ह लालटेन रहता है.
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लालू यादव सीनियर कभी-कभार टेलीविजन पर और सार्वजनिक जगहों पर बनियान में भी दिखते रहे हैं, कई बार गले में तौलिया लपेटे अपने ट्रेडमार्क लालू हेयरकट के साथ.
पिता के ठेठ बोलने के अंदाज से अलग तेजस्वी यादव साफ और शुद्ध हिंदी में कहते हैं- "बेरोजगारी जितना बड़ा मुद्दा बिहार में इतना और कहीं नहीं है. राज्य में बेरोजगारी सबसे ज्यादा है. यह बिहार में 46.6 फीसदी है."
कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन के दौरान सामने आए प्रवासी संकट ने आरजेडी नेता को राज्य सरकार के विकास के दावों में छेद करने के लिए काफी गोला-बारूद मुहैया कराया है.
उन्होंने कहा, "1500/2000 किलोमीटर चलने वाले प्रवासियों की हृदयविदारक तस्वीरों ने नीतीश कुमार के 15 साल के विकास के दावों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया. लोग शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और यहां तक कि सामान्य मजदूरी के लिए भी राज्य से बाहर जाते हैं. यह बिल्कुल साफ है कि हर दूसरे परिवार का एक सदस्य बिहार से बाहर जाता है."
आरजेडी नेता ने उनके गठबंधन के सत्ता में आने पर राज्य में दस लाख नौकरियां देने का वादा किया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तत्काल पलटवार में तेजस्वी पर मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया.
नीतीश ने एक वर्चुअल रैली में कहा, “कुछ लोगों के पास कोई ताकत नहीं है और सिर्फ खाली वादे करते हैं, वो काम करने में दिलचस्पी नहीं रखते और उनके पास कोई अनुभव नहीं है. क्या दुनिया में ऐसा कोई देश है जहां हर किसी को सरकार नौकरी देती है? क्या यह मुमकिन है? कुछ लोग इन दिनों युवा रोजगार की बात कर रहे हैं? कितने लोगों को 15 साल (आरजेडी शासन के दौरान) में रोजगार दिया गया था. "कुछ लोगों के पास कोई शक्ति नहीं है और केवल खाली वादे करते हैं. उन्हें काम करने में कोई दिलचस्पी नहीं है और कोई अनुभव नहीं है,"
सीएम ने एक वर्चुअल रैली में कहा, "क्या दुनिया का कोई ऐसा देश है जहां हर कोई सरकार द्वारा नियोजित है? क्या यह भी संभव है? कुछ लोग इन दिनों युवाओं के रोजगार के बारे में बात कर रहे हैं,कितने लोगों को 15 साल में (राजद के शासन में) रोजगार दिया गया था?"
लोकनीति-CSDS के एक प्री-पोल सर्वे में संकेत है कि लोकप्रियता के चार्ट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से फासले को तेजस्वी यादव तेजी से कम कर रहे हैं. इस सर्वे के निष्कर्षों के अनुसार, प्रतिभागियों में से 27 प्रतिशत चाहते हैं कि तेजस्वी बिहार के मुख्यमंत्री बनें. वहीं इस पद के लिए 31 फीसदी प्रतिभागियों की पसंद अब भी नीतीश कुमार बने हुए हैं.
फिर भी, पोल सर्वे से पता चलता है कि लगातार चौथे कार्यकाल के लिए दावा कर रहे मौजूदा मुख्यमंत्री की लोकप्रियता में गिरावट आई है. पोल के आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 38 फीसदी लोग नीतीश कुमार के लिए एक और कार्यकाल चाहते हैं, जबकि 43 फीसदी नहीं चाहते हैं कि वे सीएम के तौर पर वापसी करें.