वैसे तो सीवान में तीन नवंबर को वोटिंग होने वाली है लेकिन वोटबैंक को गोलबंद करने के लिए हर राजनीतिक दल के नेताओं ने जोर लगाया है. इसी कड़ी में हम पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने महाराजगंज का दौरा किया है.
दरअसल, सीवान जिले के अधीन आने वाले महाराजगंज विधानसभा की सीट जेडीयू के खाते में गई है. जेडीयू ने इस सीट पर हेमनारायण साह को उम्मीदवार बनाया है. महाराजगंज के वर्तमान विधायक हेमनारायण साह का अपना वोट बैंक है. इस सीट पर जीत और हार के लिए एससी और एसटी वोटर्स भी बड़ी भूमिका निभाते हैं.
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इस वोटबैंक को गोलबंद करने के लिए एनडीए ने जीतन राम मांझी को मैदान में उतारा है. इसके जरिए एनडीए ने पिछड़े वर्ग में नाराजगी को दूर करने की कोशिश की है . इस सीट पर राजपूतों का भी वर्चस्व है और यहां एनडीए की ओर से राजद नेता तेजस्वी यादव के ''बाबू साहब'' बयान को भी खूब भुनाया जा रहा है. इस सीट पर जेडीयू उम्मीदवार हेम नारायण साह ने लोकल बनाम बाहरी की बहस भी छेड़ी हुई है.
महागठबंधन से विजय शंकर दूबे
आपको बता दें कि महागठबंधन की ओर से ये सीट कांग्रेस के खाते में गई है. कांग्रेस ने अपने पुराने नेता विजय शंकर दूबे को उम्मीदवार बनाया है. विजय शंकर दूबे अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र में पहले भाग्य आजमा चुके हैं. जेडीयू उम्मीदवार इसे मुद्दा बनाते हुए विजय शंकर दूबे को बाहरी बता रहे हैं. वहीं, लोजपा के उम्मीदवार डॉक्टर देवरंजन सिंह को लेकर स्थानीय स्तर पर एनडीए के भीतर नाराजगी चल रही है. दरअसल, देवरंजन सिंह पहले बीजेपी से चुनाव लड़कर विधायक रह चुके हैं. इस बार टिकट नहीं मिला तो उन्होंने लोजपा का झंडा उठाया है. अन्य उम्मीदवारों में पप्पू यादव की पार्टी जाप के विश्वनाथ यादव, निर्दलीय प्रत्याशी विश्वम्बर सिंह, मनोरंजन सिंह भी चुनाव मैदान में हैं.