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वैशाली विधानसभा सीटः क्या RJD भेद पाएगी JDU का मजबूत किला?

बिहार के वैशाली विधानसभा सीट पर जनता दल यूनाइटेड का एकतरफा राज रहा है. साल 2000 के बाद इस सीट पर जेडीयू के अलावा किसी और पार्टी के उम्मीदवार को जीत नहीं हासिल हुई. अब क्या इस बार आरजेडी खत्म कर पाएगी जीत का सूखा?

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Vaishali MLA Raj Kishore Singh
Vaishali MLA Raj Kishore Singh

बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई है, तीन चरणों में हुए चुनावों में इस बार कुल 59.94 फीसदी वोटिंग हुई है. अब 10 नवंबर को नतीजों का इंतजार है. बिहार की वैशाली विधानसभा सीट पर इस बार 3 नवंबर को वोट डाले गए, यहां कुल 58.78% मतदान हुआ. बिहार के वैशाली विधानसभा सीट पर जनता दल यूनाइटेड का एकतरफा राज रहा है. साल 2000 के बाद इस सीट पर जेडीयू के अलावा किसी और पार्टी के उम्मीदवार को जीत नहीं हासिल हुई. इस सीट पर जेडीयू की पकड़ इस कदर है कि पूर्व में 3 बार जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीतने वाले वृशिण पटेल ने 2015 के विधानसभा चुनाव में हम (HAM S) के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार का सामना करना पड़ा. हलांकि, इस बार हम और जेडीयू एक ही खेमे में है.

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ऐसे में क्या इस बार आरजेडी जीत का सूखा खत्म कर पाएगी, इसकी संभावना कम ही है. हालांकि, एनडीए गठबंधन के लिए इस सीट पर अपने उम्मीदवार के नाम को तय करने की मुसीबत किसी चुनावी लड़ाई से कम नहीं है. बताया जा रहा है कि इस बार राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान इस सीट से ताल ठोक सकते हैं.

राजनीतिक पृष्ठभूमि
1967 में अस्तित्व में आने वाले वैशाली विधानसभा सीट हमेशा से महत्वपूर्ण रही है. जेडीयू के साथ-साथ लोक जनशक्ति पार्टी का भी यहां जनाधार है. यही कारण है कि इस पिछले दो लोकसभा चुनावों में वैशाली सीट लोजपा के खाते में जा रही है. विधानसभा चुनावी इतिहास की बात करें तो चार बार कांग्रेस को जीत हासिल हुई है लेकिन 2000 के बाद से यहां पर जेडीयू का कब्जा है.  इस सीट पर वृशिण पटेल का दबदबा बताया जाता है, जो 6 बार (1980, 1985, 1990, फरवरी 2005, अक्टूबर 2005 और 2010) यहां से विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं.

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समाजिक ताना-बाना
वैशाली लोक सभा क्षेत्र के तहत आने वाले वैशाली विधानसभा में करीब 460741 जनसंख्या रहती है. यहां पूरी की पूरी आबादी ग्रामिण है. इसमें 20.47 फीसदी हिस्सा अनुसूचित जाति के लोगों का है. एससी वर्ग का बड़ी संख्या में वोट बैंक होने के कारण चुनावों में उनकी भूमिका भी अहम रहती है. यही कारण है कि खुद को दलितों की पार्टी बताने वाली लोजपा को इस क्षेत्र की जनता का प्यार मिलता रहा है. इसका असर पिछले दो लोकसभा चुनावों में दिख चुका है.

2015 का जनादेश
2015 के विधानसभा चुनावों में जेडीयू नेता राज किशोर सिंह ने हम पार्टी के उम्मीदवार वृशिण पटेल को 31 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर हराया था. राज किशोर सिंह को 79286 वोट मिले थे वहीं, 6 बार विधायक रहे वृशिण पटेल को 48225 मत हासिल हुए थे.

दूसरे चरण में 3 नवंबर 2020 को इस सीट पर वोट डाले जाएंगे. चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.

इस बार के मुख्य उम्मीदवार

  • जेडीयू - सिद्धार्थ पटेल
  • कांग्रेस - संजीव सिंह
  • एलजेपी - अजय कुमार कुशवाहा

विधायक का रिपोर्ट कार्ड
बिहार की राजनीति में बड़ा चेहरा माने जाने वाले वैशाली से विधायक राज किशोर सिंह ने 1974 के छात्र आंदोलन से अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की. गिरफ्तार हुए और जेल भी गए. इसके बाद भी वो कई मुद्दों पर अनशन किया और राजनीतिक यातनाओं को झेला.

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लोजपा से पहले वो कई पार्टियों की यात्रा कर चुके हैं. राज किशोर जेडीयू में भी रहे, जनता पार्टी में काम किया, लोक दल में जिला व प्रदेश स्तर पर पदाधिकारी रहे. इसके अलावा भी वो कई पदों पर रहे.

 

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