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पश्चिमी चंपारण: नेपाल से सटे जिले में परिसीमन के बाद बदले समीकरण

हिमालय के तराई प्रदेश में बसा बिहार का का ऐतिहासिक जिला पश्चिमी चंपारण जल और वनसंपदा से भरा हुआ है. बिहार का यह जिला अपनी भौगोलिक विभिन्नताओं के लिए जाना जाता है.

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पश्चिमी चंपारण की बाढ़ का जायजा लेते CM नीतीश कुमार
पश्चिमी चंपारण की बाढ़ का जायजा लेते CM नीतीश कुमार
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पश्चिमी चंपारण में भौगोलिक विविधता
  • परिसीमन के बाद बदले राजनीतिक समीकरण
  • पहले कांग्रेस और फिर भाजपा का रहा था गढ़

बिहार के पश्चिमी चम्‍पारण जिले के उत्तर में नेपाल और दक्षिण में गोपालगंज जिला पड़ता है. इसके पूर्व में पूर्वी चंपारण जिला है तो पश्चिम में इसकी सीमा उत्तर प्रदेश के पडरौना और देवरिया जिले से लगती है. चंपारण का नाम चंपा और अरण्य से बना है जिसका अर्थ होता है- चंपा के पेड़ों से आच्‍छादित जंगल. इस जिले का मुख्यालय बेतिया में है. चंपारण बिहार के तिरहुत प्रमंडल का एक भोजपुरी भाषी जिला है. हिमालय के तराई प्रदेश में बसा यह ऐतिहासिक जिला जल और वनसंपदा से भरा हुआ है. बिहार का यह जिला अपनी भौगोलिक विभिन्नताओं के लिए जाना जाता है. इसके अलावा महात्मा गांधी ने चंपारण (तब संयुक्त हुआ करता था) से ही अंग्रेजों के खिलाफ नील आंदोलन से सत्याग्रह की मशाल जलाई थी. जिले की प्रमुख शख्सियतों में फिल्म निर्देशक प्रकाश झा और फिल्म अभिनेता मनोज वाजपेयी हैं. 

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साहित्यिक और ऐतिहासिक तौर पर महत्वपूर्ण जिला
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से पश्चिमी चंपारण और पूर्वी चंपारण एक ही भूभाग को कहा जाता है. बाद में प्रशासनिक सविधा के लिए इन्हें दो जिलों में बांट दिया गया. पूर्व में संयुक्त रहा चंपारण इलाका समाज में ऐतिहासिक, धार्मिक और साहित्यिक तौर पर अपनी छाप छोड़ता है. यहां के बाल्मीकिनगर को सीता की शरणस्थली कहा जाता है. इसके अलावा गांधी का पहला सत्याग्रह भी इसी जमीन पर हुआ था. ईसा पूर्व छठी सदी में यह इलाका में वज्जि के साम्राज्य का हिस्सा था. अजातशत्रु के द्वारा वज्जि को जीतने के बाद यह मौर्य वंश, कण्व वंश, शुंग वंश, कुषाण वंश और गुप्त वंश के अधीन रहा. सन 750 से 1155 के बीच पाल वंश का चंपारण पर शासन रहा. इसके बाद चंपारण कर्णाट वंश के अधीन रहा. 12वीं सदी में गयासुद्दीन ने नरसिंह देव को हराकर अपना शासन स्थापित किया. इस बीच यहां स्थानीय क्षत्रपों का भी शासन रहा.

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भौगोलिक विविधताओं का गढ़ है पश्चिमी चंपारण
हिमालय की तलहटी में बसे पश्चिमी चम्‍पारण में पर्याप्त भौगोलिक विविधता देकने को मिलती है. इसके उत्तरी हिस्से में सोमेश्वर और दून श्रेणी है जहां सिंचाई वाली जगहों पर कृषियोग्य उपजाऊ जमीन है. यह सोमेश्वर श्रेणी से सटा हुआ तराई का क्षेत्र है जो थारू जनजाति का निवास भी स्थल है. तराई का इलाका होने की वजह से यहां दलदली मिट्टी का विस्तार है. तराई प्रदेश से आगे बढ़ने पर समतल और उपजाऊ जमीन मिलता है जिसे सिकरहना नदी (छोटी गंडक) दो भागों में बांटती हुई चलती है. उत्तरी भाग में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है जबकि दक्षिणी हिस्से में चूने वाली मिट्टी है. यह गन्ने की खेती के लिए अच्छी मानी जाती है. उत्तरी भाग में हिमालय से उतरने वाली कई छोटी नदियां छोटी गंडक में आकर समा जाती हैं. इस जिले का दक्षिणी भाग अपेक्षाकृत ऊंचा है. इस इलाके में गंडक, सिकरहना और मसान के अलावा पंचानद, मनोर, भापसा, कपन जैसी बरसाती नदियां बहती हैं.

कृषि और फर्नीचर पर टिकी अर्थव्यवस्था
पश्चिमी चंपारण जिले में कृषि आधारित उद्योग ही प्रमुख हैं. मझौलिया, बगहा, हरिनगर तथा नरकटियागंज में चीनी मिल हैं. कुटीर उद्योगों में रस्सी, चटाई और गुड़ बनाने के अलावा फर्नीचर का भी काम होता है. इसके साथ ही यहां नेपाल से सड़क मार्ग से होते हुए चावल, लकड़ी, मसालों आदि का आयात होता है. यहां से कपड़ा और पेट्रोलियम उत्पाद वहां भेजे जाते हैं. इस जिले में और इससे लगे नेपाल में वनों का विस्तार होने से यहां लकड़ियों का व्यापार होता है. उत्तम किस्म की लकड़ियों के अलावा बेतिया के आसपास बेंत भी मिलते हैं जो फर्नीचर बनाने के काम आता है. बगहा, बेतिया, चनपटिया एवं नरकटियागंज व्यापार के कुछ केंद्र हैं. 

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उपजाऊ जमीन और पशुपालन है अर्थव्यवस्था का आधार
गंडक और सिकरहना और इसकी सहायक नदियों वाला मैदान होने की वजह से पश्चिमी चम्‍पारण जिले की मिट्टी काफी उपजाऊ है. यहां के लोगों के जीवन का मुख्‍य आधार खेती, पशुपालन और और गृह उद्योग है. उत्तम कोटि के बासमती चावल तथा गन्ने के उत्पादन में जिले को ख्याति प्राप्त है. भदई और अगहनी धान के अलावा यहां गेहूं, मक्का, खेसारी, तिलहन भी प्रमुख फसलों में शामिल हैं. तिरहुत नहर और त्रिवेनी नहर पश्चिमी चंपारण और आसपास के जिलों में सिंचाई का प्रमुख साधन हैं.

पश्चिमी चंपारण का सामाजिक तानाबाना
अंग्रेजों के समय 1866 में चंपारण को स्वतंत्र इकाई बनाया गया था. प्रशासनिक सुविधा के लिए 1972 में इसका विभाजन कर पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण दो जिले बना दिए गए. एक ही इलाका होने से पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के इतिहास, समाज, आर्थिकी समेत जीवन के दूसरे क्षेत्रों में व्यापक समानताएं देखने को मिलती हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की आबादी 39.35 लाख है. जिल की साक्षरता दर साक्षरता- 55.70% है. यहां पर भी लैंगिक अनुपात काफी असमान है. यहां प्रति 1000 पुरुषों पर 909 महिलाएं हैं. जिले की करीब 95.23% आबादी हिंदी और भोजपुरी, 2.97% उर्दू और 0.99% बंगाली बोलते हैं. जिले में हिंदू धर्म के मानने वाले 77.44% हैं तो इस्लाम के मानने वाले 21.98% हैं. 

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पश्चिमी चंपारण की प्रमुख जगहें

बाल्मीकिनगर राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य
बिहार में सबसे बड़ा जंगल का इलाका पश्चिम चंपारण में ही है. यह नेपाल के राजकीय चितवन नेशनल पार्क से सटा है. इसके अलावा बिहार का एकमात्र बाघ अभयारण्य 880 वर्ग किमी से अधिक हिससे में फैले बाल्मीकिनगर राष्ट्रीय उद्यान में है. यह नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से सटा हुआ है. इस वन्य जीव अभयारण्य में संरक्षित बाघ के अलावे काला हिरण, सांभर, चीतल, भालू, भेड़िया, तेंदुआ, नीलगाय, लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, अजगर जैसे वन्य जीव रहते हैं. राजकीय चितवन नेशनल पार्क में एक सींग वाला गैंडा और जंगली भैंसा भी हैं. इस वनक्षेत्र में साल, सीसम, सेमल, सागवान, जामुन, महुआ, तून, खैर, बेंत जैसी अहम लकड़ियां पाई जाती हैं.

बाल्मीकिनगर आश्रम और गंडक परियोजना
बाल्मीकिनगर राष्ट्रीय उद्यान के एक छोर पर महर्षि बाल्मीकि का एक आश्रम भी है. कहा जाता है कि राम के त्यागे जाने के बाद सीता ने यहीं आश्रय लिया था. यहीं सीते के दो बेटे 'लव' और 'कुश' पले-बढ़े थे. महाकाव्य रामायण की रचना भी यहीं हुई थी.  आश्रम के पास ही गंडक नदी पर बनी बहुद्देशीय परियोजना है. यहां 15 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है और यहां से निकाली गईं नहरों से चंपारण के अलावा उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में सिंचाई होती है.

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त्रिवेणी संगम और बावनगढ़ी
एक ओर नेपाल के त्रिवेणी गांव और दूसरी ओर चंपारण के भैंसालोटन गांव के बीच नेपाल की सीमा पर बाल्मीकिनगर से 5 किमी की दूरी पर त्रिवेणी संगम है. यहां गंडक के साथ पंचनद तथा सोनहा नदी का मिलन होता है.

भिखना ठोढी
जिले के उत्तर में गौनहा प्रखंड स्थित भिखना ठोढी नरकटियागंज-भिखना ठोढी रेलखंड का अंतिम स्टेशन है. नेपाल की सीमा पर बसी यह छोटी सी जगह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए चर्चित है. 

भितहरवा आश्रम और रामपुरवा का अशोक स्तंभ
गौनहा प्रखंड के भितहरवा गांव के एक छोटे से घर में ठहरकर महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह की शुरुआत की थी. उस घर को आज भितहरवा आश्रम कहा जाता है. स्वतंत्रता के मूल्यों का आदर करने वालों के लिए यह जगह तीर्थ समान है. आश्रम से कुछ ही दूरी पर रामपुरवा में सम्राट अशोक द्वारा बनवाए गए दो स्तंभ हैं जो शीर्षरहित हैं. इन स्तंभों के ऊपर बने सिंह वाले शीर्ष को कोलकाता संग्रहालय में तथा वृषभ (सांड) शीर्ष को दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा गया है.

नंदनगढ़, चानकीगढ़ और लौरिया का अशोक स्तंभ
लौरिया प्रखंड के नंदनगढ़ और नरकटियागंज प्रखंड के चानकीगढ़ में नंद वंश और चाणक्य के द्वारा बनवाए गए महलों के अवशेष हैं जो अब टीलेनुमा दिखाई देते हैं. नंदनगढ़ के टीले को गौतम बुद्ध के अस्थि अवशेष पर बना स्तूप भी कहा जाता है. नंदनगढ़ से एक किलोमीटर दूर लौरिया में 2300 साल पुराना सिंह के शीर्ष वाला अशोक स्तंभ है. 

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पश्चिमी चंपारण की राजनीतिक तस्वीर
पश्चिमी चंपारण में दो लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र रहे हैं- बेतिया और बाल्मीकि नगर. बेतिया 2008 से पहले यहां की लोकसभा सीट रही है. इस सीट पर कांग्रेस पांच बार और भाजपा ने छह बार जीत दर्ज की थी. बाल्मीकि नगर 2008 के बाद अस्तित्व में आई लोकसभा सीट है. इसके बाद से यहां के राजीतिक समीकरण बदल गए हैं. यहां पर हुए तीन लोकसभा चुनावों में से दो बार जेडीयू को जीत मिली है तो एक बार भाजपा जीती है. पश्चिमी चंपारण जिले में नौ विधानसभा सीटें- वाल्मीकि नगर, बेतिया, लौरिया, रामनगर, नरकटियागंज, बगहा, नौतन, चनपटिया, सिकता आती हैं. इन सीटों पर 5 भाजपा, 2 कांग्रेस और एक-एक जेडीयू और निर्दलीय विधायक हैं.  

चर्चा में पश्चिमी चंपारण
हाल ही में पप्पू यादव ने पश्चिमी चंपारण की लोकसभा सीट बाल्मीकिनगर से चुनाव लड़ने की घोषणा की है. यह सीट फिलहाल जेडीयू के पास है. पप्पू यादव जेडीयू पर हमलावर रहे हैं. इसके अलावा हाल ही में यहां के टाइगर रिजर्व में पर्यन बढ़ाने के लिए भी केंद्र सरकार ने रिपोर्ट मांगी है. 

जिले के प्रमुख अधिकारी
बाल्मीकिनगर के डीएम से 6254- 242534, 232535, 242576 टेलीफोन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है. एसपी बेतिया से 6254-232563, 242886, 248960 टेलीफोन नंबरों और 9431822986 मोबाइल नंबर पर संपर्क किया जा सकता है. एसपी बगहा से 6251- 226533, 226363, 226449 टेलीफोन नंबरों और 9431822987/9939720093 मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है. 
 

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