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छत्तीसगढ़ के टिकट बंटवारे में सिंहदेव भारी या बघेल? बृहस्पति और प्रेमसाय दोनों का कटा टिकट

छत्तीसगढ़ चुनाव के लिए कांग्रेस अब तक 83 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर चुकी है. कांग्रेस ने डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के धुर विरोधी बृहस्पति सिंह का टिकट काट दिया है. पार्टी ने सिंहदेव के एक करीबी को भी बेटिकट कर दिया है. ये सिंहदेव-बघेल में पावर बैलेंस की कोशिश है?

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव (फाइल फोटोः पीटीआई)
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव (फाइल फोटोः पीटीआई)

छत्तीसगढ़ चुनाव के लिए कांग्रेस ने नवरात्रि के पहले ही दिन 30 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी. अब कांग्रेस ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची भी जारी कर दी है जिसमें 53 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम हैं. कांग्रेस ने अब तक दो सूची जारी कर 90 सदस्यों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए 83 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है.

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कांग्रेस ने अब तक घोषित 83 उम्मीदवारों की लिस्ट में 17 विधायकों के टिकट काटे हैं और पार्टी ने 27 नए चेहरों को मैदान में उतारा है. सरगुजा संभाग की रामानुजगंज विधानसभा सीट से विधायक बृहस्पति सिंह का नाम भी शामिल है. बृहस्पति सिंह और डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव की अदावत छत्तीसगढ़ की सियासत में चर्चा का विषय रही है.

दरअसल, सीएम भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले बृहस्पति सिंह के काफिले पर साल 2021 में हमला हुआ था. इस घटना के बाद बृहस्पति ने टीएस सिंहदेव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा था कि वे महाराजा हैं, वह कुछ भी कर सकते हैं. वह मेरी हत्या भी करा सकते हैं. टीएस सिंहदेव ने ये मुद्दा विधानसभा में उठाया था. विवाद बढ़ने पर बृहस्पति सिंह ने विधानसभा में अपने आरोप के लिए माफी भी मांगी थी. टीएस सिंहदेव के डिप्टी सीएम बनने के बाद माना जा रहा था कि ये विवाद अब बीती बात हो चुकी है लेकिन पिछले दिनों सरगुजा के महाराज ने एक कार्यक्रम में ये साफ कह दिया था कि पार्टी और जनता चाहे जो करे, हम माफ नहीं करेंगे.

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बृहस्पति सिंह (फाइल फोटो)
बृहस्पति सिंह (फाइल फोटो)

अब पार्टी ने भी बृहस्पति सिंह को बेटिकट कर दिया है तो इसे सिंहदेव की भावनाओं का सम्मान बताया जा रहा है. कहा तो ये तक जा रहा है कि सरगुजा संभाग के टिकट वितरण में सिंहदेव की चली है. लेकिन सवाल ये भी उठ रहा है कि जब सिंहदेव की चली है तब डॉक्टर प्रेमसाय सिंह टेकाम का टिकट कैसे कट गया? टेकाम की गिनती सिंहदेव के करीबी नेताओं में होती है.

प्रेमसाय सिंह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार में शिक्षा मंत्री हुआ करते थे. बघेल सरकार में टीएस सिंहदेव का कद बढ़ा और संगठन में नेतृत्व परिवर्तन हुआ तो टेकाम की कुर्सी चली गई. टेकाम ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया जिसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे मोहन मरकाम को बघेल मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था.

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चुनावी मौसम हैं तो एक-एक कदम, एक-एक टिकट और एक-एक बयान के मीन-मेख भी निकाले जा रहे हैं. अब कांग्रेस की दूसरी लिस्ट के ऐलान से ठीक पहले आए टीएस सिंहदेव के बयान को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है. टीएस सिंहदेव ने दूसरी लिस्ट जल्द आने की बात कहते हुए कहा था कि अब जो बचा है वह सोनिया गांधी क्लियर करेंगी. सवाल ये भी उठ रहे हैं कि सिंहदेव का इशारा किस तरफ था. क्या वह बृहस्पति के टिकट की बात कर रहे थे?

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कहा तो ये भी जा रहा है कि टीएस सिंहदेव ये तो चाहते थे कि बृहस्पति का टिकट कटे. साथ ही उनकी कोशिश ये भी थी कि किसी समर्थक को बेटिकट न होना पड़े. सीएम बघेल और सिंहदेव के बीच टिकट बंटवारे में चुनाव बाद के समीकरणों का ध्यान रखते हुए टिकट बंटवारे में संख्याबल का ऊंट अपनी करवट बैठाने की होड़ को लेकर भी चर्चा है.

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ऐसे में बृहस्पति के साथ ही प्रेमसाय का टिकट काटने के फैसले को बघेल-सिंहदेव के बीच पावर बैलेंस की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. प्रेमसाय के नाम 2018 में सरगुजा संभाग की सबसे बड़ी जीत थी. प्रेमसाय को लेकर कहा जा रहा है कि कांग्रेस के आंतरिक सर्वे में उनकी स्थिति ठीक नहीं होने की रिपोर्ट थी.

प्रेमसाय सिंह टेकाम (फाइल फोटोः फेसबुक)
प्रेमसाय सिंह टेकाम (फाइल फोटोः फेसबुक)

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ये साफ कह चुके हैं कि टिकट बंटवारे में सर्वे के हिसाब से उम्मीदवारों की स्थिति का आकलन कर जिताऊ उम्मीदवार पर दांव लगाया जाएगा. इंडिया टुडे के लिए सूमी राजप्पन की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के सर्वे में करीब 40 फीसदी विधायकों के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी की बात है.

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सर्वे, एंटी इनकम्बेंसी, जिताऊ चेहरा... सीएम बघेल और कांग्रेस के नेता विधायकों के टिकट कटने को लेकर चाहे जो वजह बताएं. लेकिन उन विधायकों के टिकट कटने को लेकर सवाल ये भी खड़े हो रहे हैं कि क्या वास्तव में टिकट कटने के यही सब कारण हैं या वजह कुछ और है? मनेंद्रगढ़ के विधायक डॉक्टर विनय जायसवाल और सामरी के विधायक चिंतामणि महाराज को भी कांग्रेस ने इसबार टिकट नहीं दिया है. ये दोनों नेता भी टीएस सिंहदेव के विरोधी माने जाते हैं.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 सीटों के लिए दो चरणों में मतदान होना है. पहले चरण में सात नवंबर को मतदान है. दूसरे चरण में 17 नवंबर को वोट डाले जाएंगे. चुनाव नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे.

 

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