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Delhi Election 2020: चुनिंदा सीटों पर कांग्रेस का फोकस, जहां नंबर-1, वहीं उतारी फौज

दिल्ली विधानसभा चुनाव का मुकाबला काफी दिलचस्प होता जा रहा है. कांग्रेस ने दिल्ली में चुनिंदा विधानसभा सीटों पर फोकस किया है, जहां पर वह लोकसभा चुनाव में पहले नंबर रही थी. इन सीटों को जीतने के लिए कांग्रेस ने बाकायदा प्लान बनाया है और पार्टी ने अपनी पूरी फौज को मैदान में उतारा है.

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Delhi Election 2020: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा और कीर्ति आजाद
Delhi Election 2020: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा और कीर्ति आजाद

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  • दिल्ली में कांग्रेस ने चिन्हित की विधानसभा सीटें
  • कांग्रेस ने चुनिंदा सीटें जीतने के लिए बनाया प्लान
दिल्ली विधानसभा चुनाव की सियासी जंग फतह करने के लिए कांग्रेस हरसंभव कोशिश में जुटी है. कांग्रेस ने दिल्ली की सभी सीटों पर फोकस करने के बजाय चुनिंदा सीटों को चिन्हित किया है. कांग्रेस अपने आपको उन विधानसभा सीटों पर ज्यादा केंद्रित कर रही है, जिन पर 2019 के लोकसभा चुनाव में वह पहले नंबर पर रही थी और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर रही थी.

लोकसभा चुनाव के नौ महीने बाद हो रहे दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पुराने समय के नतीजे दोहराने के लिए बेताब है. 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस दिल्ली की पांच विधानसभा सीटों वाले इलाके में पहले स्थान पर रही थी और 42 सीटों पर दूसरे और 23 विधानसभा सीटों पर तीसरे नंबर पर थी. इसीलिए कांग्रेस चुनिंदा सीटों पर फोकस कर रही है.

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दिल्ली के ओखला, मटिया महल, बल्ली मारान, सीलमपुर और चांदनी चौक विधानसभा सीटों में कांग्रेस को बीजेपी और AAP से ज्यादा वोट मिले थे. ये पांचों विधानसभा सीटें मुस्लिम बहुल मानी जाती हैं. कांग्रेस ने इनमें से चार सीटों पर मुस्लिम कैंडिडेट उतारे हैं और चांदनी चौक सीट से अलका लांबा को मैदान में उतारा है.

बीजेपी जहां सीएए-एनआरसी के समर्थन में है तो आम आदमी पार्टी इस पर चुप है. कांग्रेस ने इन दोनों मुद्दों के खिलाफ सख्त रवैया अख्तियार कर रखा है. सीएए के खिलाफ शाहीन बाग में चल रहे विरोध प्रदर्शन में भी कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा से लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर और चौधरी मतीन तक शामिल हो चुके हैं.

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कांग्रेस की नजर दिल्ली में जारी राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा अपने पुराने प्रदर्शन पर भी है. दिल्ली की 42 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव में दूसरे नंबर रही थी. इनमें से भी उसने कुछ सीटों को चिन्हित किया है. इन सीटों पर कांग्रेस ने मजूबत कैंडिडेट मैदान में उतारे हैं और प्रचार की रणनीति भी अपनाई है. विधानसभा चुनाव में मतदाताओं का मूड नौ महीने पहले जैसा रहा तो केजरीवाल की पार्टी को इन सीटों पर तगड़ा झटका लग सकता है.

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