गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी पूरा जोर लगा रही है तो बाकी दल भी तैयारियों में जुट गए हैं. सियासी गहमागहमी के बीच हम आपको बताने जा रहे हैं अंजार विधानसभा सीट का समीकरण. कच्छ जिले की अंजार सीट को लेकर सियासी पंडितों के मन में सवाल है कि क्या भारतीय जनता पार्टी यहां एक बार फिर चुनाव जीत पाएगी?
2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में अंजार सीट पर बीजेपी के वासनभाई गोपालभाई अहीर ने कांग्रेस के वीके हुंबल को 11,313 वोटों से हराया था. इस सीट का इतिहास देखें तो 1967 से लेकर 1994 तक कांग्रेस का इस सीट पर दबदबा रहा. हालांकि 1995 और 1998 के चुनाव में बीजेपी के वासन अहीर ने जीत हासिल की. 2002 के चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की और पार्टी प्रत्याशी नीमाबेन आचार्य को जीत मिली. 2007 में वह बीजेपी में शामिल हो गईं और 2007 तक इस सीट से जीतती रहीं. 2012 से वासनभाई अहीर इस सीट से विधायक हैं.
अंजार शहर की स्थापना राजा अजय पाल ने की थी. उस वक्त पूरे इलाके के अनाज के गोदाम यहीं थे, जिस वजह से उसे अंजार के तौर पर जाने जाना लगा. अंजार में जेसल और तोरल की समाधि है. कहा जाता है कि जेसल और तोरल की समाधि चावल के एक दाने जितनी करीब है. अगर एक दूसरे को समाधि छू ले तो प्रलय आ जाएगा. वैसे अंजार शहर कई बार भूकंप का प्रकोप झेल चुका है. हालांकि तबाही के बाद भी यह शहर फिर से खड़ा हो जाता है, जो स्थानीय लोगों की जीवटता को दिखाता है. 2001 के भूकंप में अंजार में 1500 से 2000 लोगों की मौत हुई थी.
गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 के आंकड़ों को देखें तो अंजार में अनुसूचित जाति के 22 प्रतिशत से ज्यादा वोटर हैं. अनुसूचित जनजाति के मतदाता 9 प्रतिशत हैं. इस इलाके में हिंदू आबादी 80 फीसदी और करीब 17 प्रतिशत मुस्लिम आबादी हैं. करीब एक फीसदी ईसाई हैं. पिछले तीन विधानसभा चुनावों से भाजपा को 40 फीसदी से ज्यादा मत मिलते रहे हैं. कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही है. आम लोगों की समस्या की बात करें तो उनकी प्राथमिकता में अच्छी सड़क और पानी की डिमांड रही है.