गुजरात में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसकी तैयारी सत्ताधारी बीजेपी से लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी शुरू कर दी है.
ऐसे में आज हम आपको अहमदाबाद शहर की नरोडा विधानसभा सीट का राजनीतिक गणित बताएंगे. इस सीट पर साल 1967 से चुनाव हो रहे हैं, लेकिन 2002 के दंगों के बाद यह सीट सबसे ज्यादा चर्चा में रही थी.
इस सीट पर 1967 से 1980 तक कांग्रेस का कब्जा रहा, लेकिन 1981 के उपचुनाव में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार ने इस सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी को धूल चटा दी.
इसके बाद 1985 में एक बार फिर कांग्रेस चुनाव जीती लेकिन 1990 से लेकर 2017 तक इस सीट पर बीजेपी ही जीतती आई है. इसे बीजेपी का गढ़ माना जाता है और बीजेपी यहां से सिंधी उम्मीदवार को ही टिकट देती है क्योंकि यह सिंधी बहुल इलाका है.
1990 में बीजेपी से गोपालदास भोजवानी इस सीट पर चुनाव जीते थे और वो दो बार विधायक चुने गए. इस सीट पर सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले बीजेपी की नेता मायाबेन कोडनानी थी. माया कोडनानी 1998 में पहली बार इस सीट से विधायक बनीं जो 2007 तक विधायक रहीं.
इसके बाद माया कोडनानी को नरोडा पाटिया केस में सजा हुई और वह जेल चली गईं. 2012 के चुनाव में यहां से निर्मला वाधवानी चुनाव लड़ी और विजय रूपानी की सरकार में मंत्री बनी. हालांकि 2017 में इस सीट से चुने गए विधायक बलराम थवानी सबसे ज्यादा विवादों में रहने वाले बीजेपी नेता हैं.
बलराम थवानी तब विवादों में फंसे जब कथित तौर पर उन्होंने उनके कार्यालय में शिकायत करने पहुंची एक महिला के साथ मारपीट की थी. इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी पार्टी ने उनके घर पर हल्ला बोल दिया था और दूसरी बार वो तब विवादों में आए जब यहां बने पुल के नाम को लेकर उन्होंने सिंधी धर्म गुरु का नाम दिया जबकि लोगों की मांग थी कि उसका नाम एसटी समुदाय के धर्मगुरु के हिसाब से दिया जाए.
नरोडा विधानसभा सीट पर कितने वोटर
अगर हम इस सीट पर वोटरों की संख्या की बात करें तो यहां कुल वोटर 2,61,442 है जिसमें 1,22,125 पुरुष मतदाता हैं. 2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के बलराम थवानी नरोडा सीट से 1 लाख 8 हज़ार वोट के साथ चुनाव जीते थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार ओमप्रकाश तिवारी को 48 हज़ार वोट मिले थे.
उम्मीदवार बदल सकती है बीजेपी
बीजेपी ने यहां पर अपनी पकड़ और दबदबा दोनों ही बनाए रखा है. बलराम थवानी के विवादों की वजह से कई बार पार्टी को सफाई भी देनी पड़ी है.
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या 2022 के चुनाव में बीजेपी बलराम थवानी को टिकट देती है या उनकी जगह पर किसी और उम्मीदवार को मौका दिया जाता है. बलराम थवानी का यह पहला ही टर्म है. हालांकि बीजेपी यहां पर किसी दूसरे उम्मीदवार को भी टिकट दे सकती है जिसकी संभावना भी जताई जा रही है.