गुजरात की सत्ता से बीजेपी को बेदखल करने के लिए 27 वर्षों से विपक्ष अलग-अलग प्रयोग करता रहा है, लेकिन सियासी मात नहीं दे सका. बीजेपी के लिए गुजरात राजनीतिक प्रयोगशाला बन चुका है और पार्टी एक बार फिर से जीत का इतिहास रचने के लिए चुनावी मैदान में उतरी है. वहीं, विपक्षी दलों ने बीजेपी के खिलाफ मोरबी से लेकर सीएम चेहरे पर सियासी चक्रव्यूह रचा है, जिसका बीजेपी को जबाव देते नहीं बन रहा है. ऐसे में चर्चा है कि बीजेपी के लिए ये सवाल कहीं सिरदर्द न बन जाएं.
गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भले आक्रमक तरीके से प्रचार नहीं कर रही है, लेकिन उसने बीजेपी के खिलाफ स्थानीय मुद्दों का जबरदस्त तरीके से तानाबाना बुना है. इसी नक्शेकदम पर आम आदमी पार्टी भी है. विपक्ष आजतक के 'गुजरात पंचायत' के मंच पर मोरबी से लेकर सरकारी नौकरियों में पेपर लीक, महंगाई, बेरोजगारी मुद्दे और सीएम चेहरे के सवाल पर बीजेपी को घेरते नजर आया. चुनाव में स्थानीय मुद्दें को भारी पड़ता देख बीजेपी राष्ट्रीय मुद्दे और पीएम नरेंद्र मोदी के भरोसे जंग जीतने का दम भर रही है.
मोरबी हादसा बना बीजेपी का टेंशन
गुजरात में मोरबी शहर की माच्छु नदी पर बने सस्पेंशन ब्रिज टूट जाने से 136 लोगों की जान चली गई थी. मोरबी हादसे को लेकर विपक्ष लगातार बीजेपी को घेर रहा है. आजतक के गुजरात पंचायत कार्यक्रम में कांग्रेस नेता आलोक शर्मा ने बीजेपी को घेरते हुए कहा कि गुजरात के विकास का सबसे बड़ा उदाहरण मोरबी का पुल हादसा है. ठेकेदारी प्रथा ने सैकड़ों लोगों को लील लिया. एक भी व्यक्ति ने जिम्मेदारी नहीं ली, एक भी व्यक्ति सस्पेंड नहीं हुआ, प्राइम एक्यूज का नाम एफआईआर में नहीं आया. हादसे का जिम्मेदार कौन है और पुलिस की जांच कहां तक पहुंची है. इसी बात को कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के दूसरे नेताओं ने भी उठाया, जिसका सीधा जवाब बीजेपी के किसी नेता ने नहीं दिया. चुनाव से ठीक पहले मोरबी का हादसा बीजेपी के लिए टेंशन बन गया है.
सीएम फेस बदलने का मुद्दा
गुजरात के सत्ता की कमान भूपेंद्र सिंह पटेल के हाथों में है, लेकिन विधानसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के नाम पर बीजेपी लड़ रही है और वोट मांग रही है. गुजरात के सीएम से देश के पीएम बने मोदी को आठ साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक उनके कद का नेता नहीं तलाश सकी. यही वजह है कि आठ साल में बीजेपी को तीन सीएम बदलने पड़ गए. नरेंद्र मोदी के आनंदीबेन पटेल, फिर उन्हें हटाकर विजय रुपाणी, जिन्हें पिछले साल हटाकर भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया है. गुजरात में बार-बार सीएम बदलने के मुद्दे पर बीजेपी को कोई ठोस जवाब देते नहीं बन रही है और विपक्ष इसीलिए दिल्ली के रिमोर्ट कंट्रोल से चलने वाली सरकार बता रहा है.
मुख्यमंत्री पद के दावेदार भूपेंद्र सिंह पटेल हैं जो कि नरेंद्र मोदी के मुकाबले कोई बड़ा चेहरा नही हैं. गुजरात में 27 सालों से चल रही बीजेपी सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर को थामना सीएम भूपेंद्र पटेल चेहरे के दम पर साधना बड़ी चुनौती हो सकती है, जिसके चलते बीजेपी पीएम मोदी के नाम और काम पर गुजरात में वोट मांग रही है. आजतक के मंच पर जब यह सवाल उठा तो बीजेपी के नेता पीएम मोदी को अपना सर्वोच्च नेता बताकर बात टालते नजर आए. इतना ही नहीं भूपेंद्र पटेल भी नरेंद्र मोदी के दौर में हुए काम को गिनाते नजर आ रहे हैं.
सरकारी नौकरी के पेपर लीक का मामला
गुजरात में सरकारी भर्तियों की परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक एक मुद्दा चुनाव में बन गया है. कांग्रेस ने बीजेपी को अखिल भारतीय पेपर लीक-भर्ती घोटाला पार्टी तक कहा और एमपी के व्यापक घोटाल से तुलना की है. आजतक 'गुजरात पंचायत' के कार्यक्रम में कांग्रेस नेता इंद्रविजय सिंह गोहिल ने कहा कि 2014 से अब तक राज्य में 10 परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं. बार-बार पेपर लीक होने से गुजरात में सरकारी नौकरी पाने के लिए मेहनत कर रहे युवाओं की उम्मीदें धराशायी हो गई हैं. पेपर लीक कांड अब बीजेपी के गले की फांस बन गया है. कांग्रेस विधानसभा चुनाव में युवा वोटर्स को साधने के लिए इसे एक बड़ा मुद्दा बना रही है और बीजेपी पर युवाओं के भविष्य को बेचने और भारत के भविष्य को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाने का आरोप लगा रही.
बेरोजगारी का मुद्दा गुजरात चुनाव में छाया
गुजरात चुनाव में बेरोजगारी के मुद्दे को विपक्षी दल जोर-शोर से उठा रहे हैं ताकि युवा मतदाताओं को अपने पाले में खींचा जा सके. युवाओं में रोजगार के कम अवसर की वजह असंतोष की बातें भी गुजरात में लगातार होती रही हैं. गुजरात पंचायत कार्यक्रम के मंच पर कांग्रेस नेता इंद्रविजय सिंह गोहिल ने रोजगार के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि गुजरात में 40 लाख युवा बेरोजगार हैं. युवाओं का सिर्फ शोषण होता है. बेरोजगारी के खिलाफ युवा आंदोलन और संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई सुन नहीं रहा. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने इसे चुनावी मुद्दा बना रहे और बीजेपी के गुजरात मॉडल पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
विधानसभा चुनाव के चलते बीजेपी के लिए इस मुद्दे को काउंटर करना मुश्किल हो रहा है. बीजेपी नेता ऋत्विज पटेल कहते हैं कि गुजरात सरकार अपने कर्मचारियों और युवाओं से संवाद कर रही है. सीएम भूपेंद्र पटेल ने आंदोलनकारियों से बात की और उनको संतुष्ट किया. गुजरात में चुनाव से पहले कोई आंदोलन नहीं चल रहा था, लेकिन अचानक खड़े हुए हैं. गुजरात के युवा ने 27 साल से कर्फ्यू नहीं देखे. युवाओं में सरकारी नौकरी का क्रेज रहता है. मोदी सरकार ने 75 हजार से एक लाख तक देशभर में नौकरियां दी जा रही हैं. आने वाले समय में 10 लाख नौकरियां देने का काम मोदी सरकार कर रही है.
गुजरात में महंगाई भी बना मुद्दा
गुजरात चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब राष्ट्रीय स्तर पर महंगाई का मुद्दा हावी है. ऐसे में महंगाई का असर गुजराज चुनाव में भी पड़ सकता है. आजतक के गुजरात पंचायत कार्यक्रम में कांग्रेस से लेकर आम आदमी पार्टी तक महंगाई पर सरकार को घेरने में नजर आए. पेट्रोल-डीजल की कीमतों, सब्जियों और खाद्य पदार्थों की महंगाई को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधते नजर आए. महंगाई ने ग्रामीण स्तर पर बीजेपी का सियासी खेल बिगाड़ सकता है, क्योंकि गुजरात के ग्रामीण इलाकों में बीजेपी पहले से ही कमजोर रही है. ऐसे में चुनाव में जिस तरह से बीजेपी के खिलाफ विपक्ष ने महंगाई के इर्द-गिर्द चुनावी एजेंडा सेट कर रहे हैं, उससे चुनौती बढ़ सकती है?