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गुजरात: हार्दिक पटेल बागी, भारी गुटबाजी... 2017 के मुकाबले इस बार कैसे हैं कांग्रेस के हालात

गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. बीजेपी से लेकर आम आदमी पार्टी तक सक्रिय है, लेकिन कांग्रेस अपनी गुटबाजी से जूझ रही है. कांग्रेस के लिए इस बार न तो 2017 जैसा माहौल अनुकूल दिख रहा है और न ही बीजेपी को घेरने के लिए कोई बड़ा मुद्दा है. ऐसे में गुजरात चुनाव को लेकर आखिर कांग्रेस कहां खड़ी नजर आ रही है?

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गुजरात: हार्दिक पटेल और राहुल गांधी
गुजरात: हार्दिक पटेल और राहुल गांधी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गुजरात में कांग्रेस लीडरशिप क्राइसिस से गुजर रही
  • नरेश पटेल की एंट्री पर तस्वीर साफ नहीं है
  • हार्दिक पटेल ने कांग्रेस के खिलाफ बगावती तेवर अपनाया

गुजरात विधानसभा का कार्यकाल इस साल दिसंबर में खत्म होने वाला है. ऐसे में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है, जो अक्टूबर या नवंबर में हो सकता है. बीजेपी और आम आदमी पार्टी गुजरात चुनाव के लिए अभी से तैयारी में जुट गई हैं. वहीं, कांग्रेस खेमे में चुनाव को लेकर 2017 जैसी राजनीतिक सरगर्मी नहीं दिख रही है. अशोक गहलोत राजस्थान में व्यस्त हैं और अहमद पटेल जैसे चुनावी रणनीतिकार रहे नहीं. ऊपर से अंदरूनी कलह की खबरें हार्दिक पटेल के वजह से सामने आने लगी है. ऐसे में कांग्रेस कैसे गुजरात में अपने 27 साल के सत्ता के वनवास को खत्म कर पाएगी? 

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कांग्रेस 27 सालों से सत्ता से बाहर

गुजरात की सत्ता से कांग्रेस 27 सालों से बाहर है जबकि यहां बीजेपी का एकछत्र राज कायम है. सूबे में कांग्रेस की हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही है. पार्टी के पास न तो सियासी जनाधार बचा है और न ही मजबूत नेता. कांग्रेस ने 2017 में  77 सीटों जीतने में कामयाब रही थी, लेकिन उसे संभाल कर नहीं रख सकी. पिछले पांच सालों में कांग्रेस के 16 विधायकों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा है. कांग्रेस के साथ पिछला चुनाव मिलकर लड़ने वाली बीटीपी ने भी इस बार अलग राह चुन ली है और आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन किया है. 

2017 जैसा अनुकूल माहौल नहीं

गुजरात में इस बार 2017 जैसा अनुकूल माहौल नहीं है. कांग्रेस के पास इस बार कोई बड़ा चुनावी मुद्दा भी नहीं है. 2017 के चुनाव में पटेल आरक्षण और ऊना में दलितों के पिटाई सियासी मुद्दा बन गया था. पाटीदारों के आंदोलन का भी कांग्रेस का फायदा हुआ था. कांग्रेस का 2017 का प्रदर्शन 25 सालों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा. कांग्रेस 41 फीसदी वोट शेयर  के साथ 77 सीटें जीती थी और बीजेपी को 99 सीटों पर रोक दिया था. इस बार बीजेपी को घेरने के लिए 2017 जैसे बड़े मुद्दे कांग्रेस के पास नहीं है. 

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बीजेपी ने गुजरात में मुख्यमंत्री के साथ-साथ पूरी कैबिनेट को ही बदलकर सत्ता विरोधी लहर को भी खत्म करने का दांव पहले ही चल दिया है. ऐसे में कांग्रेस अब क्षेत्रीय आधार पर मुद्दों के सहारे चुनावी रण में उतरने की तैयारी में है, जिसके चलते जिले और विधानसभा स्तर पर मुद्दों की तलाश कर रही है ताकि बीजेपी को चुनावी रण में घेर सके. 

कांग्रेस में गुटबाजी जोरों पर है

गुजरात कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बीच की अंदरूनी कलह इन दिनों अपने चरम पर है. कांग्रेस के सभी नेता पार्टी के बजाय अपनी-अपनी हैसियत मजबूत करने में लगे हैं. गुजरात कांग्रेस कई गुटों में बंटी हुई है, जिसमें शक्ति सिंह गुट, भरत सोलंकी गुप, जगदीश ठाकोर गुट और हार्दिक गुट बन गए हैं. गुजरात प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल लगातार प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और साथ ही उनके कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने की कयास भी लगाए जा रहे. ऐसे में  पार्टी की मौजूदा स्थिति ठीक नहीं कही जा सकती. पंजाब और उत्तराखंड में कांग्रेस अपने ही नेताओं के गुटबाजी के चलते मात खानी पड़ी है और उसी मर्ज से गुजरात में भी कांग्रेस जूझ रही है. 

राहुल गांधी भी सक्रिय नहीं दिख रहे

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2017 के विधानसभा चुनाव के ऐलान से काफी पहले से राहुल गांधी सक्रिय हो गए हैं. राहुल गांधी गुजरात का लगातार दौरा कर पार्टी में नई जान फूंकने की कवायद की थी, जिसके लिए अलग-अलग समुदाय के लोगों के साथ बैठक किया था. इसके अलावा राहुल गांधी बीजेपी के हिदुत्व की काट के लिए मंदिर-मंदिर जाकर दर्शन और पूजा कर रहे थे. चुनाव के ऐलान से पहले पूरे गुजरात का दौरा कर चुके थे, लेकिन इस बार महज एक बार भी अभी तक गए हैं. 

वहीं, पीएम मोदी दो बार गुजरात का दौर कर चुके हैं. पहली बार 18 मार्च को और दूसरी बार तीन दिवसीय दौरा 21 अप्रैल को किया है. इसके अलाव अमित शाह और जेपी नड्डा भी दो बार दौरा कर चुके हैं, बीजेपी अध्यक्ष शुक्रवार फिर गुजरात दौरे पर जा रहे हैं. आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के सीएम भगवंत मान के साथ दौरा कया. केजरीवाल और मनीष सिसोदिया दो बार पंजाब का दौर कर चुके हैं जबकि कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी ही अभी तक गए हैं. 

गहलोत-पटेल जैसे रणनीतिकार नहीं

2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीतिकार के तौर अशोक गहलोत ने फ्रंटफुट पर रहकर अहम भूमिका निभाई थी तो परदे से पीछे से अहमद पटेल सक्रिय थे. कांग्रेस के चाणाक्य माने जाने वाले अहमद पटेल का निधन हो चुका है, जो गुजरात के ही रहने वाले थे. अशोक गहलोत गुजरात के प्रभारी के तौर पर काम कर रहे थे. राहुल के दौरे की रूपरेखा से लेकर मंदिर जाने तक का प्लान बनाया था, लेकिन मौजूदा समय गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री है. गुजरात में कांग्रेस के प्रभारी का जिम्मा रघु शर्मा को मिला हुआ है, जो गहलोत की तरह ही राजस्थान से आते हैं. लेकिन, गहलोत की तरह चुनावी रणनीतिकार नहीं माने जाते. ऐसे में कांग्रेस के लिए रघु शर्मा हर जिले में चिंतन शिविर सहित तमाम कवायद तो कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस को एकजुट नहीं रख पा रहे हैं. 

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नरेश पटेल पर तस्वीर साफ नहीं

वहीं, कई दिनों से चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कांग्रेस में आने की अटकलें लगाई जा रही थीं. कहा जा रहा था कि पार्टी में आने के बाद वे गुजरात चुनाव की रणनीति तय करेंगे. लेकिन जब मंगलवार को साफ़ हो गया कि वे पार्टी में शामिल नहीं होने जा रहे, तो इससे पार्टी नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है. इतना ही नहीं पीके के साथ-साथ पाटीदारों के प्रभावशाली नेता नरेश पटेल के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा थी. हालांकि अभी तक वो पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं. ऐसे में नरेश पटेल को लेकर कांग्रेस में अभी तक तस्वीर साफ नहीं है. 

गुजरात कांग्रेस में लीडरशिप क्राइसिस

गुजरात कांग्रेस में सबसे बड़ी समस्या लीडरशिप क्राइसिस की है. जगदीश ठाकोर पार्टी अध्यक्ष हैं और सुखराम राठवा विधानसभा में नेता विपक्ष, लेकिन दोनों ही नेताओं का सियासी कद ऐसा नहीं है कि जिसके चेहरे के सहारे कांग्रेस चुनावी मैदान में उतर सके. यही नहीं पार्टी में कोई व्यक्ति नहीं है जो हार्दिक पटेल को समझाए या हार्दिक किसी की लीडरशिप को स्वीकार करने को तैयार हों. हार्दिक बीजेपी की तारीफ करते हैं और गुजरात कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़े करते हैं, लेकिन पार्टी में उनको ये कहने वाला कोई नहीं कि ये क्या कर रहे हो? 

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कांग्रेस पुराने समीकरण के भरोसे

कांग्रेस के लिए इस बार का चुनाव भले ही मुश्किल दिख रहा हो, लेकिन वो अपने समीकरण को दुरुस्त करने में जुटी है. ऐसे में कांग्रेस क्षत्रिय, आदिवासी, दलित, मुस्लिम को एकजुट करने की कवायद में है. 2019 में लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने इसी फॉर्मूले के तहत प्रदेश अध्यक्ष जगदीश ठाकोर को बनाया, जो ओबीसी नेता हैं . विधानसभा में कांग्रेस दल का नेता सुखराम राठवा को बनाया जो आदिवासी नेता माने जाते हैं. गुजरात में 15 फीसदी आदिवासी वोट है. जिग्नेश मेवाणी को पार्टी में लिया है, जो दलित हैं. कांग्रेस को मालूम है कि राज्य के मुसलमान उनके साथ ही है. कांग्रेस अपने इसी फॉर्मूले में पटेलों को जोड़ना चाहती है, जिसके लिए नरेश पटेल को लेने का तानाबाना बुना जा रहा था. हालांकि, नरेश पटेल कांग्रेस में शामिल होंगे कि नहीं यह अभी गर्भ में है.
 

 

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