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'ह्यूमन राइट पथराव पीड़ितों के लिए क्यों नहीं?' पुलिस के समर्थन में आए गुजरात के गृह मंत्री संघवी

गुजरात के खेड़ा में नवरात्रि के दौरान गरबा में पथराव हो गया था. इस घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को सबके सामने बिजली के खंभे से बांधकर पीटा था. इस मामले में मानव अधिकार आयोग ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट ने इस पूरे मामले में जांच के आदेश दिए हैं.

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गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी (फाइल फोटो)
गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी (फाइल फोटो)

गुजरात में गरबा में पथराव के मामले में अब गृह मंत्री हर्ष संघवी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने खुलकर पुलिस का समर्थन किया है और मानवाधिकार आयोग एक्टिविस्ट पर निशाना साधा है. संघवी ने सवाल किया कि पत्थर खाने वाले लोगों के लिए मानव अधिकारी आयोग क्यों नहीं होता है? सिर्फ पत्थरबाजों का साथ क्यों दिया जा रहा है. इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे गरबा आयोजन की बेहतर व्यवस्थाओं के लिए सोशल मीडिया पर गुजरात पुलिस का आभार जरूर व्यक्त करें.

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बता दें कि गुजरात के खेड़ा में नवरात्रि के दौरान गरबा में पथराव हो गया था. इस घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को सबके सामने बिजली के खंभे से बांधकर पीटा था. इस मामले में मानव अधिकार आयोग ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट ने इस पूरे मामले में जांच के आदेश दिए हैं. 

जिन बच्चों-महिलाओं के सिर में पत्थर लगे हैं उनके लिए...?

शुक्रवार को इस मुद्दे पर गृह मंत्री हर्ष संघवी का एक विवादास्पद बयान सामने आया है. संघवी ने कहा कि आज कल कुछ मानवाधिकार वाले खूब जगे हुए हैं. ह्यूमन राइट सिर्फ पत्थर मारने वाले लोगों के लिए ही होता है, लेकिन जिन छोटे-छोटे बच्चों-महिलाओं के सिर पर पत्थर लगे हैं, उनके लिए ह्यूमन राइटस् नहीं होना चाहिए?

ये अब सोचने का समय आ गया है

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गरबा को लेकर हर्ष संघवी ने कहा कि क्या हम हमारे गांव के चौक में गरबा नहीं खेल सकते? उनको पसंद नहीं है तो क्या किसी को भी पत्थर मारने का हक उन्हें दे सकते हैं और वो पत्थर मारने वाले लोग का कोई धर्म होता है, जिसने पत्थर खाए हैं उनके लिए भी मानव अधिकार होना चाहिए या नहीं. हर बार पत्थर मारने वाले लोगों के लिए ही क्यों ह्यूमन राइट आते हैं. अब ये सोचने का समय आ गया है.

पुलिस ने अच्छा काम किया, आभार जताएं

वहीं, गिरफ्तार किए गये सभी आरोपियों की उसी गरबा की जगह पर पिटाई के मामले में हर्ष संघवी ने कहा कि युवाओं से आग्रह है कि इस तरह की गलत बात के खिलाफ जवाब देना चाहिए. गुजरात में सभी बहनें-भाई देर रात तक गरबा खेल सकते हैं, उसके लिए पुलिस ने अच्छा काम किया है. सोशल मीडिया पर गुजरात पुलिस का आभार जरूर करना चाहिए.

दो महीने बाद गुजरात में चुनाव होने हैं. इस बीच, इस तरह के बयान से सरकार भी अब वोटों का ध्रुवीकरण करने की दिशा में आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है. 

 

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