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गुजरात: जिग्नेश की गिरफ्तारी का इलेक्शन कनेक्शन, क्या चुनाव से पहले सियासी हित साधना चाहती है BJP

गुजरात चुनाव की सुगबुगाहट हुई और राज्य के बड़े दलित चेहरे जिग्नेश मेवानी की गिरफ्तारी हो गई है. जिग्नेश मेवानी को असम पुलिस ने गिरफ्तार किया है. गुजरात की राजनीति में इसका क्या असर हो सकता है. पढ़ें रिपोर्ट.

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जिग्नेश मेवानी. -फाइल फोटो
जिग्नेश मेवानी. -फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जमानत मिली भी तो जिग्नेश को लगाने होंगे असम के चक्कर
  • दंगों को लेकर पीएम मोदी से बयान देने की अपील की थी

गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी को शुक्रवार देर रात असम पुलिस ने पालनपुर सर्किट हाउस से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद उन्हें अहमदाबाद से फ्लाइट के जरिए असम ले जाया गया. कोर्ट में पेश कर पुलिस ने जिग्नेश मेवानी को तीन दिन के रिमांड पर लिया है. पुलिस के मुताबिक, जिग्नेश मेवानी पर आईपीसी के धारा 120(B) लगाई गई है जो कि साजिश के तहत अपराध करने के लिए होती है. इसके अलावा दूसरी जितनी भी धारा लगायी गयी है, वो जिग्नेश मेवानी के लिए मुसीबत बन सकती है. बताया जा रहा है कि कुछ धाराएं गैर जमानती हैं.

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दरअसल, जिग्नेश मेवानी ने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ को लेकर टिप्पणी की थी. साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे को लेकर भी ट्वीट किया था. ट्वीट के जरिए जिग्नेश ने देश में हाल में हुए दंगों पर बयान देने की अपील की थी.  

जमानत मिली भी तो जिग्नेश को लगाने होंगे असम के चक्कर

कहा जा रहा है कि अगर जिग्नेश मेवानी को जमानत मिल भी जाती है तो उन्हें आने वाले दिनों में असम के चक्कर भी लगाने पड़ेंगे, क्योंकि मामला असम में ही दर्ज हुआ है. वहीं, गुजरात में विधानसभा का चुनाव भी होने को हैं. ऐसे में जिग्नेश मेवानी की मुसीबत बढ़ सकती है. 

वहीं दूसरी ओर गुजरात बीजेपी अध्यक्ष सीआर पाटील इस बार 150+ सीटों के मिशन को लेकर चल रहे हैं. ये मिशन इतना आसान नहीं है इसीलिए भाजपा की नजरें अब ऐसी सीटों पर है जो दशकों से कांग्रेस के पास रही हैं और इन सीटों पर भगवा लहराने के लिए भाजपा तोड़-जोड़ की राजनीति भी कर रही है. जिग्नेश को भाजपा अपने दल में शामिल तो नहीं करा पाएगी जिसके चलते बीजेपी ने वडगाम के पूर्व विधायक और कांग्रेसी नेता मनी भाई वाघेला को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया और अभी इस सीट पर भाजपा काफी मेहनत भी कर रही है.

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AIMIM भी गुजरात चुनाव में उतरेगी

AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी ऐलान कर दिया है कि वह इस बार उनकी पार्टी गुजरात चुनाव में उतरेगी. ओवैसी के चुनाव लड़ने की वजह से गुजरात में तकरीबन दो दर्जन सीटों पर कांग्रेस को नुकसान होने की आशंका भी है. ओवैसी के यहां से चुनाव लड़ने से सबसे ज्यादा खतरा किसी को था तो वह जिग्नेश मेवानी को ही था, क्योंकि उनकी सीट पर भी बड़ी तादाद में मुस्लिम मतदाता हैं. 

हाल ही में देश में रामनवमी और हनुमान जयंती में हिंसा को लेकर जिग्नेश मेवानी ने ट्वीट कर भाजपा सरकार पर खुला प्रहार किया. साथ ही इस ट्वीट के जरिए मुस्लिम समाज के लोगों को अपनी ओर करने का प्रयास भी किया. अगर जिग्नेश इसमें सफल हो जाते तो फिर भाजपा और ओवैसी को झटका लग सकता था, लेकिन इससे पहले ही असम पुलिस ने जिग्नेश को गिरफ्तार कर लिया.

राजनीतिक जानकारों का ये भी कहना है कि बीजेपी आम आदमी पार्टी को मज़बूत नहीं होने देना चाहती है. दलित और आदिवासी धीरे-धीरे आम आदमी पार्टी की और डाइवर्ट हो रहे थे, उन्हें रोकने के लिए भी जिग्नेश की गिरफ़्तारी हुई है.

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