गुजरात विधानसभा चुनाव में अहमदाबाद जिले की असारवा सीट काफी महत्वपूर्ण है. यह सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है. 1990 से भगवान राम के नाम से यह सीट बीजेपी जीतती आई है. रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान हिंदुत्व की लहर के बीच बीजेपी के विट्ठल पटेल ने यह सीट जीती थी. इसके बाद से बीजेपी ने यहां पीछे मुड़कर नहीं देखा. साल 2017 तक चेहरे बदलते रहे लेकिन यहां बीजेपी का कमल खिलता रहा. वर्तमान में प्रदीप परमार राज्य में कैबिनेट मंत्री हैं, वह यहां से विधायक हैं.
गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के बाद पूरे गुजरात में हिंदुत्व की लहर तेज हो गई थी. फिर 12 साल बाद बीजेपी ने असारवा विधानसभा सीट से पाटीदार की जगह प्रदेश बीजेपी युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष और जीएनएफसी के चेयरमैन प्रदीपसिंह जडेजा को टिकट दिया. उन्होंने पूर्व गृह मंत्री प्रबोध रावल के बेटे और टीवी कलाकार चेतन रावल को हराया.
बात आगामी चुनाव की करें तो पूरे गुजरात के अनुसूचित जाति के नेताओं की नजर असारवा सीट पर है. इसकी वजह ये है कि इस सीट से बीजेपी की जीत तय मानी जा रही है. सभी नेता असारवा सीट से अपनी किस्मत आजमाना और अपने राजनीतिक करियर को उज्ज्वल बनाना चाहते हैं.
पिछले चुनाव के परिणाम पर नजर डालें तो बीजेपी के प्रदीपभाई कान्हाभाई परमार ने कांग्रेस के कानूभाई आत्माराम वाघेला को करीब 25 हजार वोटों के अंतर से हराया था. असारवा से 3 निर्दलीय समेत कुल 9 उम्मीदवार मैदान में ताल ठोक रहे थे.
साल 2012 के विधानसभा चुनाव में पूर्व आईएएस और बीजेपी के उम्मीदवार रजनीकांत पटेल ने 76 हजार 829 वोट हासिल कर कांग्रेस के मंगल सूरजकर (41 हजार 784 वोट) को 35 हजार 45 वोट के अंतर से धूल चटाई थी.