गुजरात में अहमदाबाद की साबरमती सीट पर पिछले दो दशक से बीजेपी का दबदबा है. आज हम आपको इसी सीट के सियासी समीकरण के बारे में बताने जा रहे हैं. साबरमती विधानसभा सीट पर उत्तरी गुजरात के पाटीदारों का काफी प्रभाव है. इसके साथ ही ओबीसी और दलित वोट भी इस सीट पर अहम भूमिका निभाते हैं. हालांकि, राजनीतिक दलों ने ज्यादातर पटेल उम्मीदवारों को चुना है.
गुजरात चुनाव 2022 को जीतने के लिए बीजेपी ने माइक्रो प्लानिंग शुरू कर दी है. बीजेपी अब केवल पाटीदार समुदाय पर निर्भर नहीं रहना चाहती. बीजेपी अपनी रणनीति बदल रही है. राज्य में ओबीसी समुदाय के 40 फीसदी वोट बैंक पर बीजेपी की नजर है. इसकी वजह है कि ओबीसी समुदाय की करीब 40 फीसदी आबादी इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभा सकती है. पाटीदार के साथ-साथ ओबीसी और दलित वोट भी ज्यादा हैं. ऐसे में संभावना है कि बीजेपी साबरमती विधानसभा सीट पर अरविंद पटेल को रिपीट नहीं करेगी. इसके लिए जाति के समीकरणों के अलावा कई कारण जिम्मेदार माने जाते हैं.
साबरमती विधानसभा सीट साल 1962 में अस्तित्व में आई थी. इस सीट पर अब तक एक उपचुनाव हो चुका है. पिछले 4 चुनावों से लगातार बीजेपी प्रत्याशी चुने जा रहे हैं.
साल 2017 में साबरमती विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के अरविंद कुमार गांडाभाई पटेल ने 76 हजार 326 वोट पाकर कांग्रेस के जीतूभाई पटेल को हराया था. डॉ जीतूभाई पटेल को 34 हजार 850 वोट मिले थे.
साबरमती विधानसभा सीट बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा अहम थी. वो इसलिए क्योंकि इसी सीट पर चुनाव के लिए नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार वोट डाला था. पीएम मोदी ने 14 दिसंबर को साबरमती के राणिप में बूथ नंबर 115 पर लाइन में लगकर वोट डाला था. वो करीब 15 से 16 मिनट तक लाइन में लगे रहे. इससे पहले अरविंद कुमार पटेल ने साल 2012 के चुनाव में 10 लाख 7 हजार 36 वोट पाकर कांग्रेस के गोविंदलाल पटेल को हराया था, जिन्हें महज 39 हजार 453 वोट मिले थे.