गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर चुनावी रण में उतरने वाली सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने तरीके से चुनावी जमीन तैयार करने में जुट गई हैं. हम बात करते हैं, वलसाड जिले की कपराडा विधानसभा सीट की. इस सीट पर आदिवासी समुदाय का दबदबा है. जानिए यहां कैसे हैं राजनीतिक समीकरण.
कपराडा विधानसभा सीट के चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो, पहले दो चुनावों में यानि 2012 और 2017 में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी. मगर, 2020 के उपचुनाव में बीजेपी ने जीतकर कांग्रेस की नींद उड़ा दी. इसलिए 2020 के उपचुनाव में यह सीट चर्चा का केंद्र बन गई थी.
साल 2020 के उपचुनाव में बीजेपी के जितू चौधरी को कुल एक लाख 12 हजार 941 वोट मिले थे. वहीं, कांग्रेस के बाबूभाई पटेल को 65 हजार 875 वोट मिले थे. बाबूभाई को 47 हजार 066 वोट से हार का सामना करना पड़ा.
मतदाताओं के आंकड़े
कपराडा विधानसभा सीट पर कुल वोटर की संख्या दो लाख 60 हजार 595 है. इनमें पुरुष वोटर एक लाख 32 हजार 739 और महिला वोटर एक लाख 27 हजार 854 हैं. इस विधानसभा सीट पर जातिगत समीकरण की बात करें, तो तालुका में आदिवासी समाज की मुख्य तीन उपजातियों वारली, धोडिया पटेल और कुंकना का दबदबा है.
राजनीतिक समीकरण
दक्षिण गुजरात में आदिवासी सीट भाजपा और कांग्रेस के लिए हमेशा से महत्वपूर्ण रही है. इनमें से कुछ सीटों पर अब भी कांग्रेस का कब्जा है. इन सीटों पर जीत की कमान वहां के आदिवासियों के हाथ में ही रहती है. विधानसभा चुनाव 2022 के लिए हर पार्टी आदिवासी समाज को जोड़ने की कोशिश कर रही है.
आदिवासी इलाके की विधानसभा सीट को भाजपा और विकास के नाम पर नहीं जीता जा सकता है. यहां कोई स्थानीय उम्मीदवार ही जीत सकता है. ऐसा ही हाल है वलसाड जिले की कपराडा सीट का भी है. यहां भारतीय ट्राइबल पार्टी भी सक्रिय है. वह किसी भी पक्ष की समीकरण बिगाड़ सकती है.