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Gujarat Assembly Election 2022: 153 गांवों वाली उना विधानसभा सीट का क्या है चुनावी समीकरण?

उना विधानसभा के ज्यादातर गांव समुद्र किनारे और गिर के जंगल के नजदीक हैं. गुजरात में सबसे ज्यादा गांव यानी की 153 गांव उना विधानसभा में हैं. उना विधानसभा सीट से साल 2012 में बीजेपी ने जीत हासिल की थी. जबकि 2016 में हुए दलित कांड के बाद 2017 में मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को पद छोड़ना पड़ा और उन्हें गुजरात राजकीय क्षेत्र से दूर भेजा गया.

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गुजरात विधानसभा चुनाव (प्रतीकात्मक फोटो)
गुजरात विधानसभा चुनाव (प्रतीकात्मक फोटो)

गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर एक तरफ सभी दल उम्मीदवारों की खींचतान में जुटे हैं. तो दूसरी तरफ ग्रामीण लोगों को अपनी तरफ खींचने के लिए नेता लोग गांव-गांव घूम रहे हैं. गुजरात में सबसे ज्यादा गांव वाली विधानसभा सीट है उना. जो की गिर सोमनाथ जिले में आती है. 

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उना की भौगोलिक स्थिति और जीवन
उना विधानसभा सीट गुजरात के पश्चिमी समुद्र तट पर स्थित है. ज्यादातर गांव समुद्र किनारे और गिर के जंगल के नजदीक है. गुजरात में सबसे ज्यादा गांव यानी की 153 गांव उना विधानसभा में है. उना की एक ओर केंद्र शासित प्रदेश दीव और दूसरी ओर कोडीनार विधानसभा स्थित है. उना में ग्रामीण क्षेत्र ज्यादा होने से विकास बहुत धीमा रहा है. ज्यादातर लोग किसान और मछुआरे हैं. जो ज्यादा समय खेतो और समुद्र में ही बिताते हैं. इन गावो के लोग रास्ते, स्वच्छ हवा, पीने का पानी, बिजली जैसी प्राथमिक सुविधाओं से वंचित हैं. विकास की परिभाषा इनके लिए सपनो जैसा है. उना की पहचान है तुलशिश्याम. जो की गिर के जंगल के बीचोबीच श्री कृष्ण का सुंदर मंदिर है. इसके अलावा गर्म पानी का कुंड और गुरुत्वाकर्षण बल की अजायबी से जाना जाता है. जमजीर पानी का सुंदर धोध ओर द्रोणेश्वर आश्रम उना की पहचान है.

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उना का राजकीय महत्व
सबसे ज्यादा गांव होने के बावजूद फायदे से ज्यादा नुकसान है. ये अगर समझना हो तो उना का राजकीय रंग देखना पड़ेगा. उना में 1990 से लगातार पूंजा वंश कांग्रेस से जीतते आ रहे हैं. सिर्फ 2007 में कालू राठौड़ बीजेपी को जीत हासिल की थी. कोडिनार में दाऊद माने जाते दीनू बोघा को कोई टक्कर दे सका तो, वो है पूंजा वंश. जिसने बीजेपी का राजकीय रंग इस विधानसभा सीट तक पहुंचने नहीं दिया और इस विधानसभा सीट को कांग्रेस का गढ़ बना दिया. गांव के लोगों के लिए हमेशा आवाज उठाते पूंजा वंश लोकप्रिय नेता हैं. जिसकी सादगी और सरल स्वभाव के कारण इन्हे हराना मुश्किल है.

उना विधानसभा सीट की टर्निंग प्वाइंट
उना विधानसभा सीट से साल 2012 में बीजेपी ने जीत हासिल की थी. जबकि 2016 में हुए दलित कांड के बाद 2017 में मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को पद छोड़ना पड़ा और उन्हें गुजरात राजकीय क्षेत्र से दूर भेजा गया. चार दलित युवको को मारने के वीडियो सोशियल मीडिया में वायरल होते ही नेताओं में खलबली मच गई और सभी नेता को दिल्ली से दलित कांड को सुलझाने के लिए उना दौड़ना पड़ा.

कौन हैं पूंजा वंश?
पूंजा वंश दुधाला गांव के रहने वाले है. पिछले चुनाव में एक करोड़ की संपति और 9 लाख की जवाबदारी से प्रोफाइल बताने वाले पूंजा माधव वंश सरल व्यक्तित्व के हैं. लोगों के सवाल और मुश्किल की आवाज बनते हैं. ताऊते तूफान के दौरान सबसे ज्यादा तबाही उना तहसील के गांवो में हुई थी. जाफराबाद, सिमराड़ी, गिर गढ्डा जैसी जगहों पर संकट के समय विधायक खड़े रहे और सरकार से मदद की गुहार लगाई. 

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2022 में अब कौन? 
कांग्रेस की ओर से पूंजा वंश लगभग तय माने जाते हैं. पर बीजेपी इस बार इस विधानसभा सीट कांग्रेस से छीनना चाहती है. तो बीजेपी किसे दे सकती है टिकट इन पर सबकी नजर है. हरिभाई सोलंकी या कालू राठौड़? इस चुनाव में अहम बात यह है कि इस बार बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे के सामने नहीं बल्कि दोनो आम आदमी पार्टी के सामने खड़े हैं. आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार केजरीवाल के नाम पर चुनाव में उतरेंगे. गुजरात में चुनावों का माहौल हमेशा सस्पेंस रहा है. क्योंकि ये प्रजा व्यापारी है. जो फायदा नुकसान देखकर ही मतदान करती है. उना का विधायक कौन बनेगा ये तो आने वाले चुनाव का परिणाम ही बताएगा.

 

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