कर्नाटक चुनाव में अब कुछ दिन ही शेष रह गए हैं. प्रचार के इस आखिरी दौर में हर दल के नेताओं ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है. मतदाताओं के बीच अपनी छाप छोड़ने के लिए सभी दल सोशल मीडिया के अलावा चुनावी रैलियों और रोड शो में अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं.
कर्नाटक में पहली बार चुनाव के दौरान सोशल मीडिया एक बड़ी भूमिका निभाता हुआ नजर आ रहा है. बीजेपी और कांग्रेस के बीच तो मानो सोशल मीडिया पर महाभारत छिड़ी हुई है.
हमलावर बनी हुई है कांग्रेस
वॉट्सएप, फेसबुक और ट्विटर पर दोनों ही दलों की साइबर सेना एक-दूसरे के खिलाफ सक्रिय ही नहीं बल्कि हर दिन नए-नए अस्त्र लेकर घातक हमले कर रही है.
बीजेपी कर्नाटक में कांग्रेस का किला भेजने के लिए तत्परता के साथ आक्रामक होने की कोशिश कर रही है तो वहीं कांग्रेस दक्षिण में अपना किला बचाने के लिए हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रही है.
सोशल मीडिया पर दोनों पार्टी के लोग दारू और आरोपों में कितनी सच्चाई है, इसका सच कीबोर्ड चला रहे साइबर सेनाओं के अलावा और कोई नहीं जानता, लेकिन जो सामने दिखता है वह है साइबर मीडिया पर इन दोनों पार्टियों के प्रचार की ताकत.
अकेले एक क्षेत्रीय नेता ने संभाला मोर्चा
कर्नाटक के चुनाव में एक बार फिर देखने को मिला है कि कैसे एक क्षेत्रीय नेता ने देश के सबसे कद्दावर नेता और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अकेले ही मोर्चा खोला हुआ है.
बीजेपी के लिए कर्नाटक में राह इतनी आसान भी नहीं है क्योंकि कर्नाटक में कांग्रेस का चेहरा और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया खुद ही मैदान में एक ताकतवर सेनापति की तरह मैदान में डटे हुए हैं.
बीजेपी जैसे ही सोशल मीडिया पर कोई दावा लेकर सिद्धारमैया या उनकी सरकार को आरोपों के घेरे में खड़ा करने की कोशिश करती है, कांग्रेस की साइबर सेना और खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया तुरंत ही सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर पलटकर वार शुरू कर देती है.
आक्रामक अंदाज में सिद्धारमैया
बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया कि सिद्धारमैया ने मलेशिया में काम कर रहे देश के एक आर्थिक भगोड़े से कीमती तोहफा कबूल किया और सबूतों के तौर पर तस्वीरें साझा की, तो सिद्धारमैया ने तुरंत पलटवार करते हुए सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी की नीरव मोदी के साथ तस्वीरें साझा करते हुए बीजेपी से ही सवाल खड़ा कर दिया.
ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब सिद्धारमैया ने मोदी और बीजेपी को उन्हीं के शब्दों में जवाब दिया. सिद्धारमैया कर्नाटक में कांग्रेस के कप्तान की भूमिका बेहतरीन तरीके से निभा रहे हैं. वही बीजेपी भी आंकड़ों के जरिए सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर सिद्धारमैया सरकार पर सवालों के गोले दाग रही है.
कांग्रेस मुक्त भारत के अभियान में बीजेपी कर्नाटक में अपना झंडा फहराने के लिए बेताब है और इसीलिए उसने कर्नाटक के रण में योगी, मोदी और अमित शाह जैसे अपने सभी सूरमा उतार रखे हैं.
वहीं, कांग्रेस की ओर से भी राहुल गांधी, मनमोहन सिंह और दूसरे नेताओं ने भी सिद्धारमैया के नेतृत्व में अपने किले का मोर्चा संभाला है. साइबर युद्ध के मैदान में कोई किसी से कम साबित नहीं हो रहा है.
मोदी बनाम सिद्धारमैया
प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में सिद्धारमैया पर सीधे-सीधे आरोप ठोकते हैं तो बिना विलंब किए सिद्धारमैया सोशल मीडिया के तरकश से तीर निकालकर प्रधानमंत्री की ओर चला देते हैं. अमित शाह अगर आरोपों के बाण छोड़ते हैं तो सिद्धारमैया भी तुरंत ढाल से उन हमलों को नाकाम कर देते हैं.
योगी भी प्रचार करने आए तो सिद्धारमैया ने उत्तर भारतीय वाला ब्रह्मास्त्र भी चला दिया. इतना ही सिद्धारमैया ने अखबारों में विज्ञापन के जरिए मोदी और येदियुरप्पा को मुद्दे पर खुली बहस करने का ओपन चैलेंज भी दे दिया. उन्होंने बहस के लिए जगह और तारीख भी उन्हें खुद तय करने का मौका दिया.
अब राज्य में अंतिम दौर में पहुंच चुके प्रचार का सियासी पारा बढ़ती गरमी के साथ बढ़ता जा रहा है.