कर्नाटक में जारी सियासी घमासान के बीच बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार रात कहा कि कांग्रेस संविधान का पाठ न पढ़ाए. कांग्रेस ने देश में आपातकाल लगाकर संविधान की किस तरह से रक्षा की थी, इसलिए वह बीजेपी के सामने संविधान की दुहाई न दे.
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास संविधान का धज्जियां उड़ाने का रहा है. कांग्रेस अपने समय में सरकारों को बर्खास्त करती रहती है. उन्होंने कर्नाटक में बीजेपी द्वारा विधायकों की खरीदफरोख्त के आरोप को खारिज कर दिया.
The party that blew up the constitution to shambles is teaching us the constitution, the party that imposed President rule the most number of times is giving us lessons: Union Minister Ravi Shankar Prasad in Delhi on #KarnatakaElectionResults2018 pic.twitter.com/mQmK835awW
— ANI (@ANI) May 16, 2018
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने देश में आपातकाल लगाया था और न्यायपालिका को सुपरसीड किया था, इसलिए वह बीजेपी के सामने इसकी दुहाई न दे. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस का पूरा रिकॉर्ड संविधान की धज्जियां उड़ाने वाला रहा है और वह हमें संविधान की मर्यादा बता रही है.जिस पार्टी ने देश के कई राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया, वह हमें मर्यादा बता रही है. 6 दिसंबर 1992 के बाद कांग्रेस सरकार ने हमारी 6 राज्य सरकारों को बर्खास्त कर दी थी जिसका उस घटना (मस्जिद विवाद) से मतलब नहीं था.
रविशंकर प्रसाद ने दो आयोग का हवाला देते हुए बताया, बोमाई मामले में कहा गया है कि अगर कोई सीएम अपना बहुमत खो दे तो उसे बहुमत सदन पर विश्वास मत के ज़रिये लाना होगा. बोमाई मामले से पता चलता है कि चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए किसे आमंत्रित करना है, यह राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करता है.
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकारिया आयोग में तीन बातें साफ कहीं गई हैं. इससे साफ हो जाता है कि राज्यपाल को किसी पार्टी को पहले सरकार गठन के लिए बुलाना होता है. आयोग की सिफारिश के मुताबिक चुनाव पूर्व गठबंधन को राज्यपाल पहले सरकार बनाने के लिए बुला सकता है. दूसरा, चुनाव में जो सबसे बड़ी पार्टी होती है, राज्यपाल को उसे सरकार गठन के लिए आमंत्रित करना होता है. इसके बाद के क्रम के मुताबिक चुनाव के बाद हुए गठबंधन को सरकार बनाने के लिए राज्यपाल द्वारा आमंत्रित करने की बात कही गई है. एमएम पुंछी आयोग ने भी सरकारिया कमीशन के इस क्रम वाले फैसले को बरकरार रखा.