10 मई को होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव का प्रचार अभियान इन दिनों जोरों पर हैं. दूसरी तरफ आयकर और पुलिस विभाग की छापेमारी भी जारी है. एक विशेष सूचना के आधार पर कर्नाटक पुलिस ने गुरुवार को कोलार जिले के बांगरपेट तालुक में एक निजी विला पर छापा मारा और 4 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी को जब्त किया. जब्त की गई राशि विला और विला के बाहर खड़ी एक गाड़ी से बरामद की गई है.
खबर के मुताबिक, एसपी डॉ धरणी देवी की सीधी निगरानी में केजीएफ पुलिस द्वारा सिय्योन हिल्स स्थित विला पर छापेमारी के दौरान विला तथा कार से 4,04,94,500 रुपये बेहिसाब नकदी जब्त की गई. पैसा कथित तौर पर मतदाताओं के बीच वितरण के लिए रखा गया था.
इस बीच जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है उसके मुताबिक, विला को रमेश यादव नाम के व्यक्ति ने पिछले दो साल से किराए पर लिया था. जिस समय यह छापेमारी की गई, उस समय विला में कोई भी मौजूद नहीं था. मौके पर पुलिस टीम के साथ चुनाव पर्यवेक्षक भी साथ में थे. फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है. पुलिस के मुताबिक, यह पैसा मतदाताओं के बीच में बांटने के लिए रखा गया था.
आपको बता दें कि 29 मार्च को कर्नाटक में आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद से ही बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई है. अभी तक जो आंकड़े सामने आए हैं उसके मुताबिक, 331 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति में से 117 करोड़ रुपये नकद, 85.53 करोड़ रुपये का सोना और 78.71 करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं.
- केजीएफ का पूरा नाम कोलार गोल्ड फील्ड्स है. 1871 में ब्रिटिश सैनिक माइकल फिट्जगेराल्ड लेवेली ने 1804 में एशियाटिक जर्नल में छपे चार पन्नों का एक आर्टिकल पढ़ा था. उसमें कोलार में पाए जाने वाले सोने के बारे में बताया गया था. अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान को मारने के बाद कोलार और उसके आसपास के इलाके पर अपना कब्जा जमा लिया था.
- लेवेली आकर बेंगलुरु रहने लगा. 1873 में लेवेली ने मैसूर के महाराज से उस जगह पर खुदाई करने की इजाजत मांगी. लेवेली ने कोलार क्षेत्र में 20 साल तक खुदाई करने का लाइसेंस लिया था. उसके बाद 1875 में वहां काम की शुरुआत हुई.काफी मुश्किलों के बाद कोलार गोल्ड फील्ड यानी केजीएफ से सोना निकालने का काम शुरू हुआ.
- केजीएफ की खानों में पहले रोशनी का इंतजाम मशालों और मिट्टी के तेल से जलने वाली लालटेन से होता था. लेकिन यह काफी नहीं था. इसलिए 130 किलोमीटर दूर कावेरी बिजली केंद्र बनाया गया था. इस तरह केजीएफ बिजली पाने वाला भारत का पहला शहर बना.
- बिजली पहुंचने के बाद केजीएफ में सोने की खुदाई बढ़ा दी गई. वहां तेजी से खुदाई करने के लिए कई मशीनों को काम में लगाया गया था. इसका नतीजा यह हुआ कि 1902 आते-आते केजीएफ भारत का 95 फीसदी सोना निकालने लगा. इसके चलते 1905 में सोने की खुदाई के मामले में भारत दुनिया में छठे स्थान पर पहुंच गया.
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- केजीएफ में सोना मिलने के बाद ब्रिटिश सरकार के अधिकारी और इंजीनियर वहां अपने घर बनाने लगे.यहां ब्रिटिश अंदाज में घरों का निर्माण हुआ, उससे लगता था कि वो मानो इंग्लैंड ही है. इसी के चलते केजीएफ को छोटा इंग्लैंड कहा जाता था.
- आजादी मिलने के बाद भारत सरकार ने इस जगह को अपने कब्जे में ले लिया था. उसके करीब एक दशक बाद 1956 में इस खान का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया. 1970 में भारत सरकार की भारत गोल्ड माइन्स लिमिटेड कंपनी ने वहां काम करना शुरू किया. शुरुआती सफलता मिलने के बाद समय के साथ कंपनी का फायदा कम होता गया. एक समय ऐसा भी आया जब वहां से सोना निकालने में जितना पैसा लग रहा था, वो हासिल सोने की कीमत से भी ज्यादा हो गई थी. इस चलते 2001 में भारत गोल्ड माइन्स लिमिटेड कंपनी ने वहां सोने की खुदाई बंद करने का निर्णय लिया गया था. माना जाता है कि केजीएफ में आज भी सोना है.
- केजीएफ में 121 सालों से भी ज्यादा समय तक चला. साल 2001 तक वहां खुदाई होती रही. एक रिपोर्ट के अनुसार, उन 121 सालों में केजीएफ की खदान से 900 टन से भी अधिक सोना निकाला गया था.
केजीएफ का पूरा नाम कोलार गोल्ड फील्ड्स है. ये कर्नाटक के दक्षिण पूर्व इलाके में स्थित एक जगह है. बेंगलुरू के पूर्व में मौजूद बेंगलुरू-चेन्नई एक्सप्रेस से 100 किलोमीटर दूर केजीएफफ टाउनशिप है. इस जगह का इतिहास बहुत पुराना और दिलचस्प रहा है. KGF से बीजेपी ने अश्विनी संपांगी को टिकट दिया है तो वहीं कांग्रेस ने रूपकला एम को उतारा है. रूपकला एम अभी मौजूदा विधायक हैं. उन्होंने 2018 में श्विनी संपांगी को मात दी थी. अश्विनी पूर्व विधायक वाई संपांगी की बेटी हैं. KGF सीट पर 2013 में बीजेपी ने जीत हासिल की थी.