कर्नाटक में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है. अब कांग्रेस दक्षिण का द्वार कहे जाने वाले कर्नाटक में सरकार बनाने जा रही है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर कर्नाटक का मुख्यमंत्री कौन होगा? सीएम पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, प्रदेश पार्टी अध्यक्ष डी के शिवकुमार के कयास लगाए जा रहे हैं. दोनों नेताओं को पार्टी ने दिल्ली भी बुलाया है. इससे पहले रविवार को बेंगलुरु में हुई विधायक दल की बैठक में प्रस्ताव पास कर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर सीएम चेहरे का चयन करने का फैसला छोड़ दिया गया. आइए जानते हैं कि डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया में किसका पलड़ा कहां भारी है?
1- डीके शिवकुमार को जब कांग्रेस ने कर्नाटक का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, उस वक्त पार्टी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही थी. प्रदेश अध्यक्ष रहते शिवकुमार ने न सिर्फ पार्टी को खड़ा किया, बल्कि राज्य में पार्टी को पूर्ण बहुमत दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई.
2- शिवकुमार, कांग्रेस के वफादार हैं. वे 1989 से अब तक 8 बार विधायक बन चुके हैं. उन्होंने कांग्रेस के अलावा कभी दूसरी पार्टी का रुख नहीं किया.
3- डीके वोक्कालिगा समुदाय के सबसे बड़े नेताओं में से एक माने जाते हैं. इस समुदाय का कर्नाटक में 50 सीटों पर प्रभाव माना जाता है.
4- डीके गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं. राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी उन्हें पसंद करते हैं. जब शिवकुमार को ईडी ने गिरफ्तार किया था, तब सोनिया गांधी उनसे मिलने पहुंची थीं.
5- डीके शिवकुमार को संकटमोचक भी कहा जाता है. जब कर्नाटक में ऑपरेशन लोटस हुआ था, तब उन्होंने कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखने के लिए पूरी जान लगा दी थी. इतना ही नहीं जब कांग्रेस शासित अन्य राज्यों में भी संकट आया, तब तब शिवकुमार ने अहम भूमिका निभाई. उनकी देखरेख में ही कांग्रेस विधायकों को रिजॉर्ट में ठहराया गया.
6- शिवकुमार सबसे अमीर विधायक हैं. उनके पास 1214 करोड़ रुपये की संपत्ति है. कांग्रेस नेतृत्व जानता है कि शिवकुमार पर दूसरे राज्यों में चुनाव लड़ने और आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए धन जुटाने के लिए भरोसा किया जा सकता है. वे सिद्धारमैया सरकार में ऊर्जा मंत्री भी रहे हैं.
7- कांग्रेस ने इस चुनाव में सीएम का चेहरा घोषित नहीं किया था. ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के नाते उन्होंने ही टिकट बंटवारे से लेकर चुनावी रणनीति बनाने तक अहम भूमिका निभाई. इसलिए जीत का सेहरा उनके सिर बंध रहा है. यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें सीएम बनाने की मांग कर रहे हैं. चुनाव प्रचार के दौरान शिवकुमार खुद को सीएम चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करते रहे हैं.
- डीके के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं. वे जेल भी जा चुके हैं. उनके खिलाफ कई मामलों में जांच चल रही है. ऐसे में कांग्रेस अगर उन्हें सीएम बनाती है, तो बीजेपी इसे मुद्दा बना सकती है. क्योंकि कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान भ्रष्टाचार को लेकर बोम्मई सरकार पर जमकर हमला बोला है.
- डीके अभी एक भी बार सीएम नहीं बने हैं. हालांकि, वे मंत्री रहे हैं. ऐसे में उनके पास प्रशासनिक अनुभव नहीं है. इतना ही नहीं राज्य में उनकी लोकप्रियता सिद्धारमैया की तुलना में कम है. ऐसे में अगर कांग्रेस ने राजस्थान की तरह कदम उठाया, तो शिवकुमार के हाथ से सीएम की कुर्सी फिसल सकती है. 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान सचिन पायलट प्रदेश के अध्यक्ष थे. लेकिन सीएम अशोक गहलोत को बनाया गया.
1- कांग्रेस के कर्नाटक में सबसे बड़े नेताओं में से एक हैं. उन्हें सीएम पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है. सिद्धारमैया ने अपने राजनीतिक जीवन में 12 चुनाव लड़े, इनमें से 9 में जीत हासिल की.
2- सिद्धारमैया सीएम रहे हैं. वे इससे पहले 1994 में जनता दल सरकार में कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री थे. उनकी प्रशासनिक पकड़ मानी जाती है.
3- सिद्धारमैया भी डीके की तरह गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं. सिद्धारमैया को 2008 में जेडीएस से कांग्रेस में लाने में मल्लिकार्जुन खड़गे की अहम भूमिका मानी जाती है. ऐसे में वे खड़गे के काफी करीबी बताए जाते हैं.
4- सिद्धारमैया 2013 से 2018 तक कर्नाटक के सीएम रहे. इस दौरान उन्होंने टीपू सुल्तान को कर्नाटक में नायक के तौर पर स्थापित करने की कोशिश की. ऐसे में मुस्लिम समुदाय में उनकी अच्छी पैठ मानी जाती है.
5- सिद्धारमैया कुरुबा समुदाय (ओबीसी) से आते हैं. कर्नाटक में तीसरा बड़ा समुदाय है. इतना ही नहीं सिद्धारमैया राज्य के सबसे बड़े ओबीसी नेता माने जाते हैं.
6- शिवकुमार की तुलना में सिद्धारमैया को ज्यादा बड़ा जन नेता माना जाता है. इतना ही नहीं उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला भी नहीं है.
7- सिद्धारमैया 76 साल के हैं. ऐसे में पार्टी इस बार उन्हें आखिरी मौका दे सकती है. सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया ने पार्टी के सामने 2-3 साल का फॉर्मूला भी दिया है. उन्होंने मांग रखी है कि उन्हें शुरुआती दो साल के लिए सीएम बनाया जाए. इसके बाद तीन साल के लिए डीके शिवकुमार को कुर्सी दी जाए.
- 2018 में सिद्धारमैया के नेतृत्व में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था.
- इस बार पार्टी ने सिद्धारमैया के चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ा. वे शिवकुमार की तुलना में कम एक्टिव दिखे.
- सिद्धारमैया 76 साल के हैं. अगर पार्टी भविष्य की राजनीति को देखकर युवा नेतृत्व पर भरोसा जताती है, तो सीएम बनने में उनकी उम्र रोड़ा बन सकती है.
- सिद्धारमैया एक बार कांग्रेस छोड़ कर जा चुके हैं. बाद में खड़गे की पहल पर वह कांग्रेस में वापस आए