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केरल का थालास्सेरी: लेफ्ट का गढ़, जहां राजनीति से कई सदी पुरानी है दम बिरयानी

थालास्सेरी में बिरयानी की शुरुआत के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं. इतिहास की कहानियों की मानें तो बिरयानी ने ईरान में जन्म लिया और भारत में मुगलों ने इसे लोगों से वाकिफ कराया. हालांकि, थालास्सेरी बिरयानी को अरब और मुगल संस्कृति का मिश्रण माना जाता है.

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केरल के थालास्सेरी की बिरयानी काफी फेमस है
केरल के थालास्सेरी की बिरयानी काफी फेमस है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केरल के थालास्सेरी की बिरयानी काफी ज्यादा फेमस है
  • थालास्सेरी के इतिहास जितना पुराना है यहां की बिरयानी का भी इतिहास

उत्तरी केरल का एक तटीय शहर थालास्सेरी बीते कई सालों से लाल किला है बन चुका है. वामपंथियों का गढ़ कहा जाने वाला यह शहर अक्सर राजनीतिक हिंसा की कहानियों को लेकर सुर्खियों में रहा है. लेकिन इसके अलावा भी ऐसा कुछ है जो इस शहर को बेहद खास बनाता है, और वह है इस यह शहर में मिलने वाली बिरयानी.

बिरयानी के मामले में थालास्सेरी अपने स्थानीय प्रभाव, खाना पकाने की शैली और व्यंजनों के आधार पर कई मामलों में अलग है. थालास्सेरी की दम बिरयानी काफी ज्यादा स्पाइसी बिरयानी मानी जाती है. हालांकि इस बिरयानी का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि खुद थालास्सेरी.

दरअसल, थालास्सेरी मालाबार क्षेत्र के सबसे पुराने व्यापारिक बंदरगाहों में से एक रहा है. 1680 के दशक में अरब तट के साथ यह एक छोटा तटीय शहर, ब्रिटिश लोगों के लिए व्यापार के केंद्र के रूप में था. केरल और कर्नाटक के कोडागु क्षेत्र के प्रामाणिक मसाले इन बंदरगाहों के माध्यम से दुनिया भर में निर्यात किए जाते थे. अंग्रेजों के अलावा, फ्रांसीसी ने भी व्यापार लिंक को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
 

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थालास्सेरी में बिरयानी की शुरुआत के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं. इतिहास की कहानियों की मानें तो बिरयानी ने ईरान में जन्म लिया और भारत में मुगलों ने इसे लोगों से वाकिफ कराया. हालांकि, थालास्सेरी बिरयानी को अरब और मुगल संस्कृति का मिश्रण माना जाता है. थालास्सेरी में कई रेस्टोरेंट हैं जो इस बिरयानी को बेचते हैं. ऐसा ही एक रेस्टोरेंट कन्नूर जिले के निवासी हाशिम और उनके भाई द्वारा चलाया जाता है. इंडिया टुडे से बातचीत में हाशिम कहते हैं, हालांकि कोरोना की वजह से बिजनेस में काफी नुकसान तो हुआ, लेकिन इन सबके बीच हमने अपनी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया. 
 




थालास्सेरी शहर में 20 वर्षों से अधिक समय से मौजूद इस रेस्टोरेंट की रसोई सचमुच कभी नहीं सोती है. बिरयानी की तैयारी सुबह 5 बजे से शुरू होती है. तैयारी का पहला हिस्सा सामग्री तैयार करना है. इसके लिए बड़ी मात्रा में प्याज, टमाटर और मसाले की आवश्यकता होती है. एक औसत दिन में, रेस्टोरेंट लगभग 500 से 700 प्लेट बिरयानी बेचता है.रेस्टोरेंट के एक नियमित ग्राहक सुजीत बताते हैं कि वह थालास्सेरी के मूल निवासी हैं और इस ख़ास बिरयानी का स्वाद लेने के लिए अक्सर यहां आ जाते हैं. सुजीत अपनी पसंदीदा बिरयानी का स्वाद चखते हुए कहते हैं कि कस्बे में राजनीतिक तापमान बिरयानी से भी ज्यादा गर्म है. उनका मानना है कि केरल में इस चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सत्ता में आएगा. लेकिन वास्तविकता क्या है ये तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे.

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बता दें कि केरल में 6 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान है और परिणाम 2 मई को घोषित किए जाएंगे.

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