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Exit Poll: केरल में सीपीएम के नेतृत्व वाले एलडीएफ को मिल सकती हैं 104-120 सीटें, बीजेपी को 0-2

वोट प्रतिशत की बात करें तो एग्जिट पोल के मुताबिक एलडीएफ को 47%, यूडीएफ को 38%, एनडीए को 12% और अन्य को 3 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है. वहीं मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन आज भी लोगों के लिए सबसे लोकप्रिय सीएम उम्मीदवार है.

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पिनराई विजयन लोगों की पहली पसंद (फाइल फोटो)
पिनराई विजयन लोगों की पहली पसंद (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केरल में एलडीएफ को मिल सकती है एकतरफा जीत
  • इससे पहले कोई भी सरकार दोबारा चुनकर नहीं आई
  • 47 प्रतिशत लोगों ने पिनराई विजयन को माना बेहतर सीएम

केरल विधानसभा चुनाव में सीपीएम के नेतृत्व वाला सत्तारुढ़ एलडीएफ को एकतरफा जीत मिलती दिखाई दे रही है. इंडिया टुडे- एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक एलडीएफ को 104 से 120 सीटें मिल सकती है. वहीं यूडीएफ को 20 से 36 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि बीजेपी को शून्य से दो सीटें मिल सकती हैं. अन्य को भी शून्य से दो सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. 2016 में एलडीएफ को 91 सीटें मिली थीं.

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वोट प्रतिशत की बात करें तो एग्जिट पोल के मुताबिक एलडीएफ को 47%, यूडीएफ को 38%, एनडीए को 12% और अन्य को 3 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है. वहीं एग्जिट पोल में यह बात भी सामने आई है कि मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन आज भी लोगों के लिए सबसे लोकप्रिय सीएम उम्मीदवार है. लगभग 47 प्रतिशत लोगों ने इन्हें पहली पसंद माना है.

वहीं ओमान चांडी को 27 प्रतिशत लोगों ने सीएम उम्मीदवार के लिए मुफीद माना है. जबकि बीजेपी के सीएम कैंडिडेट ई श्रीधरन को सिर्फ पांच प्रतिशत लोगों ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर पसंद किया है. जाहिर है ई श्रीधरन मेट्रो मैन के नाम से काफी लोकप्रिय रहे हैं लेकिन केरल में इनका जादू कुछ खास असर नहीं दिखा पाया है.

केरल विधानसभा चुनाव की 140 सीटों पर एक चरण में 6 अप्रैल को वोटिंग हुई थी. केरल में 1980 के बाद से सत्ता पर काबिज होने के बाद किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन को लगातार दोबारा जीत नहीं मिली है. एक तरह से यहां हर पांच साल बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है. ऐसे में अगर एग्जिट पोल के नतीजे सही साबित हुए तो यह पहली बार होगा जब सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार दोबारा प्रदेश में चुनकर आएगी.

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इंडिया टुडे- एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक 37  प्रतिशत लोगों ने विकास के नाम पर वोट किया है. जबकि 20 प्रतिशत लोगों ने बदलाव के लिए वोट किया है. 76 प्रतिशत लोगों ने माना है कि एलडीएफ सरकार ने अच्छा काम किया है.

सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली एलडीएफ और कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ ने अलग-अलग कार्यकालों में राज्य में 3 दशक तक शासन किया है. केरल विधानसभा चुनाव में लेफ्ट पार्टियों की अगुवाई वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यूडीएफ के बीच कांटे का मुकाबला माना जा रहा था, लेकिन अगर एग्जिट पोल के नतीजे को सही माना जाए तो कांग्रेस गठबंधन को जबरदस्त शिकस्त का सामना करना पड़ रहा है. 

किस गठबंधन के साथ कौन पार्टी? 

कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट में यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस (जोसेफ) आरएसपी, केरला कांग्रेस (जैकब), सीएमपी (जे) भारतीय नेशनल जनता दल और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक शामिल हैं. लेफ्ट की अगुवाई वाले एलडीएफ में सीपीएम, सीपीआई, जेडीएस, एनसीपी, केरला कांग्रेस (एम), केरला कांग्रेस (सकारिया थामस), कांग्रेस (सेक्युलर), जेकेसी, इंडियन नेशनल लीग, केरला कांग्रेस (बी) जेएसएस और लोकतांत्रिक जनता दल हैं. वहीं, एनडीए में बीजेपी और भारतीय धर्म जनसेना पार्टी शामिल है.
 

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