देश में 'मेट्रो मैन' के नाम से चर्चित 88 साल के ई श्रीधरन अपनी सियासी पारी शुरू करने जा रहे हैं. ई श्रीधरन बीजेपी में शामिल होंगे और केरल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भी उन्हें टिकट का ऑफर है. हालांकि, बीजेपी में चुनाव लड़ने की एक उम्र सीमा तय है. यही वजह रही है कि 75 साल से ज्यादा उम्र वाले कुछ नेताओं ने 2019 लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया था, जबकि कुछ नेताओं को पार्टी ने टिकट नहीं दिया था. इसलिए जून में 89 साल के होने जा रहे श्रीधरन को पार्टी क्या चुनावी मैदान में उतारेगी जबकि उन्होंने चुनाव लड़ने की मंशा भी जाहिर कर दी है.
केरल बीजेपी के अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने गुरुवार को यह घोषणा करके सभी को चौंका दिया कि मेट्रो मैन ई श्रीधरन बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं. सुरेंद्रन ने कहा, बीजेपी की राज्यव्यापी यात्रा मलप्पुरम जिले (श्रीधरन के गृह जिले) में पहुंचेगी, तब वे औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे. सुरेंद्रन ने कहा कि हमारी इच्छा है कि मेट्रो मैन आगामी केरल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर मैदान में उतरें और इसके लिए हमने उन्हें ऑफर भी दिया है.
देश के कई प्रतिष्ठित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में अपना अहम योगदान देने वाले 88 वर्षीय इंजीनियर श्रीधरन ने भी बीजेपी में शामिल होने की ख्वाहिश जतायी है. श्रीधरन ने कहा, 'बीजेपी में मेरे शामिल होने की अहम वजह यह है कि यूडीएफ और एलडीएफ दोनों ही केरल का विकास करने में फेल रहे हैं. मैं केरल के लिए कुछ करना चाहता हूं, उसके लिए मुझे बीजेपी में शामिल होना होगा. साथ ही श्रीधरन ने विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा भी जाहिर की है.
श्रीधरन फिलहाल रिटायर हो चुके हैं. उनका दिल्ली मेट्रो के अलावा कोलकाता, कोच्चि समेत देश के कई बड़े मेट्रो प्रोजेक्ट में अहम योगदान रहा है. 2019 में उन्होंने कश्मीर में भी मेट्रो का सपना साकार करने की तरफ कदम बढ़ाया था, जहां काम चल रहा है. भारत सरकार की ओर से श्रीधरन के योगदान को देखते हुए उन्हें पद्म विभूषण, पद्म श्री जैसे सम्मान से नवाजा जा चुका है. अब उनके सियासत में कदम रखने की चर्चा तेज है.
बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की केंद्र में सरकार बनने के बाद पार्टी ने कई अहम बदलाव किए थे. पीएम मोदी और अमित शाह की तरफ से साफ कर दिया गया था कि 75 की उम्र पार कर चुके नेताओं को चुनाव में टिकट नहीं दिया जाएगा. वहीं, मोदी कैबिनेट से नजमा हेपतुल्ला और कलराज मिश्र ने स्वेच्छा से मंत्री पद छोड़ दिया था और बाद में उन्हें राज्यपाल बनाया गया. इन दोनों नेताओं की इस्तीफे की वजह को उनकी उम्र सीमा से जोड़कर देखा गया था.
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के दिग्गज नेता लाल कृष्ण आडवाणी की जगह अमित शाह ने गांधी नगर से किस्मत आजमाई थी. बीजेपी के सीनियर नेता मुरली मनोहर जोशी भी कानपुर सीट से चुनाव नहीं लड़े थे. हिमाचल प्रदेश के दिग्गज नेता शांता कुमार ने पार्टी से कह दिया था कि वह अब चुनाव नहीं लड़ेंगे. कांगड़ा सीट से उनकी जगह किशन कपूर चुनाव लड़कर सांसद बने. ऐसे ही झारखंड में बुजुर्ग नेता करिया मुंडा की जगह खूंटी से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को पार्टी ने उतारा था.
75 साल की उम्र पार कर चुके बिहार के दिग्गज नेता हुकुम देव नारायण यादव की जगह, उनके बेटे को टिकट दिया गया था. वहीं, मध्य प्रदेश के इंदौर से सुमित्रा महाजन की जगह शंकर लालवानी 2019 में सांसद चुने गए. बीजेपी ने उत्तराखंड के भगत सिंह कोश्यारी और बीसी खंडूरी को भी टिकट नहीं दिया था. हालांकि, बाद में भगत सिंह कोश्यारी को पार्टी ने राज्यपाल बनाया.
बीजेपी में 75 साल की उम्र पार कर चुके नेता भले ही सांसद न हो, लेकिन विधायक जरूर हैं. उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 75 पार पांच नेताओं को टिकट दिया था, जिनमें से तीन जीतकर विधायक बने थे. इनमें मेरठ कैंट के विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, फाजिलनगर के गंगा सिंह कुशवाहा और देवरिया जिले के सुरेश तिवारी 80 साल के ऊपर के बीजेपी विधायक हैं. इसके अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा भी 75 साल की उम्र पार कर चुके हैं. देखना होगा कि क्या श्रीधरन बीजेपी के सबसे उम्रदराज विधायक होने की रेस में मैदान में उतरेंगे या अपनी सियासी पारी को किसी नए अंदाज में संवारेंगे.