बिहार में महागठबंधन से सीपीआई-माले को मन मुताबिक सीट न मिलने पर पार्टी ने बड़ा फैसला लिया है. सीपीआई-माले ने महागठबंधन से बाहर होकर बिहार की 5 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है. माले का कहना है कि वामपंथ को बाहर रखकर महागठबंधन द्वारा सीटों के बंटवारे से भाजपा विरोधी मतों के ध्रुवीकरण की संभावना कमजोर हुई. बता दें कि आरजेडी ने एक सीट आरा में माले को समर्थन देने की घोषणा की थी.
माले ने आरजेडी पर तंज कसते हुए कहा, '2015 के जनादेश के साथ हुए विश्वासघात और गठबंधन की विफलता से कोई सबक नहीं लिया गया.' माले, पूर्व के घोषित 5 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और आरजेडी द्वारा अपने कोटे से एक सीट माले को देने के मद्देनजर एक सीट आरजेडी के लिए छोड़ देगी. माले, सीपीआई को बेगूसराय में और सीपीएम को उजियारपुर में समर्थन देगी, साथ ही राज्य की बाकी बची सीटों पर एनडीए को हराने के लिए मैदान में उतरेगी.
विफलता से नहीं लिया सबक
माले ने कहा है कि कांग्रेस-आरजेडी सहित अन्य दलों के जरिए कल जिस तरह वामपंथ को बाहर रखते हुए भाजपा विरोधी गठबंधन का स्वरूप सामने लाया गया है, वह भाजपा विरोधी वोटों के व्यापक ध्रुवीकरण और बिहार की जमीनी हकीकत के अनुकूल नहीं है. ऐसा लगता है कि 2015 के जनादेश के साथ हुए विश्वासघात और गठबंधन की विफलता से कोई सबक नहीं लिया गया है.
माले ने महागठबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह सीटों का आपस मे बंटवारा किया गया है और वामदलों व उनकी स्वाभाविक दावेदारी वाली सीटों को नजरअंदाज किया है, वह न्याय संगत नहीं है. बिहार विधानसभा के भीतर पार्टियों की दलगत स्थिति और राज्य में पिछले दो वर्षों से चले जन आंदोलनों की अभिव्यक्ति भी इस गठबंधन में नहीं दिखती है. इन तमाम चीजों ने बिहार में बीजेपी विरोधी मतों के ध्रुवीकरण की संभावना को कमजोर किया है. इसने बिहार के व्यापक वाम, लोकतांत्रिक और प्रगतिशील समूहों को निराश किया है.
इन 5 सीटों पर लड़ेगी चुनाव
माले ने पटना में जारी बयान में कहा कि पहले ही हमने कम सीटों पर लड़ने का फैसला किया था, ताकि बीजेपी विरोधी मतों में बिखराव न हो. बता दें कि माले ने 6 सीटों पर लड़ने का फैसला किया था जिसमें से बाद में वाल्मीकिनगर सीट भी छोड़ दी. शेष 5 सीटें आरा, सीवान, काराकाट, जहानाबाद और पाटलिपुत्र हैं.
माले ने कहा, 'आरजेडी की ओर से अपने कोटे से एक सीट का ऑफर माले को किया गया है. हम भी अपनी उपरोक्त 5 लड़ी जाने वाली सीटों में से एक सीट आरजेडी के लिए छोड़ देंगे.' इसके साथ ही माले, सीपीआई को बेगूसराय में और सीपीएम को उजियारपुर में अपना समर्थन देगी और बिहार की शेष सीटों पर भाजपा-एनडीए को हराने के लिए अभियान चलाएगी.