लोकसभा चुनाव 2019 के तहत राजस्थान की गंगानगर लोकसभा सीट पर बीजेपी ने परचम लहराया है. भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) प्रत्याशी निहालचंद मेघवाल 406978 वोटों के बड़े अंतर से अपने नजदीकी प्रतिद्वंदी को शिकस्त देने में कामयाब रहे. इस सीट पर कुल 9 प्रत्याशी मैदान में थे. हालांकि मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही रहा.
2019 का जनादेश
गंगानगर लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी)प्रत्याशी निहालचंद मेघवाल को 897177 वोट मिले. वहीं कांग्रेस के भारत राम मेघवाल 490199 वोटों के साथ दूसरे, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के रावतारम 18309 वोटों के साथ तीसरे और 15543 वोटों के साथ नोटा चौथे नंबर पर रहे. बता दें कि इस सीट पर पांचवें चरण के तहत 6 मई को मतदान हुआ था. मतदान का प्रतिशत 74.39 रहा है.
2014 का चुनाव
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित श्री गंगानगर लोकसभा सीट पर 2014 के चुनाव में निहालचंद मेघवाल ने जीत दर्ज की थी. इस सीट पर कुल 73.1 फीसदी मतदान हुआ था, जिसमें निहालचंद को 658,130 (52.4%) वोट और कांग्रेस प्रत्याशी भंवरलाल मेघवाल को 366,389 (29.2%) वोट मिले थे.
मोदी कैबिनेट में राज्य मंत्री के तौर पर जब निहालचंद मेघवाल को मौका मिला तो केंद्र में प्रतिनिधित्व को तरस रहे सीमावर्ती गंगानगर-हनुमानगढ़ इलाके से पहली बार कोई केंद्र मे कोई मंत्री बना. हालांकि, 2018 में हुए कैबिनेट फेरबदल में निहालचंद से मंत्रिपद वापस ले लिया गया. निहालचंद मेघवाल पर साल 2011 में एक महिला ने रेप का आरोप लगाया था.
सामाजिक ताना-बाना
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित गंगानगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र संख्या-1, गंगानगर और हनुमानगढ़ जिले के कुछ हिस्सों को मिलाकर बनाया गया है. साल 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या 27,49,150 है जिसका 73.28 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 26.72 प्रतिशत हिस्सा शहरी है. वहीं कुल आबादी का 33.52 फीसदी अनुसूचित जाति हैं. इसके अलावा पंजाब से लगे इस क्षेत्र में सिखों की भी खासी आबादी है.
इस लोकसभा के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं. आजादी के बाद हुए 16 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर 10 बार जीत दर्ज की, जबकि 4 चार बार बीजेपी का कब्जा रहा. वहीं 1 बार जनता पार्टी और 1 बार भारतीय लोकदल ने इस सीट पर जीत दर्ज की.
सीट का इतिहासइस सीट पर 1952 से 1971 तक लगातार 5 बार कांग्रेस के पन्नाराम बारूपाल यहां से सांसद रहे, जबकि 1977 में भारतीय लोकदल के टिकट पर बेगाराम ने इस सीट पर कब्जा जमाया. 1980 और 1984 में कांग्रेस के बीरबल राम यहां से सांसद रहे, लेकिन 1989 में जनता पार्टी के टिकट पर बेगाराम ने एक बार फिर वापसी की. तो वहीं 1991 में कांग्रेस से बीरबल राम एक बार फिर सांसद बने.
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