जनता दल (यू) जदयू अपनी पार्टी की राष्ट्रीय पहचान बनाने के लिए कई और राज्यों में चुनाव लड़ सकती है. पार्टी का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से उनका गठबंधन केवल बिहार तक सीमित है. इसलिए पार्टी के विस्तार के लिए सभी राज्य इकाइयों से सुझाव मांगे गए कि वहां पर चुनाव लड़ने कि क्या संभावनाएं हैं.
पटना में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया, जो राज्य इकाई से बात करेगी, लेकिन किन-किन राज्यों में कितनी-कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना है, इस पर अंतिम फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार करेंगे. पार्टी ने इसके लिए उन्हें अधिकृत किया है. लक्षदीप में पार्टी पहले से ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है.
जनता दल (यू) के राष्ट्रीय महासचिव के.सी त्यागी ने सोमवार को बताया, 'पूर्वोत्तर में असम हो, चाहे मणिपुर पार्टी वहां चुनाव लड़ सकती है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से हमें चुनाव लड़ने को लेकर सुझाव मिले हैं. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की इच्छा है कि अधिक राज्यों से चुनाव लड़कर पार्टी को राष्ट्रीय मान्यता दिलवाई जाए ताकि जदयू का पुराना गौरव लौट सके.'
बिहार में जदयू बीजेपी और लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. पार्टी को बिहार में जिन 17 सीटों पर चुनाव लड़ना है, उस पर अभी तक फैसला नहीं हुआ है. पार्टी के नेता आरसीपी सिंह ने कहा कि दो तीन दिन में इसकी घोषणा कर दी जाएगी. राष्ट्रीय कार्यकारणी में सभी महत्वपूर्ण मामलों पर पार्टी का अपना पुराना रुख कायम है चाहे वो राम मंदिर का मामला हो या फिर धारा 370 का. पार्टी का मत है कि धारा 370 से छेड़छाड़ की गई तो यह देश की एकता और अखंडता के लिए घातक होगा.
सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत मांगने वालों पर निशाना साधते हुए जेडीयू के महासचिव आरसीपी सिंह ने कहा, 'हमारी वायु सेना ने जो कार्रवाई की है, इस पर सबूत मांगना बहुत ही अनुचित है. सैनिक हमारे हैं. हमारे एयरफोर्स के जो लोग हैं ये उनके मनोबल को गिराने की कोशिश है. इसकी हम भर्त्सना करते हैं. राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में प्रशांत किशोर भी मौजूद थे.