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डॉ. जितेंद्र सिंह: मोदी सरकार में कद्दावर मंत्री, 18 को उधमपुर सीट पर होगी 'अग्निपरीक्षा'

बीजेपी प्रत्याशी डॉ. जितेंद्र सिंह को हराने के लिए सभी दल एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस प्रत्याशी की उम्मीदवारी को जहां अपना समर्थन दिया है, वहीं पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती ने जम्मू की दोनों ही सीटों पर अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है.

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह.
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह.

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह जम्मू-कश्मीर की उधमपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं. 2014 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता गुलाम नबी आजाद को 60 हजार से भी अधिक वोटों से मात दी थी. इस बार डॉ. जितेंद्र सिंह के सामने चुनौती पिछली बार से भी अधिक है. इस बार उनके सामने कांग्रेस प्रत्याशी विक्रमादित्य हैं, जो डॉ. कर्ण सिंह के पुत्र हैं. खास बात ये है कि विक्रमादित्य को नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी का भी समर्थन है. 18 अप्रैल को उनकी ‘अग्निपरीक्षा’ होगी.

हराने के लिए विपक्ष ने लगा दिया एड़ी-चोटी का जोर

बीजेपी प्रत्याशी डॉ. जितेंद्र सिंह को हराने के लिए सभी दल एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस प्रत्याशी की उम्मीदवारी को जहां अपना समर्थन दिया है, वहीं पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती ने जम्मू की दोनों ही सीटों पर अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है. उनका कहना है कि धर्म निरपेक्ष वोट बैंक किसी भी तरह बंटना नहीं चाहिए, इसीलिए पीडीपी उधमपुर और जम्मू संसदीय सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं उतार रही. डॉ. जितेंद्र सिंह के लिए यही बात मुश्किल का सबब बन सकती है.

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लाल सिंह भी बन सकते हैं चुनौती

पूर्व भाजपा मंत्री चौधरी लाल सिंह जम्मू संभाग की दोनों सीटें जम्मू और उधमपुर से मैदान में उतर रहे हैं. भाजपा से निकाले जाने पर उन्होंने डोगरा स्वाभिमान संगठन (DSS) बना लिया. लाल सिंह का जम्मू संभाग में अच्छा खासा प्रभाव है. लाल सिंह हिंदू वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं. 2009 में लाल सिंह इसी सीट पर जीत दर्ज कर संसद पहुंचे थे.

इस बार महाराज हरि सिंह के पोते से होगा मुकाबला

इस बार जम्मू-कश्मीर की उधमपुर लोकसभा सीट पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का सीधा मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह से है. विक्रमादित्य आखिरी डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह के पोते हैं. 54 साल के विक्रमादित्य सिंह कांग्रेस नेता डॉ. कर्ण सिंह के पुत्र हैं. लिहाजा इस बार का चुनाव उनके लिए भी आसान नहीं रहने वाला. डॉ. जितेंद्र सिंह के लिए इस बार लड़ाई इसलिए भी और अधिक चुनौतीपूर्ण होने जा रही क्योंकि इस बार पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों ही दलों ने कांग्रेस प्रत्याशी विक्रमादित्य को समर्थन दे दिया है. यानी, जम्मू-कश्मीर की कद्दावर क्षेत्रीय दल अपने प्रत्याशी नहीं उतार रही हैं.

मोदी सरकार में कद्दावर मंत्री

डॉ. जितेंद्र सिंह मोदी सरकार में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के राज्यमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग तथा अंतरिक्ष विभाग के राज्यमंत्री हैं. वे भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं. इससे पहले वे जम्मू-कश्मीर बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता थे. पेशे से डॉक्टर जितेंद्र सिंह लेखक, प्रोफेसर और कॉलमनिस्ट भी हैं. उनके दो बेटे और तीन बेटियां हैं. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास 3.84 करोड़ की संपत्ति है. इनमें 1.53 करोड़ की चल संपत्ति और 2.30 करोड़ की अचल संपत्ति है.

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दो बेटों के पिता जितेंद्र पेशे से हैं डॉक्टर

राजिंदर सिंह और शांति देवी के पुत्र जितेंद्र सिंह का जन्म 6 नवंबर 1956 को जम्मू में हुआ था. पेशे से डॉक्टर  जितेंद्र सिंह ने चेन्नई की स्टैनली मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री ही है. इनकी पत्नी का नाम मंजू सिंह है. डॉ. जितेंद्र सिंह के दो बेटे हैं. जितेंद्र सिंह लिखने का भी शौक रखते हैं. अब तक उनकी 6 किताबें पब्लिश हो चुकी हैं.

5 साल का रिपोर्ट कार्ड लेकर पहुंचे जनता के बीच

दिल्ली में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. जितेंद्र सिंह को अपनी संसदीय सीट का दौरा करने का समय कम ही मिला है. हालांकि उनका दावा है कि पिछली सरकारों की तुलना में मोदी सरकार में राज्य में कई विकास कार्य हुए हैं. उनका संसदीय क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा है. इन्ही विकास कार्यों का हवाला देते हुए वे एक बार फिर उधमपुर की जनता के बीच पहुंचे हैं. डॉ. सिंह कह रहे हैं कि वे 5 साल के विकास कार्यों के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर वोट मांग रहे हैं.

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