अमरावती लोकसभा सीट कभी कांग्रेस का गढ़ थी लेकिन पिछले 25 सालों से यहां शिवसेना जीतती आ रही है. यहां वर्तमान में शिवसेना से सांसद आनंदराव अड़सूल लोकसभा सांसद हैं. वह पिछले दो बार से जीतते आ रहे हैं.
अमरावती लोकसभा सीट की ख़ास बात यह है कि जितनी बार भी यहां से प्रमुख दलों की महिला प्रत्याशी उतरीं, उन्हें हमेशा यहां से जीत हासिल हुई है. आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस से पहली बारी ऊषा चौधरी को 1980 में अमरावती लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा और वो जीतकर संसद पहुंची.
फिर 1991 में प्रतिभा पाटील को कांग्रेस ने टिकट दिया. उन्होंने शिव सना के प्रकाश पाटील भारसाकले को हराया. हालांकि, इस सीट से प्रतिभा पाटील केवल एक ही बार चुनाव लड़ी. मालूम हो कि प्रतिभा पाटिल भारत की 12 वीं राष्ट्रपति भी रह चुकी हैं.
40 साल रहा कांग्रेस का राज...
आजादी के बाद 1951 से अमरावती लोकसभा क्षेत्र, कांग्रेस का गढ़ रहा है. 1989 तक लगभग 40 साल कांग्रेस का इस सीट पर राज रहा. इसके बाद कांग्रेस की जीत का सिलसिला सबसे पहले भाकपा के सुदाम देशमुख ने तोड़ा. हालांकि, इसके अगले ही लोकसभा चुनाव में प्रतिभा पाटील ने बाजी पलट दी और कांग्रेस को जीत दिलाई.
शिवसेना ने खाता खोला...
इसके बाद 1996 में यहां शिवसेना ने खाता खोला. सांसद बने अनंत राव गुढे. फिर 1998 में हुए चुनाव में गवई राम कृष्ण सूर्यभान रिपब्लिकन पार्टी से चुने गए. फिर 1999 और 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में शिवसेना के अनंत राव गुढे दोबारा जीते. उनके बाद यह सीट 2009 के चुनाव में शिवसेना के ही आनंदराव अड़सूल ने जीती. वो इस सीट को 2014 में भी जीतने में कामयाब रहे.
क्या है विधानसभा क्षेत्रों की स्थिति...
अमरावती लोकसभा सीट के अंतर्गत 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इनमें बड़नेरा, अमरावती, तिवसा, दर्यापुर, मेलघाट, अचलपुर शामिल हैं. अमरावती, दर्यापुर, मेलघाट विधानसभा सीट बीजेपी के पास है तो वहीं तिवसा सीट पर कांग्रेस का दबदबा है. बड़नेरा और अचलपुर सीट निर्दलियों के कब्जे में है.