रत्नागिरी सिंधुदुर्ग लोकसभा सीट 2008 में आस्तित्व में आई. यहां से पहली जीत कांग्रेस के नीलेश राणे को मिली और दूसरी शिवसेना के विनायक राउत को मिली. वर्तमान में इस सीट से शिवसेना के विनायक राउत लोक सभा सांसद हैं. 2019 में देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस यहां वापिसी कर पाती है या नहीं?
विधानसभा सीट का मिजाज
रत्नागिरी सिंधुदुर्ग लोकसभा सीट में 6 विधानसभा आती हैं. चिपलून, रत्नागिरी, राजापुर, कुडल, सांवतवाडी विधानसभा सीट पर शिवसेना का एकतरफा राज है. सिर्फ एक सीट कांकावली पर कांग्रेस का विधायक है.
लोकसभा सीट का मिजाज
रत्नागिरी सिंधुदुर्ग लोकसभा सीट 2008 में आस्तित्व में आई. 2009 में इस सीट से पहली बार कांग्रेस के नीलेश राणे सांसद चुने गए. 2014 में शिवसेना के विनायक राउत ने इस सीट से जीत हासिल की थी.
2014 के लोकसभा चुनावों में जीत का गणित
2009 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के नीलेश राणे को जीत मिली थी. उन्हें 3,53,915 वोट मिले थे. दूसरे स्थान पर शिवसेना के सुरेश प्रभु रहे जो बाद में मोदी सरकार में रेल मंत्री बने. उन्हें 3,07,165 वोट मिले थे. 2014 में शिवसेना के विनायक राउत को इस सीट से जीत मिली. उन्हें 4,93,088 वोट मिले. वहीं, दूसरे स्थान पर नीलेश राणे रहे जिन्हें 3,43,037 वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर बीएसपी के आयरे राजेंद्र लाहु रहे जिन्हें 13,088 वोट मिले थे.
सांसद विनायक राउत के बारे में
विनायक राउत ने अपना राजनीतिक करियर बीएमसी, मुंबई से पार्षद के रूप में शुरू किया. 1999 से 2004 तक वे मुंबई की विले पार्ले विधानसभा से विधायक बने. 2005 में शिवसेना के पार्टी महासचिव बने. 2012 से 2014 तक महाराष्ट्र की विधान परिषद में मेंबर रहे. 2014 में राउत रत्नागिरी सिंधुदुर्ग लोकसभा सीट से सांसद चुने गए.
संसद में वर्तमान सांसद का प्रदर्शन और संपत्ति
संसद में इनकी उपस्थिति 80 फीसदी रही. वहीं, संसद में इन्होंने 119 डीबेट में भाग लिया. संसद में इन्होंने 1004 प्रश्न पूछे. ये प्राइवेट मेंबर्स बिल 2 लेकर आए. इस सीट पर संसदीय इलाके में खर्च करने के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान है. इसमें से मिले फंड का 82.10 फीसदी खर्च किया. पोस्ट ग्रेजुएट विनायक राउत ने 2014 के लोकसभा चुनाव के हलफनामे में 4 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी. इन पर 5 क्रिमिनल केस दर्ज हैं.