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कई दिग्गजों की जीत की गवाह रही है तेलंगाना की करीमनगर लोकसभा सीट

करीमनगर लोकसभा सीट की कुल आबादी का 19.03 फीसदी हिस्सा अनुसूचित जाति का है तो 2.47 फीसदी हिस्सा अनुसूचित जनजाति का है. 2014 के लोकसभा चुनाव (72.69 फीसदी) में यहां 2009 के लोकसभा चुनाव (66.12 फीसदी) के मुकाबले 6.50 फीसदी ज्यादा वोटर टर्नआउट देखने को मिला था.

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KCR इस सीट से दो बार जीते (फोटो- पीटीआई)
KCR इस सीट से दो बार जीते (फोटो- पीटीआई)

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तेलंगाना की करीमनगर लोकसभा सीट यहां के करीमनगर जिले में स्थित है. करीमगनर जिला गोदावरी नदी की सहायक नदी मानैर नदी के किनारे पर बसा हुआ है. 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की करीब 80 फीसदी आबादी ग्रामीण है और करीब 20 फीसदी आबादी शहरी इलाकों में रहती है. करीमनगर लोकसभा सीट से इस समय तेलंगाना राष्ट्र समिति के विनोद कुमार बाइनापाली सांसद हैं.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

1952 से ही यह सीट कांग्रेस का मजबूत गढ़ रही है. हालांकि बीच-बीच में तेलंगाना प्रजा समिति, भाजपा और तेलुगू देशम पार्टी भी चुनाव जीतती रही है. यहां हुए 16 आम चुनावों में से 10 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को जीत मिली है. टीआरएस के गठन के बाद यह सीट इस पार्टी के फाउंडर और राज्य के मौजूदा मुख्य मंत्री के. चंद्रशेखर राव के पास भी रही है. वह तेलंगाना आंदोलन के दौरान यहां से बड़े अंतर से दो बार जीत दर्ज कर चुके हैं.

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सामाजिक ताना-बाना

करीमनगर लोकसभा सीट की कुल आबादी का 19.03 फीसदी हिस्सा अनुसूचित जाति का है तो 2.47 फीसदी हिस्सा अनुसूचित जनजाति का है. 2014 के लोकसभा चुनाव (72.69 फीसदी) में यहां 2009 के लोकसभा चुनाव (66.12 फीसदी) के मुकाबले 6.50 फीसदी ज्यादा वोटर टर्नआउट देखने को मिला था. करीमनगर लोक सभा क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें हैं. इनमें से चोप्पाडान्डी और मान्कोन्डुर दो सीटें अनुसूचित जातियों के लिए सुरक्षित हैं और करीमनगर, वेमुलवाडा, सिरसिल्ला, हुजूराबाद और हुस्नाबाद सीटें अनारक्षित हैं. इस समय सातों विधानसभा सीटें तेलंगाना राष्ट्र समिति के पास हैं. करीमनगर में पुरुष और महिला मतदाता लगभग बराबर संख्या में हैं. यहां पर 7,77,458 पुरुष मतदाता और 7,73,376 महिला मतदाता यानी कुल 15,50,834 मतदाता हैं. 2014 के लोकसभा चुनावों में 72.59 फीसदी मतदाताओं ने वोट दिया था, जिसमें महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले ज्यादा थी.

2014 का जनादेश

2014 के लोकसभा चुनाव में यह सीट टीआरएस के बी. विनोद कुमार के हाथ लगी थी. उन्होंने कांग्रेस के पोनम प्रभाकर को 2 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से मात दी थी. बी. विनोद कुमार को इस चुनाव में 44.93 फीसदी यानी 5,05,783 वोट मिले थे. वहीं, कांग्रेस के पोनम प्रभाकर को 26.71 फीसदी यानी 3,00,706 वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर भाजपा के सी. चंद्रशेखर राव रहे थे. उन्हें 19.08 फीसदी यानी 2,14,828 वोट मिले थे. 2014 में यह सीट टीआरएस ने कांग्रेस से छीनी थी. वहीं, 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पोनम प्रभाकर ने टीआरएस के बी. विनोद कुमार को करीबी मुकाबले में 50 हजार वोटों के अंतर से मात दी थी. कांग्रेस के पोनम प्रभाकर को 3,17,927 वोट मिले थे. वहीं, टीआरएस के बी. विनोद कुमार को 2,67,684 वोट मिले थे.

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सांसद का रिपोर्ट कार्ड

विनोद कुमार बाइनापाली की संसद में उपस्थिति 78 फीसदी रही है, जो कि औसत राष्ट्रीय उपस्थिति (80) से दो फीसदी कम है. वहीं, उनके राज्य के सांसदों की औसत उपस्थिति की बात करें तो 69 फीसदी से कहीं ज्यादा है. बहसों में भाग लेने के मामले में उनका रिकॉर्ड अच्छा है. उन्होंने 103 बहसों में हिस्सा लिया. बहस में हिस्सा लेने का सांसदों का राष्ट्रीय औसत 65.3 है , जबकि तेलंगाना के सांसदों ने औसत 38.2 बहसों में हिस्सा लिया है. सवाल पूछने के मामले में भी वह राष्ट्रीय और राज्य के औसत से आगे हैं. उन्होंने 539 बहसों में हिस्सा लिया, जबकि राष्ट्रीय औसत 285 बहस का है और तेलंगाना के सांसदों का औसत 295 बहसों का है. इसके अलावा वह सदन में 7 प्राइवेट मेंबर बिल भी लाए, इस मामले में वह राष्ट्रीय और अपने राज्य के औसत 2.2 बिल से कहीं आगे हैं. विनोद कुमार बाइनापाली को उनके निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिए 17.50 करोड़ का फंड आवंटित हुआ था. जिसमें से उन्होंने 96.99 फीसदी (ब्याज सहित रकम) के विकास कार्य किए. इस फंड में से 5.48 करोड़ रुपये वह खर्च नहीं कर सके.

कई हाई-प्रोफाइल नेता जीत चुके हैं यहां से

इस सीट से वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल और पूर्व में भाजपा नेता रहे सी. विद्यासागर राव जीत चुके हैं. वह लगातार दो बार 12वीं और 13वीं लोकसभा में यहां की जनता के प्रतिनिधि चुने गए थे. इनके अलावा तेलंगाना के पहले मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव भी यहां से चुनाव जीत चुके हैं. वह 14वीं लोक सभा में यहां से सांसद चुने गए थे.

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