कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दक्षिण भारत कूच कर गए. पहले चरण के मतदान से पहले ही कांग्रेस ने ये फैसला कर लिया कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी दो सीटों वायनाड और अमेठी से चुनाव लड़ेंगे. इस ऐलान के बाद बीजेपी अब ताल ठोंककर राहल गांधी के अमेठी से पलायन कर जाने का आरोप जड़ रही है. वहीं, लेफ्ट भी कांग्रेस से आर-पार की लड़ाई लड़ने की मूड में आ गई है.
बीजेपी नेताओं की ओर से भी बयान आने शुरू हो गए हैं. कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी को रणछोड़ दास गांधी कहते हुए कहा कि मोदी की सुनामी के कारण हार की डर से राहुल गांधी अब दक्षिण जा रहे हैं. राहुल किसी भी सीट से चुनाव नहीं जीतेंगे. वहीं, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अपनी परंपरागत सीट छोड कर केरल से चुनाव लड़ने जाना बताता है कि राहुल गांधी डरे हुए हैं. उन्हें पता है कि अमेठी से स्मृति ईरानी सांसद बनने जा रही हैं. कितनी भी कोशिश कर लें, 23 मई के पता चल जाएगा कि जनता ने उन्हें नकार दिया है.
मोदी सरकार में मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि इसमें मैं क्या कहूं, ये उनका हक है. मैं राहुल जी के मन में नहीं हूं, पर इतना है कि हम लोग दोनों जगह (सुल्तानपुर और अमेठी) पर जीत रहे हैं.
आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का पूरा ध्यान UP, बंगाल, केरल जैसे राज्यों पर ही क्यों है? MP, राजस्थान, छत्तीसगढ़ पर फ़ोकस क्यों नही? विपक्ष को कमज़ोर करके क्या हासिल करेगी कांग्रेस?
विरोध में लेफ्ट, प्रकाश करात बोले- विरोध करेंगे
राहुल गांधी के चुनाव लड़ने के ऐलान के थोड़ी देर बाद केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने कहा कि वायनाड से चुनाव लड़कर राहुल लेफ्ट को चुनौती देने आ रहे हैं. वायनाड 20 लोकसभा सीटों में से एक है और इसे बाकी सीटों से अलग देखने की आवश्यकता नहीं है. हम राहुल गांधी से लड़ेंगे.
वहीं, सीपीआई नेता प्रकाश करात ने कहा कि इसका हम पुरजोर विरोध करेंगे और इस चुनाव में हम वायनाड में राहुल गांधी की हार सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे.
कांग्रेस की बढ़ सकती है मुश्किल
दो सीटों से बड़े चेहरों के चुनाव लड़ने का पुराना इतिहास रहा है, लेकिन ये नए दौर की बीजेपी है. कांग्रेस के लिए ये साबित करना आसान नहीं होगा कि ये चुनावी फैसला है. और इसका अमेठी की जीत-हार से कोई लेना-देना नहीं.