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AFSPA पर कांग्रेस का विरोध कर रही BJP, पहले खुद किया था यही वादा

कांग्रेस ने घोषणापत्र में वादा किया है कि सत्ता में आने के बाद कश्मीर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम AFSPA की समीक्षा की जाएगी. इसे लेकर बीजेपी कांग्रेस पर हमलावर हो गई है. लेकिन, बीजेपी भी कांग्रेस की तरह ही AFSPA की समीक्षा का वादा पहले कर चुकी है.

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नरेंद्र मोदी और महबूबा मुफ्ती (फोटो-PTI)
नरेंद्र मोदी और महबूबा मुफ्ती (फोटो-PTI)

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कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए मंगलवार को अपना घोषणापत्र जारी किया. कांग्रेस ने घोषणापत्र में वादा किया है कि सत्ता में आने के सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम (AFSPA) की समीक्षा की जाएगी. इसे लेकर बीजेपी कांग्रेस पर हमलावर हो गई है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से लेकर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली तक AFSPA को लेकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर रही है. लेकिन, बीजेपी भी कांग्रेस की तरह ही AFSPA की समीक्षा का वादा कर चुकी है.

कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया है कि वह सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम (AFSPA) 1958 में सुरक्षा बलों के अधिकारों और नागरिकों के मानवाधिकारों में संतुलन बनाने के लिए संशोधन करेगी और जबरन लापता किए जाने, यौन हिंसा और यातना में मिली छूट (इम्युनिटी) को हटाएगी.

बता दें कि AFSPA कानून के तहत सेना को कुछ विशेष अधिकार मिले हैं. सेना किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है और हिंसा की स्थिति में फायरिंग भी कर सकती है.

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कांग्रेस ने सत्ता में आने पर AFSPA की समीक्षा का चुनावी घोषणा में वादा किया है. बीजेपी ने इस पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि कांग्रेस पार्टी खतरनाक वादे कर रही है और उसके मेनिफेस्टो में ऐसा एजेंडे हैं जो देश को तोड़ने का काम करते हैं.

हालांकि 2014 में बीजेपी ने भी AFSPA की समीक्षा का ऐसे ही वादा किया था. पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के साथ हमारा गठबंधन हुआ था और दोनों पार्टियों के बीच कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बना था, उसमें AFSPA की समीक्षा करने की बात थी. महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा था कि पीडीपी ने बीजेपी के साथ अपने गठबंधन के एजेंडे में जिस मुद्दे को शामिल किया था, उसका समर्थन करके कांग्रेस ने बड़ा साहस दिखाया है. इसका मतलब साफ है कि AFSPA  को लेकर कांग्रेस जो वादा इस बार के लोकसभा चुनाव में कर रही है. बीजेपी उसे पहले ही कर चुकी है.

इसके बावजूद केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता अरुण जेटली ने कहा कि राहुल गांधी के दोस्तों ने जो मेनिफेस्टो बनाया है वह जम्मू-कश्मीर और राष्ट्र की सुरक्षा को लेकर सही नहीं है. इस मेनिफेस्टो में ऐसे एजेंडे हैं जो देश को तोड़ने का काम करते हैं. यह राष्ट्र की एकता के खिलाफ जाते हैं. जो कांग्रेस पार्टी और नेहरू गांधी परिवार ने जम्मू-कश्मीर को लेकर जो निर्णय लिया था वह ऐतिहासिक भूल थी. उसके लिए देश उन्हें कभी माफ नहीं कर सकता है. उस एजेंडो को और खतरनाक तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी है.

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अरुण जेटली ही नहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी AFSPA को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि मैं कांग्रेस प्रमुख से पूछना चाहता हूं. क्या वह सशस्त्र बलों को मजबूत करना चाहते हैं या क्या वह उनके मनोबल को गिराने की कोशिश कर रहे हैं? AFSPA पर वह क्या संदेश देना चाहते हैं?

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