साल 2019 के दस्तक देते ही देश में लोकसभा चुनावों का काउंट डाउन शुरू हो गया है. राजस्थान में हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के दौरान चढ़ा सियासी पारा अगले कुल महीने बरकरार रहने वाला है. चुनाव जीत कर सत्ता में वापसी करने वाली कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं और पार्टी में आम चुनावों की तैयारियों को लेकर मंथन का दौर जारी है. जबकि कम मत प्रतिशत अंतर से हारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस हार की भरपाई करने की रणनीति में लगी है.
पिछले विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीत कर आने वाली बीजेपी ने गत लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल की थी. लेकिन 2018 में हुए लोकसभा उपचुनाव में अलवर और अजमेर की सीट कांग्रेस के हाथों गंवा बैठी. वहीं 2018 के आखिर में हुए विधानसभा चुनाव में 73 सीटों के साथ बीजेपी विपक्ष में बैठने को मजबूर है जबकि 99 सीटों के साथ कांग्रेस सत्ता में है. भारत-पाकिस्ताथ सीमा पर स्थित गंगानगर लोकसभा सीट का एक दिलचस्प इतिहास रहा है कि यहां से कभी कोई गैर मेघवाल सांसद नहीं बना. वर्तमान में पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के निहालचंद मेघवाल यहां से सांसद हैं.
राजनीतिक पृष्टभूमि
गांगानगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र राजस्थान के उत्तर पश्चिम छोर पर स्थित है. इस लोकसभा के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं. आजादी के बाद हुए 16 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर 10 बार जीत दर्ज की, जबकि 4 चार बार बीजेपी का कब्जा रहा. वहीं 1 बार जनता पार्टी और 1 बार भारतीय लोकदल ने इस सीट पर जीत दर्ज की. 1952 से 1971 तक लगातार 5 बार कांग्रेस के पन्नाराम बारूपाल यहां से सांसद रहे, जबकि 1977 में भारतीय लोकदल के टिकट पर बेगाराम ने इस सीट पर कब्जा जमाया. 1980 और 1984 में कांग्रेस के बीरबल राम यहां से सांसद रहे, लेकिन 1989 में जनता पार्टी के टिकट पर बेगाराम ने एक बार फिर वापसी की. तो वहीं 1991 में कांग्रेस से बीरबल राम एक बार फिर सांसद बने.
1996 के चुनाव में बीजेपी ने युवा नेता और पूर्व सांसद बेगाराम के पुत्र निहालचंद मेघवाल को टिकट दिया जिन्होंने कांग्रेस के बीरबल राम को शिकस्त दी. 1998 के चुनाव में कांग्रेस के शंकर पन्नू जीते तो वहीं 1999 में बीजेपी से निहालचंद मेघवाल ने वापसी की. इसके बाद 2004 का चुनाव में निहालचंद फिर सांसद बने लेकिन 2009 के चुनाव में निहालचंद कांग्रेस के भरतराम मेघवाल से चुनाव हार गए. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में निहालचंद मेघवाल ने चौथी बार इस सीट पर कब्जा जमाया और केंद्र सरकार में मंत्री बने.
गंगानगर लोकसभा की 8 सीटों में गंगानगर जिले की सादुलशहर, गंगानगर, करनपुर, सूरतगढ़ और रायसिंह नगर विधानसभा और हनुमानगढ़ जिले की सांगरिया, हनुमानगढ़ और पिलीबंगा विधानसभा सीट शामिल हैं. 2018 की आखिर में हुए विधानसभा चुनाव में इस 8 सीटों में से 4 पर बीजेपी, 3 पर कांग्रेस और 1 पर निर्दलीय उम्मदीवार ने जीत दर्ज की. जिसमें बीजेपी ने सूरतगढ़, रायसिंह नगर, सांगरिया और पीलीबंगा सीटें जीती, जबकि कांग्रेस ने सादुलशहर, करनपुर और हनुमानगढ़ की सीट पर कब्जा जमाया, वहीं गंगानगर सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की.
सामाजिक ताना-बाना
साल 2009 में हुए परीसीमन में गंगानगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र भूगोल बदल गया. परीसीमन में दो विधानसभा क्षेत्र टिब्बी और केसरीसिंहपुर खत्म हो गए, जबकि नोहर और भादरा चुरू में चले गए. वहीं राजयसिंहनगर, सूरतगढ़ और पीलीबंगा को बीकानेर से हटाकर गंगानगर में जोड़ दिया गया. इस परीसीमन ने गंगानगर का नक्शा तो बदल दिया लेकिन जो नहीं बदला वो थी जाति. 16 लोकसभा चुनावों में विभिन्न दलों ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया लेकिन एक बार भी कोई गैर-मेघवाल सांसद नहीं बन पाया. पन्नाराम बारूपाल से शुरू हुए इस सिलसिले को बेगाराम, बीरबल राम, शंकर पन्नू ने आगे बढ़ाया. अब यह सिलसिला बेगाराम के बेटे निहालचंद बरकरार रखे हुए हैं. इसका कारण यह है कि अनुसूचित जाति बहुल इस क्षेत्र में मेघवाल समुदाय की जनसंख्या कुल आबादी की एक तिहाई है. लिहाजा हर दल मेघवाल समुदाय के उम्मीदवार पर ही दांव खेलता है.
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित गंगानगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र संख्या-1, गंगानगर और हनुमानगढ़ जिले के कुछ हिस्सों को मिलाकर बनाया गया है. साल 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या 27,49,150 है जिसका 73.28 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 26.72 प्रतिशत हिस्सा शहरी है. वहीं कुल आबादी का 33.52 फीसदी अनुसूचित जाति हैं. इसके अलावा पंजाब से लगे इस क्षेत्र में सिखों की भी खासी आबादी है.
सांसद का रिपोर्ट कार्ड
साल 2014 के लोकसभा चुनाव की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में राज्य मंत्री के तौर पर जब निहालचंद मेघवाल को मौका मिला तो केंद्र में प्रतिनिधित्व को तरस रहे सीमावर्ती गंगानगर-हनुमानगढ़ इलाके से पहली बार कोई केंद्र मे कोई मंत्री बना. 2018 में हुए कैबिनेट फेरबदल में निहालचंद से मंत्रिपद वापस ले लिया गया. 47 वर्षीय बीजेपी सांसद निहालचंद मेघवाल पर साल 2011 में एक महिला ने रेप का आरोप लगाया था. उनके मंत्री बनने पर विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को खूब हवा दी.
गंगानगर सांसद निहालचंद मेघवाल ने स्नातक की पढ़ाई बीकानेर युनिवर्सिटी से पूरी की. मेघवाल पेशे से किसान और सामाजिक कार्यकर्ता है. मौजदा लोकसभा की कुल कार्रवाई में निहालचंद मेघवाल की संसद में 88.48 फीसदी उपस्थिति रही. इस दौरान उन्होंने 153 सवाल पूछे, 32 बहसों में हिस्सा लिया और 3 प्राइवेट मेंबर्स बिल पेश किए. सांसद विकास निधि की बात करें तो उन्होने कुल आवंटित धन का 92.6 फीसदी अपने लोकसभा क्षेत्र के विकास कार्यों में खर्च किया है.