राधामोहन सिंह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से जुड़े राजनेता हैं. 2014 में केंद्र में सरकार बनते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें कृषि मंत्रालय का जिम्मा सौंपा. राधामोहन सिंह बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे हैं.
राधामोहन सिंह का जन्म 1 सितंबर 1949 को पूर्वी चंपारण के एक छोटे से गांव नारहा पानापुर में हुआ. राधामोहन सिंह की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही पूरी हुई और ग्रेजुएशन (बीए) की डिग्री मोतिहारी स्थित बिहार यूनिवर्सिटी के एमएस कॉलेज से प्राप्त की. इनकी पत्नी का नाम शांति देवी है और दोनों से एक बेटा और एक बेटी हैं. राधामोहन सिंह राजनीति की बुलंदियों पर पहुंचने के बाद भी कृषि को ही अपना पेशा मानते हैं.
राधामोहन सिंह का राजनीतिक सफर
राधामोहन सिंह ने राजनीति की शुरुआत 1967 में छात्र नेता के तौर पर की. इस सफर में वे सबसे पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के नगर प्रमुख बनाए गए. एबीवीपी और जनसंघ से लेकर बीजेपी तक में कठिन परिश्रम और निष्ठा ने उन्हें बड़ा इनाम दिया और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कोर ग्रुप में शामिल किए गए. उनके जनसंपर्क और जनजुड़ाव का ही नतीजा है कि वह 1989 से लेकर अब तक मोतिहारी से 5 बार सांसद रहे.
सांगठनिक कार्यों के लिए भी उन्हें जाना जाता है. बड़े पदों पर रहते हुए लोगों से निरंतर मेल मिलाप और संगठन के एक एक सदस्य को पार्टी के साथ जोड़े रखने के लिए वे ख्यातिनाम हैं. इसी कारण उन्हें 2006 से 2009 तक बिहार प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया.
-राधामोहन सिंह 1970-77 तक बिहार में जनसंघ के संगठन सचिव रहे.
-1977 में उन्हें बीजेपी महासचिव बनाया गया.
-राधामोहन सिंह 1988 में भारतीय युवा मोर्चा (भाजयुमो) के अध्यक्ष बनाए गए.
-1989,1996,1999, 2009 और 2014 में सांसद निवार्चित हुए.
-1993 में उन्हें बिहार प्रदेश चुनाव समिति का सचिव नियुक्त किया गया.
-साल 2004-2005 में बीजेपी किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष रहे.
-2013 में उन्हें उत्तराखंड बीजेपी का प्रभारी बनाया गया.
-राधा मोहन सिंह 27 मई 2014 को कृषि मंत्री बनाए गए.
कृषि मंत्रालय कैसे बना किसान कल्याण मंत्रालय
2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि मंत्रालय को किसान कल्याण से जोड़ते हुए इसके कामकाज में कई बदलाव किए. कृषि मंत्रालय को नए नाम कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के नाम से जाना जाने लगा. मंत्रालय के अंतर्गत कल्याण विभाग बनाया गया और इसका काम एक बड़े अधिकारी को सौंपा गया. विभाग का काम यह देखना है कि किसानों का कल्याण कितना हो रहा है, नहीं हो रहा है तो क्या अड़चन आ रही हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र में अपनी सरकार बनने के साथ ही 'मोर ड्रॉप मोर क्रॉप' का नारा दिया था. इस नारे को साकार करने के लिए कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कई बड़े काम किए और सिंचाई व्यवस्था में परिवर्तन लाने के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाया. इसमें सूक्ष्म सिंचाई योजना काफी अहम है जिससे छोटे-बड़े सभी किसानों को फायदा पहुंच रहा है. राधामोहन सिंह के कार्यकाल में दलहन और दुग्ध विकास योजनाओं पर खासा ध्यान दिया गया और इसके लिए फंड बढ़ाया गया.
सॉइल हेल्थ कार्ड की क्रांतिकारी योजना
राधामोहन सिंह के कार्यकाल में मिट्टी की सेहत से जुड़े कई बड़े कदम उठाए गए. इनमें एक है मृदा स्वास्थ्य कार्ड यानी सॉइल हेल्थ कार्ड योजना. 2007-2008 में संयुक्त राष्ट्र ने पूरी दुनिया को सॉइल मैनेजमेंट अपनाने के लिए गंभीर चेतावनी दी. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि मिट्टी या तो मर रही है या फिर गंभीर रूप से बीमार है. इसलिए फौरन उस पर ध्यान न दिया गया तो कृषि की अवधारणा चौपट हो जाएगी. इसका कारण बेतहाशा फर्टिलाइजर का उपयोग बताया गया. इससे मिट्टी खराब तो हो ही रही है, किसानों की लागत भी काफी बढ़ती जा रही है जिसका नतीजा कृषिगत उत्पादों की महंगाई है.
पिछली सरकार ने भी इस दिशा में काम किया लेकिन मौजूदा सरकार ने इसे मिशन मोड में लिया और राज्यों को इसके अंतर्गत भरपूर राशि आवंटित की गई. हर दो साल पर मिट्टी की प्रकृति बदलती है, जिसे देखते हुए शुरुआती एक साल में सरकार ने राज्यों को 88 सॉइल टेस्ट मोबाइल लेबोरेटरी के लिए राशि आवंटित की. दो साल के अंदर राज्यों को 400 करोड़ रुपए दिए गए. देश में 14 करोड़ किसान हैं जिन्हें सॉइल हेल्थ कार्ड दिया जाना है. इस कार्ड से किसान जान सकेंगे कि उनके खेत की मिट्टी कैसी है, उसकी सेहत का क्या हाल है और आगे इसमें सुधार के लिए क्या जाना चाहिए.