बसपा सुप्रीमो मायावती आजकल अपने भतीजे आकाश आनंद को राजनीति के गुर सिखा रहीं हैं. आकाश मायावती के छोटे भाई आनंद के बेटे हैं और विदेश से पढ़ाई करके लौटे हैं. आमतौर पर अपने परिवार के लोगों को राजनीति से दूर रखने वाली मायावती इन दिनों आकाश के साथ कई जगह दिख चुकीं हैं. लखनऊ में बसपा सुप्रीमो के जन्मदिन के कार्यक्रम के दौरान आकाश लगातार उनके साथ थे. आकाश घर से लेकर दफ्तर तक गाड़ी में मायावती के साथ दिखे थे. यही नहीं जब अखिलेश यादव मायावती के घर पहुंचे थे तो फूल और शॉल देते वक्त वह मायावती के ठीक बगल में खड़े थे.
मायावती के परिवार में कई लोग हैं जो उनके करीबी हैं, लेकिन उनका सबसे ज्यादा लगाव अपने छोटे भाई आनंद से है. इससे पहले मायावती ने आनंद को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया था. लेकिन इसके साथ उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें कभी विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाएगा. अब आनंद किसी पद पर नहीं है लेकिन उनके बेटे आकाश पूरी तरह से सक्रिय दिखाई दे रहे हैं. चाहे वह 12 जनवरी को सपा-बसपा के बीच गठबंधन का मौका हो या फिर मायावती के जन्मदिन का अवसर. दोनों ही मौके पर आकाश मायावती के साथ नजर आए.
सूत्रों के मुताबिक मायावती आकाश को आने वाले दिनों में कोई अहम जिम्मेदारी भी दे सकती हैं. इससे पहले आकाश सहारनपुर हिंसा के दौरान मायावती के दौरे के वक्त भी दिखे थे. उसके बाद से ही लगातार कई बार वह राजनीतिक मेल-मिलाप के मौके पर भी देखे जा चुके हैं.
जानकार बताते हैं कि आकाश को सामने लाने की एक बड़ी वजह यह भी है कि मायावती दलित युवाओं को अपने करीब करने के लिए आकाश को एक चेहरे के रूप में पेश करना चाहती हैं.
इससे पहले आजमगढ़ के रहने वाले राजा राम को माना जा रहा था कि वह मायावती के उत्तराधिकारी होंगे, क्योंकि 2014 में मायावती ने राज्यसभा के उम्मीदवार के तौर पर राजा राम का नाम घोषित किया था. साथ ही साथ राजा राम कई बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रभारी भी रहे थे.
राजा राम के उत्तराधिकारी बनने की भी चर्चा हुई थी, क्योंकि 2007 में सरकार बनने के बाद मायावती ने मंच से कहा था उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी सजातीय उनसे करीब 15 साल छोटा होगा. लेकिन उनके परिवार का नहीं होगा. उस समय राजा राम को लेकर अफवाह उड़ी थी कि कहीं मायावती राजा राम को ही अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं करने जा रही हैं. बहरहाल अब हर महत्वपूर्ण मौके पर आकाश की मौजूदगी साफ करती है कि राजनीति के समुद्र में उतारने के लिए मायावती अपने भतीजे को पूरी तरह से तैयार कर रही हैं.
बता दें कि शनिवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने अपनी 23 साल की दुश्मनी भुलाकर साथ आने का ऐलान किया था. लोकसभा चुनाव में मोदी को मात देने के लिए दोनों पार्टियां यूपी में मिलकर चुनाव लड़ेंगी. दोनों ही पार्टियां 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. वहीं अमेठी और रायबरेली में गठबंधन अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगा. बता दें कि अमेठी से राहुल गांधी और रायबरेली से सोनिया गांधी सांसद हैं. वहीं, 2 सीटें राष्ट्रीय लोकदल के लिए छोड़ी गईं हैं.
पार्टी नेताओं की बैठक में मायावती ने कराया था परिचय
बसपा पार्टी नेताओं की सितंबर 2017 में एक बैठक हुई थी. उस बैठक में मायावती ने सबसे पहले आकाश आनंद का पार्टी नेताओं से परिचय कराया था. मायावती ने पार्टी नेताओं के सामने अपने भाई आनंद कुमार को बुलाया.उनके साथ आकाश आनंद भी मौजूद थे. मायावती ने कहा कि ये मेरे भतीजा आकाश है, जो लंदन से एमबीए करके वापस लौटा है और अब पार्टी का काम देखेगा.