पार्टी | सीट | वोट | वोट % |
---|---|---|---|
NDPP | 1 | 5,00,510 | 49.7 |
INC | 0 | 4,84,166 | 48.1 |
Others | 0 | 21,681 | 2.2 |
Total 10.1lac votes were polled.
5 candidates contested in 1 seats.
जिस 8 साल की उम्र में डोनाल्ड ट्रंप ने शानदार वापसी की है, बीजेपी अपने नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में भेज देती है, लेकिन अमित मालवीय का संकेत समझें तो लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ऐसी बातें लागू नहीं होने जा रही हैं. उनके मार्गदर्शक मंडल में जाने की अटकलों को छोड़िये, चौथे टर्म की तैयारी चल रही है.
Maharashtra Vidhan Sabha Chunav 2024: महाराष्ट्र चुनाव में भी सीट शेयरिंग को लेकर मध्य प्रदेश जैसा तनाव है. सपा दर्जनभर सीटों पर दावेदारी कर रही है. सपा ने सीटें नहीं मिलने पर अकेले चुनाव मैदान में उतरने की बात कह दी है. क्या महाराष्ट्र में भी सपा-कांग्रेस अलग राह पर बढ़ेंगी?
अरविंद केजरीवाल के ताजा सवाल भी उनके पुराने शिगूफे का ही एक्सटेंशन है. तब योगी आदित्यनाथ के बहाने था, अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी की सरकार से जुड़ा है - लेकिन क्या अरविंद केजरीवाल को ये सब करके कोई फायदा हो सकता है?
पंचायत आजतक में शिरकत करते हुए इल्जिता मुफ्ती ने कहा,' मुफ्ती साहब मोदी जी से मिले सबके सामने मिले. मेरी फैमिली ने नहीं बल्कि पीडीपी ने बीजेपी के साथ साथ गठबंधन किया. मुफ्ती साहब की कोशिश थी कि हम मोदी जी को मॉडरेट कर पाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका.'
राहुल गांधी तो अभी तक बीजेपी नेताओं को कठघरे में ही खड़ा करते रहे हैं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तो उसके आगे का इरादा भी बता दिया है. मल्लिकार्जुन खरगे की बातों से लगता है अगर केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व में INDIA ब्लॉक की सरकार बनी होती तो अभी सरकार चला रहे लोग जेल भेजे जा चुके होते.
अगर आज के दिन चुनाव हों तो किस पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती हैं, इसका आंकड़ा मूड ऑफ द नेशन के सर्वे में सामने आ गया है. जान लें कि यह सर्वे 15 जुलाई से 10 अगस्त के बीच किया गया है. इसका सैंपल साइज 1 लाख 36 हजार 463 है. सभी 543 लोकसभा क्षेत्रों में सर्वे हुआ है.
केंद्र शासित क्षेत्र जम्मू-कश्मीर में कभी भी विधानसभा चुनावों की घोषणा हो सकती है, लेकिन उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे क्षेत्रीय नेता बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं - क्योंकि उनको लगता है कि उपराज्यपाल को मिले अधिकारों की वजह से वहां भी दिल्ली जैसी राजनीति होने लगेगी.
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