Aparajita Sarangi
BJP
Manmath Kumar Routray
BJD
Syed Yashir Nawaz
INC
Nota
NOTA
Suresh Chandra Panigrahy
CPM
Hulas Senapati
IND
Kishor Kumar Sutar
IND
Sudhansu Sekhar Das
IND
Santosh Kumar Mishra
IND
Sangeeta Pattanaik
OJP
Pradeep Kumar Sahoo
KLS
Santilata Rout
SZPOB
Natabar Maharana
BHBIKP
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भुवनेश्वर ओडिशा की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है, जो खोर्जा जिले में स्थित है. इस क्षेत्र को ऐतिहासिक रूप से चक्र क्षेत्र और एकम्र क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता था. भुवनेश्वर में 700 मंदिर मौजूद हैं. इसे ‘टेम्पल सिटी’ भी कहा जाता है. साथ ही, यहां भगवान शिव के अवतार लिंगराज (त्रिभुवनेश्वर) का मंदिर है,जो एक प्रमुख तीर्थस्थल है. इतना ही नहीं यह शहर एक शिक्षा केंद्र और एक आकर्षक व्यावसायिक गंतव्य के रूप में उभर रहा है.
2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की आबादी 18 लाख 86 हजार 793 है. ओडिशा की राजधानी होने की वजह से यहां लगभग आधी आबादी शहरों में रहती है. आंकड़ों के मुताबिक यहां 49.17% जनसंख्या ग्रामीण है, जबकि 50.83 फीसदी आबादी शहरी है. यहां पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी का अनुपात 13.04 और 5.08 प्रतिशत है.
चुनाव आयोग के 2014 के आंकड़ों के मुताबिक भुवनेश्वर सीट पर कुल 15 लाख 27 हजार 768 मतदाता हैं. इसमें से पुरुष मतदाता 8 लाख 35 हजार 850 हैं. जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 6 लाख 91 हजार 918 है. 2008 के परिसीमन के बाद भुवनेश्वर लोकसभा सीट के तहत 7 विधानसभा की सात सीटें आई. ये सीटें हैं जयदेव, भुवनेश्वर मध्य, भुवनेश्वर उत्तर, एकमारा भुवनेश्वर, जटनी, बेगुनिया, खुरदा. 
1962 से लेकर 1971 तक इस सीट पर इस सीट पर लगातार कांग्रेस जीतती रही. 1977 में जब देश में कांग्रेस विरोधी लहर थी तो सीपीएम के शिवाजी पटनायक इस सीट से चुनाव जीते. 1980 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और चिंतामणि पाणिग्रही विजयी हुए. 84 के लोकसभा चुनाव में पाणिग्रही फिर जीते. लेकिन 1989 आते-आते यहां का समीकरण बदल चुका था.
1989 में जब देश में मंदिर आंदोलन ने असर दिखाना शुरु कर दिया, बावजूद इसके सीपीएम के शिवाजी पटनायक यहां से चुनाव जीते थे. 1991 के लोकसभा चुनाव में उन्हें फिर से जीत हासिल हुई. 1996 का लोकसभा चुनाव हुआ तो मतदाताओं का मिजाज फिर बदला. कांग्रेस के सौम्य रंजन पटनायक इस सीट से चुनाव जीते. ओडिशा और भुवनेश्वर लोकसभा सीट की राजनीति में बड़ा बदलाव तब हुआ जब 26 दिसंबर 1997 को नवीन पटनायक ने बीजू जनता दल बनाया गया था.
1998 में जब लोकसभा चुनाव हुए तो बीजू पटनायक की लोकप्रियता पर सवार और नवीन पटनायक के नेतृत्व में बीजेडी ने शानदार कामयाबी हासिल की. बीजेडी के टिकट पर प्रसन्न कुमार पटसानी चुनाव जीते थे.  
2019 का जनादेश
2019 में भुवनेश्वर लोकसभा सीट के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के दो पूर्व ऑफिसर मैदान में आमने-सामने थे. बीजेपी ने इस सीट से पूर्व आईएएस अपराजिता सारंगी को टिकट दिया था. अपराजिता सारंगी भुवनेश्वर महानगर पालिका की आयुक्त रह चुकी हैं.
इस सीट पर बीजेपी ने बीजेडी को मात दी. अपराजिता सारंगी ने 4,86,991 वोटों से जीत हासिल की. जबकि बीजेडी के अरूप पटनायक 4,63,152 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे और सीपीआई (एम) के जनार्दन पति 23,026 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे.
2014 का जनादेश
2014 में पूरे देश में भले ही मोदी का जादू चला हो, लेकिन पूरे ओडिशा में नवीन पटनायक का ही जलवा रहा. इस सीट पर प्रसन्न कुमार पटसानी 1 लाख 89 हजार 477 वोटों के मार्जिन से चुनाव जीते. इस चुनाव में उन्हें कुल 4 लाख 39 हजार 252 वोट मिले. बीजेपी के पृथ्वीराज हरिचंदन 2 लाख 49 हजार 775 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहे. कांग्रेस के बिजय मोहंती को 1 लाख 45 हजार 783 वोट मिले. यहां वोटिंग का प्रतिशत 58.37 रहा था.
Arup Mohan Patnaik
BJD
Janardan Pati
CPIM
Nota
NOTA
Sanjaya Kumar Sahoo
IND
Biswanath Rout
KRUP
Lalita Kumar Nayak
BSP
Susil Kumar Jena
IND
Jayant Kumar Das
IND
Subhranshu Sekhar Padhi
AITC
Biswanath Ramachandra
FPI
Mahesh Chandra Sethi
IND
Pramila Behera
CPIM
Bhakta Sekhar Ray
KS
Madhu Sudan Yadav
IND
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजद ने 12 सीटें जीती थीं, भाजपा को 8 और कांग्रेस को एक सीट मिली थी. लेकिन इस बार पार्टी ने 20 सीटें हासिल कर रिकॉर्ड जीत दर्ज की है. पुरी से संबित पात्रा ने भी 1 लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है.
ओडिशा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए 13 मई से 1 जून के बीच एक साथ वोटिंग होनी है. इस बार ओडिशा के चुनाव में बीजेडी, बीजेपी और कांग्रेस ने कुल राजघरानों के 12 सदस्यों को चुनावी मैदान में उतारा है.
लोकसभा चुनाव से ठीक बीजेपी को ओडिशा में झटका लगा है. राज्य बीजेपी की उपाध्यक्ष लेखाश्री सामंतसिंघर ने पार्टी से इस्तीफा देने के बाद सत्ताधारी बीजद का दामन थाम लिया है. उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत करने के बावजूद वह पार्टी नेतृत्व का भरोसा नहीं जीत पाईं. वह बालासोर से बीजेडी उम्मीदवार हो सकती हैं.
ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल के बीच कई दिनों से गठबंधन को लेकर बैठकें जारी थीं. चर्चा जोरों पर थी कि दोनों पार्टियों गठबंधन के तहत ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ेंगी, लेकिन इस पर पेंच फंस गया है और बीजेपी ने अब अकेले ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है.