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काराकाट में त्रिकोणीय लड़ाई! क्या NDA को नुकसान पहुंचा सकते हैं पवन सिंह

आसनसोल से अपना बीजेपी टिकट लौटाने के बाद, भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह ने अब आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बना लिया है. इस आशय की घोषणा बुधवार को भोजपुरी अभिनेता ने एक्स पर की थी. X पर हिंदी में लिखी अपनी पोस्ट में पवन सिंह ने दावा किया कि वह अपनी मां से किए वादे के मुताबिक काराकाट से चुनाव लड़ेंगे.

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भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह एक बार फिर सुर्खियों में है, वजह है लोकसभा चुनाव और उनकी दावेदारी कि वह काराकट सीट से चुनावी रण में उतरेंगे. उन्होंने अभी जल्द ही X पर पोस्ट करके इसका ऐलान किया. बता दें कि बीते दिनों अपने टिकट बंटवारे के दौरान बीजेपी ने पवन सिंह को पश्चिम बंगाल के आसनसोल से टिकट दिया था, तब तो पवन सिंह ने बेहद खुशी जताई थी और आसनसोल से अपना रिश्ता भी बयां किया था, लेकिन टिकट मिलने के ठीक अगले ही दिन उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. 

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अब एक दिन पहले ही पवन सिंह ने काराकाट सीट से अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की है. सवाल है कि क्या पवन सिंह काराकाट में एनडीए की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

आसनसोल से अपना बीजेपी टिकट लौटाने के बाद, भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह ने अब आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बना लिया है. इस आशय की घोषणा बुधवार को भोजपुरी अभिनेता ने एक्स पर की थी. X पर हिंदी में लिखी अपनी पोस्ट में पवन सिंह ने दावा किया कि वह अपनी मां से किए वादे के मुताबिक काराकाट से चुनाव लड़ेंगे. पवन सिंह के मैदान में आने से काराकाट में एनडीए और महागठबंधन के कुशवाहा उम्मीदवारों के बीच सीधी लड़ाई त्रिकोणीय होने की संभावनाएं बन रही हैं.

एनडीए में काराकाट सीट RLM को दी गई है और पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा इस सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं. महागठबंधन की ओर से सीपीआईएमएल के राजाराम सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार घोषित किया गया है.

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कुशवाहा का गढ़ है काराकाट

सोन नदी के तट पर फैली, काराकाट लोकसभा सीट 2009 से पहले अस्तित्व में नहीं थी और तब से इसका प्रतिनिधित्व कुशवाह उम्मीदवार करते रहे हैं. जदयू के महाबली सिंह ने 2009 में काराकाट से लोकसभा चुनाव जीता था. उपेन्द्र कुशवाह 2014 में काराकाट से सांसद बने. महाबली सिंह ने 2019 में फिर से इस सीट पर कब्जा कर लिया.

काराकाट में इस बार आगामी लोकसभा चुनाव में 18.50 लाख से अधिक मतदाता मताधिकार का प्रयोग करेंगे. यादव और कुशवाह मतदाता तो प्रचुर हैं ही, लेकिन सवर्ण (सामान्य कोटा) और मुस्लिम मतदाता भी अच्छी-खासी संख्या में हैं. काराकाट में करीब 3 लाख सवर्ण और करीब 2.5 लाख कुशवाहा वोटर होने का दावा किया जाता है. इनमें से राजपूत समुदाय के मतदाताओं की सामान्य कोटे के मतदाताओं में बड़ी हिस्सेदारी है. पवन सिंह उसी समुदाय से हैं, जो अन्य दो कुशवाह उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी चुनौती है.

भोजपुरी भाषी हैं काराकाट के लोग
रोहतास जिले के डेहरी, नोखा और काराकाट के मतदाता भोजपुरी बोलते हैं, जहां पवन सिंह को भोजपुरी भाषियों के बीच उनके प्रशंसक आधार के कारण वोट मिलने की संभावना है. हालाँकि, गोह, ओबरा और नबीनगर सहित औरंगाबाद के मतदाता मगही बोलते हैं, जहाँ पवन के प्रभाव पैदा करने की संभावना कम है.

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काराकाट लोकसभा में 6 विधानसभा सीटें
यदि काराकाट लोकसभा क्षेत्र की संरचना का सवाल है, तो इसमें रोहतास जिले की तीन विधानसभा सीटें शामिल हैं, जबकि तीन अन्य औरंगाबाद की हैं. इसमें रोहतास जिले के नोखा, डेहरी और काराकाट तथा औरंगाबाद जिले के गोह, ओबीआरए और नबीनगर शामिल हैं. इनमें से पांच विधानसभा सीटें पिछले राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान राजद ने हासिल की थीं, जबकि छठी सीट उसके सहयोगी सीपीआईएमएल की झोली में गिरी थी.

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