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जयंत और अखिलेश में मुजफ्फरनगर पर फंसा है पेंच, लेकिन NDA में नहीं जाएंगे 'छोटे चौधरी'

Lok Sabha Election 2024: मुजफ्फरनगर में प्रत्याशी को लेकर सपा और आरएलडी में खींचतान मची है. समाजवादी पार्टी चाहती है की हरेंद्र मलिक को वहां से चुनाव लड़ाया जाए. बेशक सपा के हरेंद्र मलिक आरएलडी के टिकट पर लड़ जाएं लेकिन उन्हें ही उम्मीदवार बनाया जाए. जबकि, आरएलडी के कई स्थानीय नेता इसके विरोध में है और नहीं चाहते की हरेंद्र मलिक को मुजफ्फरनगर की सीट दी जाए. 

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अखिलेश यादव और जयंत चौधरी (फ़ाइल फोटो)
अखिलेश यादव और जयंत चौधरी (फ़ाइल फोटो)

करीब पखवाड़े भर पहले जयंत चौधरी और अखिलेश यादव की लखनऊ में हुई मुलाकात के बाद दोनों के बीच सात सीटों पर डील हो गई. इन 7 सीटों में बागपत, मुजफ्फरनगर, कैराना, मथुरा और हाथरस तो तय हैं लेकिन दो सीटों पर अभी भी नाम को लेकर संशय बना हुआ है. अभी यह नहीं हो पा रहा कि मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, नगीना और फतेहपुर सीकरी में से कौन सी और 2 सीट आरएलडी को दी जाएगी. 

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मुजफ्फरनगर में प्रत्याशी को लेकर सपा और आरएलडी में खींचतान मची है. समाजवादी पार्टी चाहती है की हरेंद्र मलिक को वहां से चुनाव लड़ाया जाए. बेशक सपा के हरेंद्र मलिक आरएलडी के टिकट पर लड़ जाएं लेकिन उन्हें ही उम्मीदवार बनाया जाए. जबकि, आरएलडी के कई स्थानीय नेता इसके विरोध में है और नहीं चाहते की हरेंद्र मलिक को मुजफ्फरनगर की सीट दी जाए. 

हरेंद्र मलिक से क्या दिक्कत?

दरअसल, हरेंद्र मलिक जब कांग्रेस में हुआ करते थे तब से चौधरी परिवार से पुरानी अदावत रही है और मुजफ्फरनगर सीट चौधरी परिवार की कोर सीट मानी जाती है. इसलिए जयंत चौधरी या तो खुद के लिए या अपने किसी करीबी को यहां से लड़ना चाहते हैं लेकिन जैसा कि तय हो चुका है कि ना तो जयंत चौधरी चुनाव लड़ेंगे और ना ही उनकी पत्नी चारु. ऐसे में पार्टी के भीतर कई नेता मुजफ्फरनगर सीट की दावेदारी कर रहे हैं. 

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समाजवादी पार्टी का मानना है कि संजीव बालियान को अगर कोई चुनौती दे सकता है तो वह या तो चौधरी परिवार या फिर हरेंद्र मलिक लेकिन जयंत की पार्टी का काडर हर हाल में यह सीट अपने लिए चाहता है. वह नहीं चाहता कि सपा का कैंडिडेट हो और आरएलडी का सिंबल और यही लड़ाई अब सतह पर आ गई है. दावे तो यह भी किया जा रहे हैं कि अगर मुजफ्फरनगर पर समाजवादी पार्टी अपना कैंडिडेट देती है तो आरएलडी के कार्यकर्ताओं में नाराजगी को संभालना मुश्किल हो सकता है. 

हालांकि माना जा रहा है कि अखिलेश और जयंत के बीच मुजफ्फरनगर का फार्मूला तय हो चुका है, जिसमें हरेंद्र मलिक आरएलडी के सिंबल पर चुनाव में उतरेंगे लेकिन जयंत चौधरी इसे फिलहाल अपने कार्यकर्ताओं में जाहिर नहीं कर रहे. 

NDA में नहीं जाएंगे 'छोटे चौधरी'

नीतीश कुमार के तर्ज पर एनडीए में जयंत के जाने की चर्चा तो सियासी फिजा में तैरती रहती है लेकिन एक बार गठबंधन हो जाने, सीटों की संख्या तय हो जाने और अखिलेश और जयंत हाल में हुई मुलाकात में सब कुछ तय हो जाने के बाद अचानक से एनडीए की ओर रुख करने का कोई कारण नहीं है. ऐसा आरएलडी की सियासत पर नजर रखने वालों का भी मानना है. 

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बहरहाल, बसपा के एक बड़े गुर्जर चेहरे और चंद्रशेखर रावण को लेकर भी दोनों दलों में चर्चा है. चंद्रशेखर रावण को जयंत चौधरी नगीना से लड़ाना चाहते हैं, जबकि अखिलेश यादव से फिलहाल चंद्रशेखर की कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही. 

माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में आरएलडी को दी गई सीटों का ऐलान हो सकता है. अगर मुजफ्फरनगर पर समाजवादी पार्टी की चली तो उसके एवरेज में आरएलडी को एक सीट और बढ़ाई जा सकती है. यह फार्मूला भी इस वक्त दोनों दलों के बीच चर्चा में है. 

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