समाजवादी पार्टी ने कन्नौज लोकसभा सीट से तेज प्रताप यादव को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि उनका टिकट कट सकता है. चर्चा है कि सपा मुखिया खुद अपनी पुरानी सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. ऐसी अटकलों के बीच चुनाव लड़ने को लेकर अखिलेश यादव का रिएक्शन आया है.
सपा ने कन्नौज से फिलहाल लालू प्रसाद यादव के दामाद और अखिलेश के भतीजे तेज प्रताप को प्रत्याशी बनाया है. तेज प्रताप पहले भी मैनपुरी सीट से चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन ऐसी चर्चा है कि उनका टिकट कट सकता है. कहा जा रहा है कि अखिलेश खुद अपनी पुरानी सीट से मैदान में उतर सकते हैं.
वहीं भाजपा पर निशाना साधते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी इस चुनाव में इतिहास बन जाएगी. उन्होंने कहा, "अखबारों में पढ़ा है कि विदेशी पत्रकार को भारत छोड़ने के लिए कहा गया है, सच्चाई यह है कि संस्थाएं बीजेपी के लिए काम कर रही हैं. इस सरकार से सवाल है कि आपकी क्रेडिबिलिटी क्या है, प्रधानमंत्री ने कहा, यह भाषा कैसी है, चुनाव आयोग क्या कर रहा है, आप सवालों से बीजेपी को फायदा पहुंचा रहे हो."
अखिलेश के कन्नौज से चुनाव लड़ने की संभावना इसलिए जताई जा रही है क्योंकि पार्टी के स्थानीय नेताओं ने उनसे अपने भतीजे तेज प्रताप यादव को इस सीट से मैदान में उतारने के फैसले को बदलने की गुजारिश की है. हालांकि इस मामले में आखिरी और आधिकारिक फैसला भी पार्टी की ओर से ही लिया जाएगा.
कौन हैं तेज प्रताप यादव, जिन्हें सपा ने उतारा?
तेज प्रताप यादव के पिता रणवीर सिंह यादव, अखिलेश यादव के चचेरे भाई थे. उनका 36 वर्ष की उम्र में ही निधन हो गया था. वो राजनीति में सक्रिय थे और ब्लॉक प्रमुख भी रहे. उसके बाद उनकी पत्नी मृदुला यादव भी सैफई की ब्लॉक प्रमुख रहीं. तेज प्रताप की पत्नी राजलक्ष्मी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी हैं.
मैनपुरी से सांसद रह चुके हैं तेज प्रताप
तेज प्रताप यादव मैनपुरी से सांसद रह चुके हैं. जब नेताजी मुलायम सिंह यादव ने 2014 के चुनावों में दो सीटों आजमगढ़ और मैनपुरी से चुनाव लड़ा था और दोनों सीट से जीत गए थे. उसके बाद उन्होंने मैनपुरी सीट छोड़ दी थी, जिस पर हुए उपचुनाव में सपा ने तेज प्रताप को मैदान में उतार दिया था और वो पहली बार देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचे थे. हालांकि 2019 के चुनाव में तेज प्रताप को टिकट नहीं दिया गया था और मैनपुरी से नेताजी ने चुनाव लड़ा था. जब मुलायम सिंह का निधन हो गया, उसके बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव में डिंपल यादव ने जीत हासिल की थी.