लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान होने के बाद अब बाद एग्जिट पोल के नतीजे भी आ चुके हैं. Exit Poll में बीजेपी बंपर सीटों के साथ जीत दर्ज करती नजर आ रही है. बता दें कि चुनाव के नतीजे 4 जून को आने वाले हैं, लेकिन इससे पहले एग्जिट पोल के नतीजे बीजेपी के पक्ष में जाते दिख रहे हैं. असम में NDA के वोट शेयर में 5 फीसदी की बढ़ोतरी दिख रही है.
इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया के पोल की मानें तो, असम में NDA के वोट शेयर में 5 फीसदी का इजाफा दिख रहा है. तो वहीं 38 फीसदी वोट शेयर इंडिया को मिल रहा है. सीटों की बात करें तो NDA को असम में 9-11 और INDIA ब्लॉक को 2-4 सीटें मिल सकती हैं.
जोरहाट में गोगोई बनाम गोगोई की लड़ाई
असम का जोरहाट लोकसभा क्षेत्र हॉट सीट बना हुआ है. इस सीट से दोनों ही पार्टियों ने गोगोई उम्मीदवार पर दांव लगाया है. कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे और गौरव गोगोई को चुनाव मैदान में उतारा है तो वहीं बीजेपी ने इस सीट पर सीटिंग सांसद तपन गोगोई को टिकट दिया है.
Exit Poll में तपन गोगोई को बढ़त
दोनों ही प्रभावशाली अहोम समुदाय से आते हैं और इस इलाके में अच्छा होल्ड रखते हैं. इंडिया टुडे एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक इस सीट पर बीजेपी के तपन गोगोई और कांग्रेस के गौरव गोगोई के बीच सीधा मुकाबला है. एग्जिट पोल में तपन गोगोई को बढ़त मिलती नजर आ रही है.
स्थानीय मुद्दे क्या
जोरहाट में स्वास्थ्य और शिक्षा मुख्य मुद्दे हैं. चुनाव प्रचार के दौरान कनेक्टिविटी का मुद्दा भी छाया रहा. जोरहाट और इसके आसपास के जिलों की पहचान व्यापारिक, आध्यात्मिक केंद्र के साथ पर्यटन को लेकर भी है. दोनों ही दलों ने इस सीट पर चुनाव प्रचार के लिए स्टार प्रचारकों की फौज उतार दी थी.
जोरहाट के समीकरण
जोरहाट लोकसभा सीट के तहत 10 विधानसभा सीटें हैं. इस क्षेत्र में अहोम और चाय बागान में काम करने वाली आबादी प्रभावशाली है. जोरहाट लोकसभा क्षेत्र में अहोम मतदाताओं की तादाद 5.5 लाख और चाय बागानों में काम करने वाले मतदाताओं की तादाद करीब 3.1 लाख है. यह दोनों ही मतदाता वर्ग चुनाव नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. इस क्षेत्र में कोच, कलिता और ब्राह्मण मतदाताओं की तादाद भी करीब डेढ़ लाख है. हिंदू बंगाली और मुस्लिम मतदाताओं की तादाद भी करीब 1 लाख 5 हजार और डेढ़ लाख है.
जोरहाट सीट का इतिहास
जोरहाट सीट के चुनावी अतीत की बात करें तो यह सीट 1991 से 2009 के चुनाव तक कांग्रेस का गढ़ रही. कांग्रेस के टिकट पर विजयकृष्ण हांडिक इस सीट से लगातार संसद पहुंचते रहे लेकिन 2014 के चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार से उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2014 में बीजेपी के कामाख्या प्रसाद तासा ने हांडिक को एक लाख वोट से अधिक के अंतर से हरा दिया था. 2019 में कांग्रेस ने उम्मीदवार बदल दिया लेकिन फिर हार मिली. 2019 में बीजेपी के तपन कुमार गोगोई ने कांग्रेस उम्मीदवार को 82 हजार से अधिक वोट से हरा दिया था.
खोया गढ़ छीन पाएंगे गौरव?
गौरव गोगोई कालियाबोर सीट से दो बार के सांसद हैं. जोरहाट से वह पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन इस इलाके के लोगों के लिए वह अनजाना या नया नाम भी नहीं हैं. गौरव के पिता तरुण गोगोई का इलाके में अच्छा होल्ड था. तरुण गोगोई राज्य की राजनीति में एक्टिव होने से पहले दो बार इस सीट से सांसद रहे थे. तरुण जिस तिताबार विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते थे, वह सीट भी जोरहाट लोकसभा क्षेत्र में ही आती है. कांग्रेस को उम्मीद है कि तरुण के साथ प्रभावशाली अहोम समाज के भावनात्मक रिश्ते का लाभ गौरव को मिल सकता है.