scorecardresearch
 

अमेठी से आ रहे रुझानों में स्मृति ईरानी पीछे, गांधी परिवार के करीबी माने जाते केएल शर्मा को बढ़त, जानें- कौन है ये शख्स

लोकसभा चुनाव में यूपी के अमेठी से बीजेपी ने स्मृति ईरानी को टिकट दिया था, वहीं कांग्रेस ने किशोरी लाल शर्मा को चुनावी मैदान में उतारा था. अब इस हॉट सीट पर बीजेपी को झटका लगता दिख रहा है. शुरुआती रुझानों में कांग्रेस के प्रत्याशी 45 हजार से ज्यादा वोटों से आगे चल रहे हैं. जानिए कौन हैं किशोरी लाल.

Advertisement
X
कांग्रेस ने अमेठी सीट से किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया था.
कांग्रेस ने अमेठी सीट से किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया था.

चुनाव आयोग के अब तक के आंकड़ों के मुताबिक, किशोरी लाल शर्मा स्मृति ईरानी से 45718  हजार वोटों से आगे चल रहे हैं. किशोरी लाल शर्मा को अब तक 146911 वोट मिल चुके. वहीं, स्मृति ईरानी को 101193 वोट मिले हैं. ये बड़ा अंतर है जबकि इसी सीट से पिछले चुनाव में ईरानी ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को हराया था. 

Advertisement

केएल शर्मा का पूरा नाम किशोरी लाल शर्मा है, जो गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं. मूलत पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं. शर्मा ने 1983 में राजीव गांधी के साथ रायबरेली और अमेठी में कदम रखा था. बाद में राजीव गांधी के अचानक निधन के बाद गांधी परिवार से उनके रिश्ते पारिवारिक हो गए और वो गांधी परिवार के ही होकर रह गए. 

रायबरेली और अमेठी सीट पर सक्रिय रहे केएल शर्मा

1991 में राजीव गांधी की मौत के बाद शर्मा ने कभी शीला कौल के काम को संभाला तो कभी सतीश शर्मा के लिए मदद की. ऐसे में शर्मा का अक्सर रायबरेली और अमेठी में आना-जाना बना रहा. हालांकि, जब पहली बार सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति में उतरीं और अमेठी से चुनाव लड़ीं तो केएल शर्मा उनके साथ अमेठी आ गए. जब सोनिया गांधी ने राहुल गांधी के लिए अमेठी सीट छोड़ दी और खुद रायबरेली आ गईं तो केएल शर्मा ने रायबरेली और अमेठी दोनों ही सीटों की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली.

Advertisement

kishori lal sharma amethi congress

निष्ठा और वफादारी का मिल गया इनाम

धीरे-धीरे वक्त बीतता गया और शर्मा रायबरेली और अमेठी दोनों ही क्षेत्र के संसदीय कार्यों की देखरेख करने लगे. वक्त के साथ लोग कांग्रेस को छोड़ते गए, लेकिन केएल शर्मा की निष्ठा और वफादारी में कभी कोई कमी नहीं रही. शर्मा को सोनिया गांधी का करीबी माना जाता है.

हालांकि ये अकेला फैक्टर नहीं. फिलहाल दिख रही बढ़त के पीछे कई और कारण हो सकते हैं. जैसे लंबे समय से अमेठी और रायबरेली में जमीनी स्तर पर काम करने की वजह से स्थानीय लोग उन्हें अच्छी तरह जानते हैं. इसकी झलक भी अब तक के रुझान में दिख रही है. जातीय समीकरण में भी किशोरी लाल फिट बैठते हैं. बता दें कि अमेठी में दलित लगभग 26 फीसदी,  मुस्लिम 20 फीसदी और ब्राह्मण 18 फीसदी के करीब हैं. ये आंकड़े न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने जारी किए थे. 

Live TV

Advertisement
Advertisement