बिहार में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में अब तक आधिकारिक रूप से सीट समझौते की घोषणा नहीं हुई है लेकिन इस बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद और लेफ्ट पार्टियां लगातार अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर रही है और उन्हें सिंबल भी देती जा रही है. बिहार कांग्रेस नेतृत्व ने इस पर चुप्पी साध रखी है.
दरअसल चर्चा औरंगाबाद और बेगूसराय लोकसभा सीट को लेकर हो रही है जहां कांग्रेस अपने प्रत्याशी उतारना चाहती थी और सीट बंटवारे में इन दोनों सीटों पर उसकी दावेदारी थी लेकिन सीटों का बंटवारा अब तक नहीं हो पाने की वजह से इन दोनों सीटों पर आरजेडी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने-अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए हैं.
लालू प्रसाद ने औरंगाबाद से अभय कुशवाहा को पार्टी का उम्मीदवार बनाकर सिंबल दे दिया है तो दूसरी तरफ बेगूसराय में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अवधेश राय को अपना उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर दी है.
सूत्रों की माने तो कांग्रेस पार्टी औरंगाबाद से पूर्व सांसद निखिल कुमार को उम्मीदवार बनाना चाह रही थी लेकिन उससे पहले ही लालू ने कांग्रेस के साथ बड़ा खेल करके अभय कुशवाहा को पार्टी का सिंबल दे दिया.
औरंगाबाद में पहले चरण में वोटिंग
बता दें कि बिहार के औरंगाबाद में लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 19 अप्रैल को ही वोटिंग होगी. वहीं दूसरी तरफ बेगूसराय सीट पर कांग्रेस अपने पार्टी के फायर ब्रांड नेता कन्हैया कुमार को उम्मीदवार बनाना चाह रही थी और लगातार महागठबंधन के अन्य घटक दलों से उसकी बातचीत चल रही थी, लेकिन लालू प्रसाद के एकतरफा फैसला लेने से प्रभावित होकर शुक्रवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने बेगूसराय से अवधेश राय की उम्मीदवारी की घोषणा कर दी और कांग्रेस खाली हाथ रह गई.
औरंगाबाद सीट हाथ से निकलने के बाद पार्टी के पूर्व सांसद निखिल कुमार ने आरजेडी पर हमला बोला है और कहा है कि कांग्रेस को तुरंत इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और लालू प्रसाद को एक तरफा फैसला करने से रोकना चाहिए. गौरतलब है, निखिल कुमार औरंगाबाद से पूर्व में सांसद रह चुके हैं और उन्होंने पार्टी आलाकमान से कहा है कि लालू को कांग्रेस की सीट के बारे में फैसला करने से रोका जाना चाहिए.
बेगूसराय में भी कांग्रेस को झटका
वहीं बेगूसराय में अवधेश राय की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद कांग्रेस को एक और झटका लगा है. 2019 के लोकसभा चुनाव में कन्हैया कुमार बेगूसराय से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार थे. लेकिन अब वो कांग्रेस में है इसीलिए कांग्रेस उन्हें बेगूसराय से चुनाव में उतारने की तैयारी कर रही थी. उससे पहले ही लेफ्ट पार्टी ने झटका दे दिया है.
अब ऐसे में बिहार महागठबंधन में कांग्रेस की लगातार हो रही अनदेखी से सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या कांग्रेस को 40 में से अब 8 या 9 सीट भी लड़ने को मिल पाएगा क्योंकि जिस तरीके से आरजेडी और लेफ्ट अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर रहे हैं उसे कांग्रेस सकते में आ गई है.