आम चुनाव करीब आते ही कांग्रेस में महाराष्ट्र से लेकर गुजरात तक नाराजगी की खबरें हैं. जिन नेताओं की पहले कभी कांग्रेस में खासा दबदबा माना जाता था, उनके परिवार की नई पीढ़ी आज अपने लिए सियासी जमीन खोजते और हाईकमान को तेवर दिखाते नजर आ रही है. मुंबई में पहले मिलिंद देवड़ा, फिर अशोक चव्हाण,, उसके बाद बाबा सिद्दीकी ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है. उसके बाद बाबा सिद्दीकी के विधायक बेटे ने भी शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और अब गुजरात में भी टकराव की स्थिति बन गई है. यहां INDIA ब्लॉक में सहयोगी आम आदमी पार्टी को लेकर स्थानीय कांग्रेस नेताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है.
गुजरात में भरूच सीट AAP को दिए जाने की चर्चाओं पर कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे दिवंगत अहमद पटेल के परिवार का गुस्सा सातवें आसमान पर है. पहले बेटे फैसल अहमद पटेल ने बयान देकर राजनीति गरमाई और अब बेटी मुमताज ने भी साफ कर दिया है कि वो AAP को भरूच सीट दिए जाने के पक्ष में नहीं हैं.
शुक्रवार को मुमताज पटेल ने कहा, मैं अहमद पटेल की बेटी हूं. बीजेपी में नहीं जाऊंगी. लेकिन अगर भरूच सीट कांग्रेस को नहीं मिली तो मेरा दिल टूट जाएगा. उन्होंने आगे कहा, जिंदगी में बहुत कुछ चाहिए होता है. लेकिन सबको सब-कुछ नहीं मिलता है. वहीं, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने मुमताज की नाराजगी की खबरों पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, हम आपस में बैठकर निपटा लेंगे. चुनाव लड़ने की इच्छा सबकी होती है. इसको हैंडल कर लेंगे. जानिए आजतक से खास बातचीत में मुमताज पटेल ने क्या कहा...
सवाल : आपने ग्राउंड पर भरूच की बेटी के नाम पर कैंपेनिंग की है. ऐसा लग रहा है कि सीट AAP को मिलेगी?
जवाब: पिछले 2 सालों से हम भरूच में ग्राउंड पर रहकर काम कर रहे थे. बहुत सारी बातें चल रही हैं. लेकिन अभी तक उम्मीदवार के नाम पर कुछ फाइनल नहीं हुआ है.
सवाल : आपके भाई फैसल पटेल ने भी AAP को सीट दिए जाने की स्थिति में नाराजगी जताई है?
जवाब: जब ये खबर आई थी कि भरूच सीट AAP को दी जाएगी तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं में काफी गुस्सा था. ग्राउंड पर कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि अगर कांग्रेस का कैंडीडेट नहीं होगा तो हम किसी और पार्टी के लिए काम नहीं करेंगे.
सवाल: ये आपके पिता की धरती है. अगर भरूच की सीट नहीं मिली तो?
जवाब: अगर भरूच सीट कांग्रेस को नहीं मिली तो मेरा दिल टूटेगा. सबका दिल टूटेगा. लेकिन क्या कर सकते हैं. उम्मीद करती हूं कि सीनियर लीडरशिप सोचेगी. हम इज्जत करेंगे जो भी फैसला लिया जाएगा. कांग्रेस परिवार साथ में है.
सवाल: BJP ने आपका स्वागत किया है. क्या बीजेपी में जाने का विचार है?
जवाब: मैं कांग्रेस की कार्यकर्ता हूं. मैं अहमद पटेल की बेटी हूं. मैं कभी कांग्रेस नहीं छोड़ूंगी. मैं बीजेपी में नहीं जाऊंगी.
सवाल: लेकिन कांग्रेस के कई नेता BJP में जा रहे हैं?
जवाब: सबको सब-कुछ नहीं मिलता है. सबको बहुत कुछ चाहिए होता है. लेकिन, मैं नाराज होकर अपनी दिशा नहीं बदल सकती हूं.
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'वरना मैं अलायंस का समर्थन नहीं करूंगा'
इससे पहले अहमद पटेल के बेटे फैसल ने कहा था, कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है. इंडिया ब्लॉक हमारे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. अगर कांग्रेस को उम्मीदवारी मिलती है तो इससे कांग्रेस और INDIA ब्लॉक को ही फायदा होगा. कांग्रेस के लिए भरूच जिला जीतना बहुत आसान होगा. AAP की ताकत सिर्फ एक विधानसभा सीट पर है. 2022 में AAP का ग्राफ गिरा है. मेरा मानना है कि भरूच सीट कांग्रेस को मिलना चाहिए. वरना मैं इस गठबंधन का समर्थन नहीं करूंगा.
जानिए अहमद पटेल के बारे में...
अहमद पटेल को गुजरात में कांग्रेस के डैमेज कंट्रोलर और फायर ब्रिगेड के तौर पर जाना जाता था और एक समय ऐसा आया, जब वे गांधी परिवार के बेहद करीबी हो गए थे. अहमद पटेल तीन बार लोकसभा और पांच बार राज्यसभा सांसद रहे हैं, लेकिन एक बार भी मंत्री नहीं बने. गुजरात से लोकसभा पहुंचने वाले वो आखिरी मुस्लिम सांसद भी थे. अहमद पटेल भरूच से 1984 में तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीते थे और 1989 में बीजेपी से हारने के बाद उन्होंने राज्यसभा का रास्ता आख्तियार कर लिया. उसके बाद गुजरात में कोई दूसरा मुस्लिम नेता चुनाव जीतकर लोकसभा नहीं पहुंच सका.
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'सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार थे अहमद पटेल'
1977 के आम चुनाव में इंदिरा गांधी समेत कांग्रेस के तमाम दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन गुजरात से 26 साल के अहमद पटेल ने चुनाव जीतकर हर किसी को चौंका दिया था. ये अहमद के संसदीय जीवन की शुरुआत भी थी. इसके चलते वे कांग्रेस नेतृत्व की नजर में आ गए और फिर वे 1980 और 1984 में भी आम चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे. 2001 में वे सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार बने और आखिर तक इसी जिम्मेदारी को निभाते रहे.
'मिलिंद देवड़ा ने भी कांग्रेस से 55 साल पुराना रिश्ता खत्म किया'
बताते चलें कि महाराष्ट्र में भी कांग्रेस के अंदरखाने नाराजगी की खबरें हैं. वहां कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की अगली पीढ़ी हाईकमान से नाराज होकर हाल ही में पार्टी का साथ छोड़ चुकी है. महाराष्ट्र में पहले कांग्रेस को मिलिंद देवड़ा के इस्तीफे के रूप में बड़ा झटका लगा. उन्होंने कांग्रेस के साथ अपने 55 साल के पारिवारिक रिश्ते को खत्म किया है. मिलिंद के पिता मुरली देवड़ा कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे हैं. मिलिंद दक्षिण मुंबई सीट से दो बार सांसद रह चुके हैं. इस सीट से उन्होंने 2004 और 2009 में चुनाव जीता था. वे मनमोहन सरकार में केंद्र में मंत्री भी रहे हैं. दक्षिण मुंबई सीट से मिलिंद के पिता मुरली देवड़ा भी सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं. देवड़ा और गांधी परिवार के रिश्ते बेहद करीबी माने जाते थे. मिलिंद को राहुल गांधी का करीबी दोस्त कहकर पेश किया जाता था. हाल ही में मिलिंद पार्ट हाईकमान के रुख से नाराज चल रहे थे. वे एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना का हिस्सा बन गए हैं.
'अशोक चव्हाण ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ा'
मिलिंद के बाद महाराष्ट्र में अशोक चव्हाण ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है. अशोक और उनके पिता शंकर राव चव्हाण भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे हैं. राज्य के इतिहास में यह पिता और बेटे की पहली जोड़ी है, जो मुख्यमंत्री बनी है. उन्होंने राजनीति के गुर अपने पिता से सीखे. अशोक चव्हाण दो बार लोकसभा सांसद, दो बार मुख्यमंत्री और तीन बार विधायक रह चुके हैं. हाल ही में हाईकमान से नाराज होकर उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है. वे बीजेपी में शामिल हो गए हैं और राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार हैं.
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'बाबा सिद्दीकी एनसीपी में गए, बेटा भी कांग्रेस से नाराज'
इसी तरह, कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक बाबा सिद्दीकी ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है. वे अजित पवार गुट की एनसीपी का हिस्सा बन गए हैं. उन्होंने 48 साल बाद कांग्रेस छोड़ी है. बाबा, बांद्रा से तीन बार विधायक रह चुके हैं. उनके बेटे जीशान सिद्दीकी भी कांग्रेस के विधायक हैं. हाल ही में कांग्रेस में जीशान को यूथ कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी से हटा दिया है. उसके बाद से जीशान भी हाईकमान से नाराज चल रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान राहुल गांधी की टीम के एक सदस्य ने उनसे कहा था कि अगर वो वायनाड सांसद से मिलना चाहते हैं तो अपना वजन कम से कम 10 किलो कम करें.
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(इनपुट- सुबोध कुमार, मोहित जोशी)